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Varanasi News : मां दुर्गा की विदाई पर काशी में खेली गई सिंदूर की होली, क्यों करते हैं ऐसा? चौंक जाओगे

Admin by Admin
October 21, 2026
in उत्तर प्रदेश
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Varanasi News : मां दुर्गा की विदाई पर काशी में खेली गई सिंदूर की होली, क्यों करते हैं ऐसा? चौंक जाओगे


Last Updated:October 21, 2026, 15:28 IST

Varanasi ki local news : नवरात्रि खत्म हो चुकी है. मां दुर्गा की विदाई का समय दस्तक दे रहा है. वाराणसी में देवी की विदाई से पहले बंगाली समाज की महिलाओं ने जमकर सिंदूर की होली खेली. मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा अपने मायके आती हैं. उनकी विदाई के वक्त वे सारी रस्में निभाई जाती हैं, जो एक बेटी के विदाई के समय होती हैं. लोकल 18 से काशी की जयंती बताती हैं कि बंगाली समाज की महिलाएं देवी को न सिर्फ सिंदूर अर्पित करती हैं बल्कि उसी सिंदूर से अपने सखियों और परिचितों के साथ होली भी खेलती हैं.

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वाराणसी. धर्म नगरी काशी में तीन दिनों के दुर्गा पूजा उत्सव के बाद अब देवी के विदाई का समय भी आ गया. वाराणसी में देवी की विदाई से पहले बंगीय (बंगाली) समाज की महिलाओं ने मां दुर्गा के सामने जमकर सिंदूर की होली खेली. सिंदूर खेला की ये परंपरा अलग-अलग पंडालों में निभाई गई. इस दौरान खूब हर्षोल्लास के साथ भावुकता का दौर देखने को मिलेगा. बंगाल की तर्ज पर काशी में भी भव्य तरीके से दुर्गा पूजा उत्सव मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा अपने मायके आती हैं, फिर दशहरा पर उनकी विदाई के वक्त वे सारी रस्में निभाई जाती हैं, जो एक बेटी के विदाई के वक्त होती हैं. इसी के तहत बंगीय समाज की महिलाएं देवी को न सिर्फ सिंदूर अर्पित करती हैं बल्कि उसी सिंदूर से अपने सखियों और परिचितों के साथ होली भी खेलती हैं.

इन 4 चीजों का भोग

लोकल 18 से काशी की जयंती बताती हैं कि देवी के विदाई से पहले सूप में दीपक, फल, नेवज, काला तिल और दही-मिश्री का भोग लगाया जाता है. इसके बाद मां दुर्गा की आरती उतारी जाती है. इन सब के बाद महिलाएं एक-एक कर देवी को दही-मिश्री खिलाती हैं और उन्हें सिंदूर लगाती हैं. इसी सिंदूर से वे आपस में होली खेलकर खुशी-खुशी मां को विदाई देती हैं. महिलाएं देवी से अगले साल फिर खुशी-खुशी वापस आने की कामना भी करती हैं.

15 जगहों पर विसर्जन

भक्तों का ऐसा मानना है की जब देवी खुशी-खुशी अपने ससुराल लौटती हैं तो वे अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और आरोग्यता का वरदान भी देती हैं. यही वजह है कि देवी की विदाई के दौरान इन रस्मों को निभाया जाता है. सिंदूर खेला के इस रस्म के बाद देवी की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. वाराणसी में कुल 15 ऐसे स्थान बनाए गए हैं, जहां देवी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है. इसके लिए कई कुंड तालाब चिन्हित किए गए है. इसके अलावा कई अस्थायी कुंडों का निर्माण भी वाराणसी नगर निगम ने कराया है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

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Location :

Varanasi,Uttar Pradesh

First Published :

October 21, 2026, 15:28 IST



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