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Grafting Technique: कृषि एक्सपर्ट एसपी सिंह बताते हैं कि ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं. इससे किसानों को कम समय में ज्यादा लाभ मिलता है. कन्नौज के किसान यदि इस तकनीक को अपनाएं तो वे अपन…और पढ़ें
क्या है ग्राफ्टिंग तकनीक
ग्राफ्टिंग में किसी अच्छे फल देने वाले पौधे की टहनी स्कायन को किसी दूसरे पौधे की जड़ वाले हिस्से रूटस्टॉक से जोड़ दिया जाता है. कुछ ही समय में यह दोनों हिस्से आपस में जुड़ जाते हैं और एक नया पौधा तैयार हो जाता है.
इस विधि से किसान अपने सबसे अच्छे फलदार एक ही पौधे से कई नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं. किसान अपनी ही नर्सरी बनाकर अतिरिक्त पौधे बेचकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं. इससे फल की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बरकरार रहती है, रोग और कीट प्रतिरोधक पौधे आसानी से तैयार किए जा सकते हैं. बाजार में जैविक और अच्छे फल देने वाले पौधों की हमेशा मांग रहती है.
कौन-कौन से पौधों में होती है ग्राफ्टिंग
ग्राफ्टिंग के लिए आम, अमरूद, नींबू, चीकू, अंगूर, जामुन और कई अन्य फलदार पौधों में ग्राफ्टिंग से आसानी से नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं.
क्या बोले एक्सपर्ट किसान
कृषि एक्सपर्ट एसपी सिंह बताते हैं कि ग्राफ्टिंग से तैयार पौधे जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं. इससे किसानों को कम समय में ज्यादा लाभ मिलता है. कन्नौज के किसान यदि इस तकनीक को अपनाएं तो वे अपने खेतों और बगीचों से कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

