देवरिया- उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित लाहिलपार गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है. यहां स्थित मां भगवती का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. माना जाता है कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना एक दिव्य संकेत के बाद हुई थी.
स्थानीय कथाओं के अनुसार, एक किसान को स्वप्न में मां भगवती के दर्शन हुए और उन्होंने इस स्थान पर मां की प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया. जब गांव के लोगों ने खुदाई की, तो यहां मां भगवती की स्वयंभू मूर्ति प्राप्त हुई. तभी से यह स्थान देवी की उपासना का प्रमुख केंद्र बन गया.
मां भगवती के चमत्कार
कहा जाता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मां भगवती की आराधना करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कई श्रद्धालुओं ने यहां आकर अपनी समस्याओं से मुक्ति पाने के चमत्कारिक अनुभव साझा किए हैं. भक्तों का मानना है कि मां की कृपा से रोगों से मुक्ति, संतान सुख, व्यवसाय में सफलता और जीवन में शांति प्राप्त होती है.
नवरात्रि का भव्य आयोजन
हर साल नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में भव्य आयोजन होता है. दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए यहां आते हैं. पूरे नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाता है. भक्तगण दीप प्रज्वलित कर मां से अपने सुखद भविष्य की कामना करते हैं.
मंदिर परिसर और वातावरण
मंदिर के चारों ओर हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता इसकी आध्यात्मिकता को और भी बढ़ा देती है. यहां आते ही मन को एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. मंदिर के पास ही एक छोटा सा सरोवर भी है, जिसे पवित्र माना जाता है.
श्रद्धालुओं के विचार
देवरिया के ही राजेश तिवारी, जो हर वर्ष नवरात्रि में यहां दर्शन करने आते हैं, कहते हैं कि “यह स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि मां भगवती की कृपा का जीवंत प्रमाण है. यहां आकर असीम शांति मिलती है और हर समस्या का समाधान होता है.”
वहीं, लाहिलपार के ही सूरज यादव बताते हैं “हमारे गांव में मां भगवती का यह मंदिर एक अनमोल धरोहर है. बचपन से ही हम यहां आते रहे हैं और माँ की कृपा हमेशा बनी रहती है.”
हर भक्त के लिए आस्था का केंद्र
लाहिलपार का मां भगवती मंदिर केवल देवरिया ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल में श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आकर हर भक्त मां के चरणों में अपनी अर्जी लगाता है और सच्चे मन से मां को स्मरण करने वाला व्यक्ति कभी खाली नहीं लौटता.