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Wheat Varieties for Low Water: धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई करने वाले किसानों के लिए कम पानी में तैयार होने वाली किस्में फायदेमंद साबित हो सकती हैं. आमतौर पर गेहूं की फसल तैयार करने में करीब 6 बार सिंचाई करनी पड़ती है, जिससे किसानों की लागत बढ़ जाती है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. ओपी सिंह ने सुजाता, C-306, करण मंजरी और पूसा सोखती जैसी किस्मों की जानकारी दी है, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है. इनमें पूसा सोखती करीब 112 दिन में पकने वाली अगेती किस्म है. किसानों को इन किस्मों के बीज कृषि विज्ञान केंद्र और किसान कल्याण केंद्र सहित संबंधित केंद्रों पर 40 से 50 प्रतिशत अनुदान पर मिल सकते हैं.
Wheat Varieties for Low Water: सर्दियों के मौसम में धान की कटाई के बाद किसान अक्सर गेहूं की बुवाई करते हैं. धान की फसल कटते ही किसान अपने खेतों में जरूरी प्रबंधन करके बुवाई शुरू कर देते हैं. इस दौरान किसान अक्सर परेशान रहते हैं कि गेहूं की कौन सी ऐसी प्रजाति की खेती करें, जो कम पानी में तैयार हो सके, जिससे उन्हें नुकसान न हो और बेहतर पैदावार भी मिल सके. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ने गेहूं की कुछ ऐसी किस्मों के बारे में बताया है, जो कम पानी में आसानी से तैयार हो सकती हैं और किसानों को फायदा पहुंचा सकती हैं.
गेहूं की सामान्य किस्मों की खेती में किसानों को करीब 6 बार सिंचाई करने की जरूरत होती है. इससे कई बार किसानों को लागत के मुकाबले ज्यादा फायदा नहीं हो पाता. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ने गेहूं की कुछ ऐसी किस्मों के बारे में बताया है, जिन्हें उगाकर किसान कम सिंचाई में बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं और मुनाफा कमा सकते हैं.
यह हैं गेहूं की वे किस्में, जिनमें लगता है सबसे कम पानी
लोकल 18 से बातचीत में कृषि वैज्ञानिक डॉ. ओपी सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं की सामान्य किस्मों में कम से कम 6 बार सिंचाई करनी पड़ती है. हालांकि, फसल की दो अवस्थाएं सबसे जरूरी हैं, जिनमें सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पहली अवस्था CRI स्टेज है, जो बुवाई के 21 दिन बाद आती है. इस समय जड़ों का विकास होता है, इसलिए 21वें दिन पहली सिंचाई करना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि सुजाता और C-306 गेहूं की ऐसी दो किस्में हैं, जिनमें सबसे कम पानी लगता है. इनकी जड़ें गहरी होती हैं और पत्तियां संकरी होती हैं, इसलिए ये कम पानी में भी तैयार हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि इन किस्मों में कम सिंचाई की जरूरत होती है. पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद और दूसरी सिंचाई दाने बनने के समय करनी चाहिए.
मंजरी और पूसा भी है बेहतरीन विकल्प
इसके अलावा, करण मंजरी और पूसा सोखती भी गेहूं की किस्में हैं. इनमें से पूसा सोखती एक अगेती किस्म है, जो लगभग 112 दिन में पक जाती है. इसे विशेष रूप से कम पानी की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. किसान इन किस्मों की खेती करके कम पानी में फसल तैयार कर सकते हैं और मुनाफा कमा सकते हैं.
आसानी से मिल जाते हैं बीज, अनुदान भी उपलब्ध
किसानों को जिले के कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि रक्षा इकाई केंद्र और किसान कल्याण केंद्र पर बीज उपलब्ध हो जाते हैं. यहां किसानों को करीब 40 से 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज मिलते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलती है.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

