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How to make handi ghee at home : घी एक ऐसी चीज है, जो हर घर में काम आती है, लेकिन लेकिन शुद्ध घी पाना आसान नहीं. मुरादाबाद के एक किसान ने इसी में अपना धंधा खोज लिया और हांडी में देसी घी तैयार करने मे जुट गया. उसका हांडी घी खूब पसंद किया जा रहा है. इनकम लाखों में पहुंच चुकी है. लोकल 18 से मुरादाबाद के किसान रूपचंद सिंह बताते हैं कि आजकल बाजार में मिलने वाला देसी घी मशीनों से तैयार होता है. उसमें वो न्यूट्रिशन वैल्यू नहीं है, जो हांडी के घी में होती है. हांडी घी का एक चम्मच मशीन से तैयार घी के चार चम्मच के बराबर है. सुगंध भी उससे ज्यादा होती है.
मुरादाबाद. घी एक ऐसी चीज है, जो पूजा से लेकर खाने तक में प्रयोग की जाती रही है. घी डालते ही खाने में अलग ही स्वाद और महक आने लगती है. घी की डिमांड हमेशा रहती है, लेकिन शुद्ध घी पाना आसान नहीं. इसी को देखते हुए मुरादाबाद के एक किसान ने धंधा खोज लिया. उसने हांडी में देसी घी तैयार करना शुरू कर दिया. हांडी के घी की अलग ही महक होती है. किसान का हांडी घी खूब पसंद किया जा रहा है. इनकम लाखों में पहुंच गई है. अगर आप भी देसी घी के नाम पर बाजार में बिक रहे मिलावटी और मशीन से बने घी से परेशान हो गए हैं तो मुरादाबाद के किसान रूपचंद सिंह से मिलिए. वे पुरानी पारंपरिक विधि हांडी से घी बनाकर शुद्धता का स्वाद चखा रहे हैं. रूपचंद बीते तीन साल से इसी विधि से देसी घी तैयार कर रहे हैं. उनका कहना है कि इस घी में पोषण की मात्रा बाजार के घी से कई गुना ज्यादा है.
क्या है पुरानी विधि
लोकल 18 से रूपचंद सिंह बताते हैं कि पहले दूध को हांडी में 12 घंटे तक गर्म होने के लिए रख दिया जाता है. इसके बाद दही जमाया जाता है. दही जमने के बाद उसे बिलोया जाता है. बिलोने से मक्खन निकलता है, जिसे गांव की भाषा में नैनी कहा जाता है. उस नैनी को गर्म करने के बाद देसी घी तैयार होता है. रूपचंद बताते हैं कि आजकल बाजार में मिलने वाला देसी घी मशीनों से तैयार होता है. उसमें वो न्यूट्रिशन वैल्यू नहीं है, जो हांडी के घी में होती है. हांडी घी का एक चम्मच मशीन से तैयार घी के चार चम्मच के बराबर है. इसमें सुगंध भी उससे ज्यादा होती है.
क्या है आगे का प्लान
किसान रूपचंद सिंह कहते हैं कि वे पिछले 3 साल से शुद्ध घी बना रहे हैं. फिलहाल अकेले ही ये काम करते हैं. एक-दो लोग और भी इस काम में जुट गए हैं. आने वाले समय में उनका भी घी इसी विधि से तैयार होकर आएगा. रूपचंद के घी का रिटेल रेट 1600 रुपये प्रति किलो है. अभी वे ब्लॉक स्तर पर काम कर रहे हैं. ब्लॉक स्तर पर ही उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. वह अब तक लाखों रुपये का घी बेच चुके हैं. रूपचंद कहते हैं कि जैसे-जैसे मांग बढ़ती रहेगी, वैसे-वैसे इस काम को बढ़ाते रहेंगे.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
