Last Updated:
IIT Kanpur News: IIT कानपुर का ‘साथी प्रोजेक्ट’ देशभर के छात्रों के लिए वरदान बन रहा है. मुफ्त कोचिंग, ऑनलाइन पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की स्मार्ट तैयारी के साथ यह पहल अब गांव-कस्बों तक पहुंच रही है. जानें क…और पढ़ें
कैसे होगा छात्रों को फायदा?
IIT कानपुर के प्रोफेसर अमय करकरे के अनुसार, एक साथी केंद्र पर एक समय में 40 छात्र बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं. यहां ऑडियो-वीडियो माध्यम से शिक्षण कराया जाता है, जिससे विषयों को समझना आसान हो जाता है. विशेषज्ञ नियमित रूप से मॉक टेस्ट भी कराते हैं, ताकि छात्रों को अपनी तैयारियों की जांच का मौका मिल सके. अभी तक:
– उत्तराखंड में दो
– उत्तर प्रदेश, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में एक-एक साथी केंद्र खोले जा चुके हैं.
– आने वाले महीनों में कई और राज्यों में विस्तार की योजना है.
साथी प्रोजेक्ट सिर्फ केंद्रों तक सीमित नहीं है. देशभर के 16 लाख से अधिक छात्र पहले से ही ‘साथी पोर्टल’ और मोबाइल ऐप के ज़रिए पढ़ाई कर रहे हैं. यह प्लेटफ़ॉर्म विशेष रूप से NEET, JEE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए डिज़ाइन किया गया है. यहां विषय-विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई स्टडी मटीरियल उपलब्ध है. जिन छात्रों के पास केंद्र तक पहुंच नहीं है, वे मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे पढ़ सकते हैं.
ग्रामीण छात्रों के लिए वरदान
यह प्रोजेक्ट उन छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद है जो गांव या छोटे कस्बों में रहते हैं, जहां न तो अच्छे कोचिंग सेंटर हैं और न ही तकनीकी संसाधन. अब ऐसे छात्र साथी केंद्रों पर जाकर बिल्कुल मुफ्त में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे. देशभर के IIT विशेषज्ञ लगातार नई सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिससे गुणवत्ता से कोई समझौता न हो.
IIT कानपुर की योजना है कि यह प्रोजेक्ट सीधे स्कूलों तक पहुंचाया जाए. इसके लिए राज्य सरकारों से बातचीत चल रही है. बता दें, पंजाब और दमन-दीव में इसकी शुरुआत हो चुकी है. वहां स्कूलों के शिक्षक, छात्रों के मेंटर बनकर IIT के विशेषज्ञों से जुड़ रहे हैं. यानि अब स्कूली शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी समय रहते मिल सकेगी.
आने वाले भविष्य की तैयारी
IIT कानपुर का मानना है कि यह प्रोजेक्ट लाखों छात्रों का भविष्य बदल देगा. जिन छात्रों के लिए कोचिंग की भारी फीस एक सपना था, वे अब बिल्कुल मुफ्त और उच्च गुणवत्ता की पढ़ाई कर सकेंगे. ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों के छात्रों को समान अवसर देने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी कदम है.

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें

