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Bismil Sugarcane Variety: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में विकसित गन्ने की किस्म ने पूरे देश में अपनी पहचान बना ली है. अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखी गई गन्ने की अगेती किस्म ‘बिस्मिल’ को नॉर्थ-वेस्ट जोन के लिए राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिला है. अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में तैयार होने वाली नई अगेती किस्मों की तुलना इसी गन्ने से की जाएगी. इससे पहले पंजाब की ‘को.जे 64’ किस्म राष्ट्रीय मानक थी, लेकिन अब शाहजहांपुर की बिस्मिल ने उसकी जगह ले ली है. महाराष्ट्र के राहुरी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह फैसला लिया गया.
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. परिषद की ओर से विकसित गन्ने की अगेती किस्म ‘को.शा 17231’ यानी ‘बिस्मिल’ को नॉर्थ-वेस्ट जोन के लिए राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिला है. अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान में तैयार होने वाली नई अगेती किस्मों की तुलना बिस्मिल से की जाएगी. अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखी गई इस किस्म ने पंजाब की पुरानी किस्म को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है.
गन्ना शोध परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी (प्रजनन) डॉ. अरविंद कुमार ने इसे संस्थान की बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा कि नई किस्मों को मंजूरी देने की प्रक्रिया में अब बिस्मिल के प्रदर्शन को मुख्य पैमाना माना जाएगा. महाराष्ट्र के राहुरी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में यह फैसला लिया गया. इससे पहले नॉर्थ-वेस्ट जोन में पंजाब की ‘को.जे 64’ किस्म को राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिला हुआ था. अब उसकी जगह शाहजहांपुर में विकसित बिस्मिल ने ले ली है.
नई अगेती किस्मों की तुलना अब बिस्मिल से होगी
अखिल भारतीय समन्वित गन्ना शोध परियोजना के तहत अगेती गन्ने की किस्मों की जांच के लिए बिस्मिल को नया राष्ट्रीय मानक बनाया गया है. अब इस जोन में तैयार होने वाली नई अगेती किस्मों के प्रदर्शन को बिस्मिल के मुकाबले परखा जाएगा. इससे गन्ने की नई किस्मों की गुणवत्ता और पैदावार का आकलन करने में मदद मिलेगी.
इन पांच राज्यों में लागू होगा नया मानक
नॉर्थ-वेस्ट जोन में उत्तर प्रदेश का पश्चिमी और मध्य भाग, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और राजस्थान शामिल हैं. इन राज्यों में गन्ने की नई अगेती किस्म तैयार होने पर उसकी तुलना बिस्मिल से की जाएगी. नई किस्म का प्रदर्शन बिस्मिल से बेहतर होने पर ही उसे आगे खेती के लिए मंजूरी देने की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा. इस तरह बिस्मिल इस पूरे जोन में गन्ने की नई अगेती किस्मों के मूल्यांकन का मुख्य आधार बनेगी.
पंजाब की पुरानी किस्म की जगह बिस्मिल को मिला दर्जा
इससे पहले पंजाब की ‘को.जे 64’ किस्म लंबे समय से नॉर्थ-वेस्ट जोन में राष्ट्रीय मानक बनी हुई थी. दूसरी नई किस्मों के प्रदर्शन की जांच इसी के आधार पर की जाती थी. लेकिन महाराष्ट्र के राहुरी में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने शाहजहांपुर की ‘को.शा 17231’ यानी बिस्मिल को नया मानक बनाने का फैसला लिया. इसके साथ ही पंजाब की पुरानी किस्म की जगह अब बिस्मिल को यह दर्जा मिल गया है.
अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के नाम पर रखा गया नाम
गन्ना शोध परिषद ने इस अगेती किस्म का नाम अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में रखा था. अब इसे राष्ट्रीय मानक का दर्जा मिलने से शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद की पहचान और मजबूत हुई है. यह उपलब्धि संस्थान के वैज्ञानिकों के लिए बड़ी सफलता है. इससे आने वाले समय में किसानों के लिए बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार देने वाली गन्ने की किस्में विकसित करने के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

