मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..अशोक वाटिका से रावण दरबार तक सजीव हुआ रामकथा का रोमांच, विभीषण शरणागति और अंगद-रावण संवाद ने बांधा समां

श्री रामलीला समिति सोनभद्र नगर के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक रामलीला के दसवें दिन शनिवार को ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ, मानो त्रेतायुग की रामकथा एक बार फिर जीवंत हो उठी हो।

आदर्श श्री रामलीला मंडल पिपलेश्वर धाम, सिंगरौली के कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद और भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ दिया। अशोक वाटिका में माता सीता से हनुमान जी की भेंट से लेकर सोने की लंका के दहन तक मंच पर रोमांच, भक्ति और वीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

लीला का आरंभ माता सीता की खोज के प्रसंग से हुआ। महाराज सुग्रीव ने वानर सेना की चार टोलियां बनाकर उन्हें चारों दिशाओं में माता सीता की खोज के लिए रवाना किया। खोज करते-करते हनुमान जी की टोली समुद्र तट पर पहुंची।

सामने अथाह जलराशि और दूसरी ओर लंका, ऐसे में जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी भूली हुई शक्ति और अद्भुत पराक्रम का स्मरण कराया। आत्मविश्वास से ओतप्रोत हनुमान जी ने प्रभु श्रीराम का स्मरण किया और विशाल समुद्र को लांघकर लंका की ओर प्रस्थान किया। उनके इस पराक्रमी दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया।
लंका पहुंचने पर हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्रीराम के परम भक्त विभीषण से हुई। विभीषण के बताए मार्ग पर चलते हुए वे अशोक वाटिका पहुंचे, जहां माता सीता रावण की कैद में प्रभु श्रीराम की प्रतीक्षा कर रही थीं।

हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक प्रभु श्रीराम की अंगूठी माता सीता को सौंपी। श्रीराम की निशानी देखते ही माता सीता के मन में आशा का संचार हुआ। हनुमान जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि प्रभु श्रीराम शीघ्र ही लंका पहुंचकर रावण का अंत करेंगे और उन्हें मुक्त कराएंगे। इस भावुक प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

माता सीता से आज्ञा लेकर हनुमान जी अशोक वाटिका में फल खाने लगे। देखते ही देखते वाटिका के वृक्षों से फल तोड़ने और उन्हें इधर-उधर फेंकने का दृश्य शुरू हुआ। हनुमान जी की चंचलता, निर्भीकता और अनोखी अदाओं ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

पेड़ों से गिराए गए फलों को श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। इसके बाद अशोक वाटिका में उत्पात मचाते हनुमान जी को रोकने के लिए राक्षसों के पहुंचने और मेघनाद द्वारा उन्हें बंदी बनाए जाने का दृश्य मंचित हुआ।

मेघनाद हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के भव्य दरबार में ले पहुंचा। वहां रावण के अहंकार और हनुमान जी की निर्भीकता का प्रभावशाली दृश्य देखने को मिला। बंधन में होने के बावजूद हनुमान जी के चेहरे पर भय का कोई भाव नहीं था।

उन्होंने रावण को समझाया कि माता सीता को सम्मानपूर्वक प्रभु श्रीराम को लौटा दे और अपनी लंका को विनाश से बचा ले। लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उनकी बात अनसुनी कर दी और क्रोधित होकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दे दिया।

इसके बाद मंच पर लंका दहन का रोमांचक दृश्य सामने आया। हनुमान जी की पूंछ में आग लगते ही दृश्य ने नाटकीय मोड़ लिया। हनुमान जी ने अपनी फुर्ती और पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए लंका के विभिन्न हिस्सों में आग लगा दी।आयोजकों द्वारा विशेष रूप से तैयार कराई गई सोने की लंका को अग्नि के हवाले किए जाने का दृश्य देखते ही दर्शक रोमांचित हो उठे।

आग की लपटों के बीच लंका दहन का मंचन हुआ तो पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाकर हनुमान जी के पराक्रम का अभिनंदन किया। कलाकारों की सजीव प्रस्तुति ने इस प्रसंग को रामलीला की यादगार झलकियों में शामिल कर दिया।

लंका दहन के बाद विभीषण शरणागति का प्रसंग मंचित हुआ, जिसमें विभीषण द्वारा रावण की अधर्मपूर्ण नीतियों का विरोध कर प्रभु श्रीराम की शरण में जाने का दृश्य दिखाया गया। इसके पश्चात अंगद-रावण संवाद ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। प्रभु श्रीराम के दूत बनकर रावण के दरबार में पहुंचे अंगद ने माता सीता को लौटाने और युद्ध से बचने का संदेश दिया।

अंगद के ओजस्वी संवादों और रावण के अहंकारपूर्ण प्रत्युत्तर ने दरबार के दृश्य को प्रभावशाली बना दिया। कलाकारों के संवाद और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को कथा के घटनाक्रम से बांधे रखा।

दसवें दिन की लीला में मुख्य अतिथि के रूप में सोनभद्र नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती रूबी प्रसाद, मारवाड़ी युवा मंच सोन महिला शाखा की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सांवरिया तथा श्री रानी सती दादी भक्त महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अनीता थर्ड मातृशक्ति के रूप में उपस्थित रहीं। आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष पवन जैन, कोषाध्यक्ष राकेश गुप्ता, उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता, जितेंद्र सिंह, आनंद मिश्रा, डॉ. धर्मवीर तिवारी, प्रशांत जैन, राम प्रसाद यादव, संजय जायसवाल, अनवर अली, बलराम सोनी, विमल जैन, गोल्डी, चंदू केजरीवाल सहित समिति के अन्य सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
