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लाजवाब कॉमिक टाइमिंग से दशकों तक दर्शकों को हंसाने वाले एक्टर देवेन वर्मा की आज बर्थ एनिवर्सरी है. उन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के इंडस्ट्री में कदम रखा और पांच दशक लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए. कॉलेज में एक छोटे से नाटक में काम करन के दौरान देवेन वर्मा को पहली फिल्म मिल गई थी जिसके लिए उनकी सैलरी 600 रुपये तय हुई थी. लेकिन आगे चलकर उन्होंने अपनी बेमिसाल कॉमेडी से सिनेमा जगत में एक अमर पहचान बनाई.
देवेन वर्मा ने 5 दशकों तक फिल्मों में बिखेरा हुनर का जलवा. (फोटो साभार: IMDb)
नई दिल्ली. बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और सहज एक्टिंग से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले देवेन वर्मा का फिल्मी सफर बेहद दिलचस्प रहा. बिना किसी गॉडफादर या फिल्मी बैकग्राउंड उन्होंने लगभग पांच दशकों तक रुपहले पर्दे पर राज किया. खास बात है कि कॉलेज के दिनों में थिएटर और यूथ फेस्टिवल्स में उनके हुनर ने बीआर चोपड़ा पहचाना और इस तरह देवेन को पहली मूवी में काम करने का मौका मिला. उनकी पहली सैलरी मात्र 600 रुपये थी. आज देवेन वर्मा की बर्थ एनिवर्सरी है और इस मौके पर हम आपको उनकी फिल्म जर्नी के बारे में बताते हैं.
बीआर चोपड़ा ने दी करियर की पहली फिल्म
देवेन ने 2013 में एक इंटरव्यू में बताया था कि वह स्टेज शो किया करते थे. एक दिन नॉर्थ इंडिया पंजाबी एसोसिएशन के कार्यक्रम में वह एक नाटक पेश कर रहे थे. वहां बीआर चोपड़ा भी मौजूद थे. उनकी परफॉर्मेंस देखकर बीआर चोपड़ा ने उन्हें अपनी फिल्म ‘धर्मपुत्र’ में काम करने का मौका दिया.
देवे वर्मा ने ‘धर्मपुत्र’ से फिल्मी दुनिया में रखा कदम
साल 1961 में रिलीज हुई ‘धर्मपुत्र’ से देवेन ने फिल्मों में कदम रखा. हालांकि, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही. इसके बाद वह कुछ समय के लिए विदेश में स्टेज शो करने चले गए. बाद में उन्हें एवीएम स्टूडियो के साथ काम करने का मौका मिला. उन्होंने करीब तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया और एक्टिंग की ट्रेनिंग भी ली. साल 1963 में आई फिल्म ‘गुमराह’ में उन्होंने अशोक कुमार के नौकर का किरदार निभाया. यह एक कॉमिक रोल था और दर्शकों ने उनके काम को पसंद किया. इसके बाद वह ‘आज और कल’, ‘अनुपमा’ और ‘कहीं और चल’ जैसी फिल्मों में भी नजर आए.
‘चोरी मेरा काम’ बनी करियर की टर्निंग पॉइंट
देवेन को पहचान मिलने में कुछ साल लगे, लेकिन उन्होंने अपने काम से फिल्म इंडस्ट्री में जगह बना ली. साल 1975 में आई फिल्म ‘चोरी मेरा काम’ उनके करियर की अहम फिल्म साबित हुई. इसमें उनके कॉमिक अंदाज को पसंद किया गया और उन्हें इस फिल्म के लिए 1976 में फिल्मफेयर का बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला. इसके बाद ‘चोर के घर चोर’ के लिए 1979 और ‘अंगूर’ के लिए 1983 में उन्हें इसी कैटेगरी में फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इस तरह वह तीन बार यह सम्मान जीतने में सफल रहे.
साल 2014 में पुण देवेन वर्मा का हुआ था निधन
देवेन वर्मा ने ‘गोलमाल’, ‘खट्टा मीठा’, ‘बुद्धा मिल गया’, ‘रंग बिरंगी’, ‘नास्तिक’ और ‘अंदाज अपना अपना’ जैसी फिल्मों में भी काम किया. फिल्म ‘अंगूर’ में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है. वह सिर्फ अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर भी काम कर चुके थे. साल 1969 में आई फिल्म ‘यकीन’ के साथ उन्होंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने ‘बेशर्म’ जैसी फिल्म का निर्देशन भी किया. देवेन वर्मा का 2 दिसंबर 2014 को पुणे में निधन हो गया था.
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कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
