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Goat farming gonda : क्या आप भी बकरी पालन करना चाहते हैं. अच्छी कमाई के लिए सही नस्ल का चुनाव करना जरूरी है. बकरियों के खानपान, आवासीय प्रबंधन और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना होगा. नस्ल का चुनाव करते समय उसके पालन की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखें. लोकल 18 से गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी बताते हैं कि बकरियों को साफ पानी हमेशा उपलब्ध कराना चाहिए. गर्भवती बकरियों और छोटे बच्चों के खानपान पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. बकरियों को रखने के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए, जहां हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था हो.
गोंडा. खेती के साथ बकरी पालन किसानों की आमदनी बढ़ाने का अच्छा जरिया है. बकरी पालन कम जगह में भी शुरू किया जा सकता है. हालांकि, इससे अच्छी कमाई के लिए सही नस्ल का चुनाव करना जरूरी है. बकरियों के खानपान, आवासीय प्रबंधन और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए. लोकल 18 से गोंडा के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी बताते हैं कि गोंडा में गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ जाता है, जबकि सर्दियों में ठंड भी ठीक पड़ती है. ऐसे में बकरी पालन के लिए ऐसी नस्ल का चुनाव करना चाहिए, जो स्थानीय मौसम के अनुकूल हो और जिसकी देखभाल आसानी से की जा सके. स्थानीय नस्लों के साथ बरबरी और जमुनापारी बकरियां भी पाली जा सकती हैं. हालांकि, नस्ल का चुनाव करते समय उसके पालन की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखना चाहिए.
न बदलें अचानक चारा
डॉ. राकेश बताते हैं कि बकरियों को स्वस्थ रखने और उनकी अच्छी बढ़वार के लिए संतुलित आहार देना जरूरी है. उनके भोजन में हरा चारा, सूखा चारा और जरूरत के अनुसार दाना शामिल करना चाहिए. बकरियों को साफ पानी हमेशा उपलब्ध कराना चाहिए. गर्भवती बकरियों और छोटे बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए. भोजन में अचानक बदलाव करने से बचना चाहिए. बकरियों को रखने के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए, जहां हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था हो. बाड़े में पानी जमा नहीं होना चाहिए और फर्श सूखा और साफ रखना चाहिए. बरसात के मौसम में बकरियों को नमी से बचाना जरूरी है. गर्मी के दिनों में छायादार जगह की व्यवस्था करें, जबकि सर्दियों में ठंडी हवा से बचाव का इंतजाम करें. बाड़े की नियमित सफाई करने से बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिलती है.
डॉ. राकेश कहते हैं कि बकरी पालन में समय-समय पर पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है. बकरियों का टीकाकरण और पेट के कीड़ों से बचाव पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार कराना चाहिए. यदि किसी बकरी में खाना कम खाने, सुस्ती या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो उसे दूसरी बकरियों से अलग रखकर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. बकरी पालन शुरू करने से पहले बाजार में बकरियों और उनके बच्चों की मांग, चारे की उपलब्धता और देखभाल पर होने वाले खर्च का हिसाब लगा लें. सही नस्ल, संतुलित खानपान, बेहतर आवासीय प्रबंधन और समय पर इलाज से बकरियों को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
