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Rajasthan Sports Infrastructure: राजस्थान के बीकानेर में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलने जा रही है. शहर के ऐतिहासिक सादुल क्लब परिसर में करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक शूटिंग रेंज तैयार की जा रही है. इस रेंज में इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी से मंगवाई गई 17 अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं. इनमें 15 मशीनें ट्रैप और दो स्कीट शूटिंग के लिए हैं. मशीनों की स्थापना के लिए इंग्लैंड से दो इंजीनियर बीकानेर पहुंचे हैं. शूटिंग रेंज में खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर की तकनीकी सुविधाएं और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना है. क्लब प्रबंधन का लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय निशानेबाजों को तैयार करना है. प्रशिक्षण शुरू करने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी रेंज का निरीक्षण करेंगे. इसके बाद आवश्यक प्रमाणन और प्रशासनिक अनुमति मिलने पर खिलाड़ियों के लिए अभ्यास शुरू किया जाएगा.
बीकानेर. राजस्थान में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत करने की कवायद जारी है. इसी कड़ी में निशानेबाजी के क्षेत्र में बीकानेर एक बार फिर अपनी पहचान मजबूत करने की तैयारी में है. शहर के सादुल क्लब परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज स्थापित की जा रही है. करीब 7 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से स्थानीय निशानेबाजों को विश्वस्तरीय तकनीक, आधुनिक मशीनों और बेहतर प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी. क्लब का उद्देश्य बीकानेर के खिलाड़ियों को ओलंपिक स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है.
सादुल क्लब के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि शूटिंग रेंज में ओलंपिक स्तर की मशीनें लगाई जा रही हैं. यहां अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुरूप तकनीकी सुविधाएं और अभ्यास का माहौल उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. क्लब का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 में लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए निशानेबाजों को बेहतर प्रशिक्षण मिल सके.
इंग्लैंड से मंगवाईं 17 अत्याधुनिक मशीनें
महाराजा करणी सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी
अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि बीकानेर का निशानेबाजी से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है. महाराजा करणी सिंह और उनकी पुत्री राज्यश्री कुमारी ने इस खेल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की थीं. निशानेबाजी में योगदान के लिए डॉ. करणी सिंह को 1961 और राज्यश्री कुमारी को 1969 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और अपूर्वी चंदेला ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय निशानेबाजी को पहचान दिलाई. अब क्लब का प्रयास है कि नई पीढ़ी के खिलाड़ी भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएं और देश के लिए पदक जीतें. राठौड़ ने बताया कि खिलाड़ियों को तकनीकी सुविधाओं की कमी नहीं आने दी जाएगी. प्रशिक्षण के लिए देश के अनुभवी कोच नियुक्त किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच की सेवाएं भी ली जाएंगी. अभ्यास के लिए क्लब की ओर से कुछ बंदूकें भी उपलब्ध करवाई जाएंगी.
300 से 400 बच्चे करते हैं अभ्यास
शूटिंग रेंज में प्रशिक्षण शुरू करने से पहले नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी इसका निरीक्षण करेंगे. तकनीकी मानकों की जांच के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा. इसके आधार पर जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है. सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि सादुल क्लब में बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकलबॉल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स और तैराकी सहित विभिन्न खेलों की सुविधाएं उपलब्ध हैं. यहां औसतन 300 से 400 बच्चे अभ्यास करते हैं. क्लब के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं. युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने कहा कि विदेशों में शूटिंग के लिए बेहतर तकनीकी सुविधाएं और अधिक रेंज उपलब्ध हैं. अब बीकानेर में आधुनिक शूटिंग रेंज बनने से स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास के ज्यादा अवसर मिलेंगे.
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दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

