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UP Expressway: उत्तर प्रदेश में करीब 29,000 करोड़ रुपये की लागत से चार लिंक एक्सप्रेसवे विकसित किए जाने हैं. यूपीडा ने इन परियोजनाओं के निर्माण की गुणवत्ता, प्रगति और मानकों के पालन की निगरानी के लिए स्वतंत्र इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की है. इनमें आगरा-लखनऊ–पूर्वांचल लिंक, फर्रुखाबाद लिंक, जेवर लिंक और झांसी लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. इन परियोजनाओं से जेवर एयरपोर्ट, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. इंजीनियरों की तकनीकी योग्यता का मूल्यांकन 30 अक्टूबर से शुरू होना प्रस्तावित है.
लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण क्वालिटी पर इंजीनियरों की अलग यूनिट रखेगी नजर (AI की मदद से तस्वीर बनी है)
UP Expressway News: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी तेज हो गई है. प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए करीब 29,000 करोड़ रुपये की लागत से चार लिंक एक्सप्रेसवे विकसित किए जाने हैं. इन परियोजनाओं के निर्माण की गुणवत्ता, काम की रफ्तार और तय मानकों के पालन पर नजर रखने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) स्वतंत्र इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है. इनकी तैनाती निर्माण स्थलों पर की जाएगी, ताकि परियोजनाओं की प्रगति का आकलन केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी निरीक्षण के जरिए भी किया जा सके.
यूपीडा ने चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए निजी निर्माण कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की हैं. अब इन परियोजनाओं की निगरानी के लिए स्वतंत्र इंजीनियरों और सलाहकारों को शॉर्टलिस्ट करने की प्रक्रिया चल रही है. अधिकारियों के मुताबिक, स्वतंत्र इंजीनियरों की तकनीकी योग्यताओं और अनुभव का मूल्यांकन 30 अक्टूबर से शुरू होना प्रस्तावित है. चयनित विशेषज्ञ निर्माण कार्य की गुणवत्ता, प्रगति, निर्धारित मानकों के अनुपालन और परियोजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेंगे.
इन चार परियोजनाओं में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला लिंक, बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे शामिल हैं. इनका विकास अगले दो से तीन वर्षों में किए जाने की योजना है.
गुणवत्ता से लेकर निर्माण की रफ्तार तक होगी निगरानी
लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण केवल दो सड़कों को जोड़ने तक सीमित नहीं है. इनका उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में यात्रा को आसान बनाना और मौजूदा एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क तैयार करना है. इससे यात्रियों को भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है.
स्वतंत्र इंजीनियर निर्माण स्थलों पर तकनीकी निरीक्षण करेंगे. उनकी जिम्मेदारी में निर्माण की गुणवत्ता जांचना, काम की निर्धारित समयसीमा पर नजर रखना और परियोजना से जुड़े मानकों के पालन का आकलन करना शामिल होगा. इससे निर्माण के दौरान सामने आने वाली तकनीकी कमियों की पहचान करने और समय रहते सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, किसी गलती पर कार्रवाई की प्रक्रिया संबंधित अनुबंध और लागू नियमों के तहत तय होगी.
- आगरा-लखनऊ–पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे
इस लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 50 किलोमीटर प्रस्तावित है. इसकी अनुमानित लागत 4,775.84 करोड़ रुपये बताई गई है. इसका उद्देश्य आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल की ओर जाने वाले यात्रियों को बेहतर मार्ग मिल सकता है. लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर जैसे क्षेत्रों की ओर आवागमन करने वालों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है. यह लिंक प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. - फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 90.8 किलोमीटर और अनुमानित लागत 7,488.74 करोड़ रुपये है. यह गंगा एक्सप्रेसवे को इटावा जिले के कुदरैल के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा.इस परियोजना से हरदोई, कन्नौज और इटावा सहित आसपास के जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. मैनपुरी, शाहजहांपुर और औरैया के यात्रियों को भी इसका फायदा मिल सकता है. यह मार्ग गंगा और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे नेटवर्क की ओर यातायात को बेहतर तरीके से जोड़ने में मदद कर सकता है. - जेवर लिंक एक्सप्रेसवे
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 74.5 किलोमीटर प्रस्तावित है. इस परियोजना पर अनुमानित 8,585.51 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसका प्रमुख उद्देश्य जेवर में विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क उपलब्ध कराना है.इससे एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों, माल परिवहन कंपनियों, निर्यातकों और औद्योगिक इकाइयों को लाभ मिलने की संभावना है. बेहतर सड़क संपर्क से माल की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स सेवाओं को भी गति मिल सकती है. परियोजना के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सड़क नेटवर्क के अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकेंगे. - झांसी लिंक एक्सप्रेसवे
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे करीब 106.3 किलोमीटर लंबा होगा. इसकी अनुमानित लागत 7,968.30 करोड़ रुपये रखी गई है. इसका मकसद झांसी और बुंदेलखंड क्षेत्र को प्रदेश के विस्तारित एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ना है.
इससे बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के क्षेत्र और उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है. बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और माल परिवहन को प्रोत्साहन मिल सकता है. बुंदेलखंड के लिए यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिहाज से अहम मानी जा रही है.
लिंक एक्सप्रेसवे के निर्णाण में कोई कमी न हो इसके लिए इंडिपेंडेट कुशल इंजीनियरों की फौज उतारी जा रही है.
इंजीनियरों की फौज रखेगी हर गतिविधि पर पैनी नजर
इन सभी परियोजनाओं में पारदर्शिता, तय समय-सीमा और उच्चकोटि की निर्माण गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यूपीडा ने निजी निर्माण कंपनियों के साथ-साथ स्वतंत्र कंसलटेंट और इंजीनियरों को मैदान में उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. आगामी 30 अक्टूबर से क्रेडेंशियल्स की जांच के लिए तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) शुरू किया जाएगा.
ये स्वतंत्र इंजीनियर निर्माण स्थलों पर कैंप करेंगे और प्रोजेक्ट पर बारीकी से नजर रखेंगे. सामग्री की गुणवत्ता से लेकर तय नियमों के पालन तक, हर गतिविधि की रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंपी जाएगी. यूपीडा प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्माण कार्य में थोड़ी सी भी कोताही या तकनीकी चूक मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

