Real estate direct investment in India: मकान, फ्लैट या कोई भी प्रॉपर्टी खरीदते समय हर व्यक्ति सोचता है कि उसका भविष्य कैसा होगा? 10 या 20 साल बाद जब बच्चे बड़े हो जाएंगे तो उसकी कीमत कितनी होगी? अगर आपने आज कोई घर या मकान खरीदा है तो उसका भविष्य कैसा होगा, उसका जवाब भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर ने अभी दे दिया है. सिर्फ पिछले 15 सालों के आंकड़े बताते हैं कि रियल एस्टेट का भविष्य आगे क्या होने वाला है.
क्रेडाई और कोलियर्स इंडिया की संयुक्त रिपोर्ट में रियल एस्टेट को लेकर बताया गया है कि यह देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ और वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है. पिछले 15 सालों में इस सेक्टर ने 80 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश आकर्षित किया है, जिसमें से लगभग 57 प्रतिशत विदेशी निवेशकों का योगदान रहा है. यह आंकड़ा बताता है कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर कितनी तेजी से वैश्विक निवेश मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहा है. इसका फायदा कीमतें बढ़ने के साथ ही निवेशकों को सीधे तौर पर मिल रहा है. इतना ही नहीं 2047 तक भारत का रियल एस्टेट बड़ी पहचान हासिल कर लेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रियल एस्टेट बाजार ने बीते वर्षों में जिस तरह की प्रगति की है, उसने निवेशकों का विश्वास और भी मजबूत किया है. कोविड-19 महामारी के बाद घरेलू पूंजी का योगदान भी बढ़ा है, जिससे यह सेक्टर और स्थिर हुआ है. निवेशक अब भारत को केवल विकासशील बाजार नहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक हब के रूप में देख रहे हैं.
2047 तक 5-10 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रियल एस्टेट का आकार 2047 तक 5 से 10 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है. यह अनुमान बताता है कि आने वाले दो दशकों में यह सेक्टर न केवल देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देगा बल्कि लाखों रोज़गार के अवसर भी पैदा करेगा. इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों को भी तेज से बढ़ावा मिलेगा. साथ ही जिन लोगों ने आज मकान या प्रॉपर्टी में निवेश किया है, आने वाले सालों में या 2047 तक रियल एस्टेट क्षेत्र के आगे बढ़ने से उन्हें भी फायदा मिलेगा.
जीवन की गुणवत्ता में सुधार
भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर का भविष्य केवल वर्ग फुट या संपत्ति मूल्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाखों नागरिकों की जीवनशैली और गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा है. स्मार्ट सिटी, आधुनिक टाउनशिप, ग्रीन बिल्डिंग्स और टिकाऊ निर्माण के चलते यह सेक्टर भारतीय नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित जीवन का आधार प्रदान करेगा.
शहरी विकास की रीढ़
2047 तक भारत जिस तरह के शहरी बदलाव की ओर बढ़ रहा है, उसमें रियल एस्टेट सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रहेगी. देशभर में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स – जैसे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार, एक्सप्रेस-वे, स्मार्ट सिटी मिशन और औद्योगिक कॉरिडोर – सीधे तौर पर रियल एस्टेट को गति दे रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारत का शहरी परिदृश्य वैश्विक मानकों पर खरा उतरेगा.
निवेशकों और ग्राहकों दोनों के लिए सुनहरा अवसर
इस बारे में रियल एस्टेट एक्सपर्ट, ओकस ग्रुप के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश मेहता कहते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती से जहां विदेशी और घरेलू निवेशकों को उच्च रिटर्न का भरोसा मिल रहा है, वहीं आम नागरिकों को भी आधुनिक और किफायती आवास उपलब्ध हो रहे हैं. आवासीय और वाणिज्यिक दोनों ही क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. आने वाले वर्षों में यह सेक्टर भारत की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ साबित होगा.
इन्वेस्टर्स क्लिनिक के को-फाउंडर,सनी कत्याल कहते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर पिछले 15 वर्षों में जिस गति से आगे बढ़ा है, वह आने वाले समय की बड़ी संभावनाओं का संकेत है. 80 अरब डॉलर का संस्थागत निवेश और 2047 तक 5-10 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने की क्षमता बताती है कि भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन का निर्माण करेगा, बल्कि वैश्विक निवेशकों के लिए भी सबसे आकर्षक गंतव्य बनेगा.
अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल कहते हैं कि भारतीय रियल एस्टेट अब केवल वर्ग फुट के हिसाब से नहीं मापा जाएगा. यह नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार से जुड़ा हुआ है. स्मार्ट सिटी, आधुनिक टाउनशिप और ग्रीन बिल्डिंग्स से आने वाले समय में भारतीय परिवारों को सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर जीवन का अनुभव मिलेगा.
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन, हरविंदर सिंह सिक्का कहते है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर आज दोहरे अवसर प्रदान कर रहा है. निवेशकों के लिए उच्च रिटर्न और आम नागरिकों के लिए किफ़ायती आधुनिक आवास. यही संतुलन इस उद्योग की सबसे बड़ी ताकत है. आने वाले समय में चाहे आवासीय हो या वाणिज्यिक, भारत का हर प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरेगा.