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Lucknow News: आकाश आनंद के बसपा में वापसी और मायावती का दोबारा साथ मिलने के बाद से अब राजनीतिक गलियारे में ये शंका बनी है कि आखिर मायावती ने ये फैसला क्यों लिया? क्या परिवार में सुलह हो गई या यह मायावती की मजबूरी है, क्योंकि युवा दलित वोट में चंद्रशेखर आजाद की बढ़त से BSP को नुकसान हो सकता है.
मायावती आकाश आनंद
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती की एक बार फिर आकाश आनंद पर मेहरबान हैं. इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. कई बार बाहर का रास्ता दिखाने के बाद उनको एक बार फिर से पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. आकाश का बार-बार अंदर-बाहर होना मायावती और उनके विश्वसनीय के अंदर चल रहे अंतरद्वंद माना जा सकता है. आकाश के तीसरी बार पार्टी में आने के पीछे आजाद समाज पार्टी चीफ चंद्रशेखर आजाद को भी कहा जा सकता है.
तमाम गतिरोधों को दूर करते हुए बसपा चीफ मायावती ने आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाते हुए बसपा की चुनावी जिम्मेदारियां सौंप दी हैं. सवाल है कि क्या परिवार में सुलह हो गई या यह मायावती की मजबूरी है, क्योंकि युवा दलित वोट में चंद्रशेखर आजाद की बढ़त से BSP को नुकसान हो सकता है. आकाश के जरिए मायावती युवा चेहरे और भतीजे की काट से चंद्रशेखर के असर को कम करने की कोशिश में हैं, लेकिन संगठन की जमीनी कमजोरी और आकाश का सीमित अनुभव कितना असर दिखाएगा.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सभी सियासी पार्टियों अपनी सियासी मोहरे बिछाना शुरू कर दिया है. इस बीच में उत्तर प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा घटनाक्रम बहुजन समाज पार्टी से जुड़ा हुआ रहा. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में आकाश आनंद जब भाषण दे रहे थे, उस भाषण में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ बहुत तल्ख रवैया अख्तियार किया था. उसके ठीक बाद बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आकाश आनंद को सियासत से एकदम किनारे कर दिया था.
दलितों के चहेते बन रहे चंद्रशेखर आजाद
2024 के लोकसभा चुनाव से लेकर अक्टूबर 2026 तक लुका छिपी का खेल चल रहा है. इस बीच चंद्रशेखर आजाद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से ना सिर्फ लोकसभा का प्रतिनिधित्व हासिल कर लिया, बल्कि मौजूदा समय में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित बिरादरी का नेता खुद को स्थापित कर दिया. इस पूरे मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी खुद को अलग करके देखते हैं और पार्टी प्रमुख कहती हैं कि यह उनका निजी मामला है.
इस बीच आकाश आनंद लगातार सियासी तौर से हाशिए पर रहे और वहीं दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद ने अपनी सियासी पारी को और ज्यादा बड़ा कर लिया. फिलहाल मायावती ने एक बार फिर से अपने भतीजे आकाश आनंद को न सिर्फ जिम्मेदारी दी है, बल्कि बुलंदशहर से 2027 विधानसभा चुनाव में आकाश आनंद को आगे करने का भी फैसला किया है.
आकाश आनंद के लिए बड़ी चुनौती
अब सभी के दिमाग में सवाल यही उठ रहा है कि सीमित राजनीतिक अनुभव के बीच में आखिर आकाश आनंद अपने सियासी मकसद को कैसे हासिल करेंगे. वहीं दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद लगातार फील्ड में बने हुए हैं और पार्टी के लिए काम करते हुए नजर आ रहे हैं. बेहद कम समय और लगातार उत्तर प्रदेश में बना रहना आकाश आनंद के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वह पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर भी हैं और दूसरे राज्यों में भी उनकी ड्यूटी लगाई जाएगी. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद और चंद्र शेखर आजाद के बीच में एक अनचाहा सियासी कंपटीशन रहेगा. वहीं दोनों के बीच में इस बात को लेकर के भी प्रतिस्पर्धा रहेगी कि आखिर दलित वोट बैंक पर कौन कितना ज्यादा हाथ मार पाएगा.

