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Gulmehendi ki kheti : बलिया में रहने वाले नीरज पढ़ाई के साथ फूलों की खेती भी करते हैं. इन दिनों नीरज गुलमेहंदी की खेती कर रहे हैं. गुलमेहंदी को आमतौर पर अगस्त के महीने में लगाया जाता है. इसके दो से ढाई महीने के भीतर फूल खिलने लगते हैं. लोकल 18 से नीरज बताते हैं कि उन्होंने करीब पांच कट्ठा जमीन में इसकी खेती कर रखी है. रोज 20 से 25 किलो फूल आसानी से निकल जाते हैं. इन दिनों बाजार में इन फूलों का भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो है. दिवाली के समय इनकी कीमत बढ़कर 80 से 100 रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.
बलिया. यूपी के बलिया में खेती को एक नया आयाम देने वाले युवा किसान नीरज सैनी इन दिनों अपनी अनोखी पहल से फिर चर्चा में हैं. नई बस्ती उदयपुर शिवरामपुर के रहने वाले नीरज पढ़ाई के साथ फूलों की खेती भी करते हैं. उनकी यह मेहनत उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो पारंपरिक खेती से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं. नीरज ने अपने खेतों में गार्डेन बाल्सम के पौधे लगाए हैं. इसे आम बोलचाल में गुलमेहंदी के नाम से जाना जाता है. इसके पौधों को या तो खुद तैयार किया जाता है या कलकत्ता और बनारस से मंगवाया जाता है. पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल करनी पड़ती है. इसमें घास निकालना, निराई-गुड़ाई, खाद डालना, मिट्टी चढ़ाना और समय पर दवा का छिड़काव करना शामिल है.
नहीं खोजना पड़ता बाजार
लोकल 18 से नीरज बताते हैं कि गुलमेहंदी को आमतौर पर अगस्त के महीने में लगाया जाता है, जिसके बाद निरंतर देखभाल और कृषि प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं. पौधे लगाने के दो से ढाई महीने के भीतर ही फूल खिलने लगते हैं, जो बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. स्थानीय दुकानदार और व्यापारी खुद खेतों तक आते हैं और फूलों को खरीदकर ले जाते हैं. इससे किसानों को बाजार खोजने की समस्या नहीं होती है.
कम लागत, कम जमीन, लेकिन मुनाफा ज्यादा
नीरज ने चार से पांच कट्ठा जमीन में इन फूलों की खेती कर रखी है, जिससे प्रतिदिन 20 से 25 किलो फूल आसानी से निकल जाते हैं. इन दिनों बाजार में इन फूलों का भाव 60 से 70 रुपये प्रति किलो चल रहा है. त्योहारी सीजन खासतौर पर दीपावली के समय इनकी कीमत बढ़कर 80 से 100 रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और धान के मुकाबले फूलों की यह खेती अधिक फायदेमंद साबित हो रही है. नीरज का मानना है कि अगर दूसरे किसान भी इस दिशा में कदम बढ़ाएं तो वे कम लागत और कम जमीन में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

