संवाददाता@संदीप अग्रहरी…

म्योरपुर में श्रीरामलीला मंचन के दसवें दिन लक्ष्मण शक्ति, हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने और कुंभकरण वध की लीला का भव्य मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान जी के संजीवनी लेकर लौटने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं, कुंभकरण वध के मंचन पर जय श्रीराम के जयकारों से रामलीला परिसर गूंज उठा।

अंगद-रावण संवाद ने बांधा समां:
रामलीला की शुरुआत अंगद-रावण संवाद से हुई। प्रभु श्रीराम के दूत बनकर अंगद रावण के दरबार में पहुंचे और माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाकर श्रीराम से संधि करने का प्रस्ताव रखा। लेकिन अहंकार में चूर रावण ने अंगद की बात मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अंगद ने दरबार में अपना पैर जमा दिया और रावण के योद्धाओं को उसे हिलाने की चुनौती दी। रावण के कई वीर योद्धाओं ने पैर हटाने का प्रयास किया, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। अंत में रावण स्वयं आगे बढ़ा तो अंगद ने उसे समझाया कि यदि पैर ही पकड़ना है तो प्रभु श्रीराम के चरण पकड़कर अपनी भूल स्वीकार करे। इस संवाद का दर्शकों ने खूब आनंद लिया।
मेघनाद के शक्ति बाण से मूर्छित हुए लक्ष्मण:

इसके बाद युद्ध के प्रसंग में रावण ने अपने पुत्र को युद्ध के लिए भेजा, जहां वह श्रीराम की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ। इसके बाद मेघनाद युद्धभूमि में पहुंचा। मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसी दौरान मेघनाद ने शक्ति बाण का प्रहार किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। लक्ष्मण की यह दशा देखकर प्रभु श्रीराम व्याकुल हो उठे। रामलीला के इस भावुक दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
हनुमान जी संजीवनी लेकर पहुंचे, लक्ष्मण ने फिर संभाला मोर्चा:
विभीषण के सुझाव पर हनुमान जी लंका पहुंचे और सुषेण वैद्य को रामदल में लेकर आए। वैद्य ने लक्ष्मण के उपचार के लिए संजीवनी बूटी लाने की सलाह दी। इसके बाद हनुमान जी पर्वत पर पहुंचे और संजीवनी बूटी लेकर लौटे। बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण को होश आया तो उन्होंने फिर से युद्ध के लिए हुंकार भरी। इस प्रसंग के मंचन के दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारे लगाए।
कुंभकरण वध के साथ आगे बढ़ी रामलीला:

लक्ष्मण के दोबारा स्वस्थ होकर युद्ध के लिए तैयार होने की खबर से रावण हैरान रह गया। इसके बाद उसने अपने भाई कुंभकरण को युद्धभूमि में भेजा। कुंभकरण और प्रभु श्रीराम के बीच घमासान युद्ध हुआ, जिसमें अंततः कुंभकरण वीरगति को प्राप्त हुआ। इस प्रसंग के साथ रामलीला का मंचन आगे बढ़ा। कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।
कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य रहे मौजूद:
इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के महाप्रबंधक सुनील कुमार सिंह, अध्यक्ष मोनू जायसवाल, श्रीरामलीला मंडली अध्यक्ष शनि अग्रहरि, अजय कुमार, पंकज सिंह, अंकित अग्रहरि, मनदीप रौनियर, रामू, व्यास आशीष अग्रहरि (बिट्टू), सुजीत अग्रहरि, संदीप अग्रहरि, नमन प्रकाश अग्रहरि, रंजन अग्रहरि, नीरज अग्रहरि, अवनीश कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।