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Sultanpur News: किसान अगर आलू की खेती करने की तैयारी में हैं, तो इससे पहले एक जुगाड़ जान लें, ताकि आपकी डबल कमाई हो सके. आपके लिए यह खास तरीका फायदेमंद साबित हो सकता है.
सुल्तानपुर: अगर आप किसान हैं और आलू की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए एक खास तरीका फायदेमंद साबित हो सकता है. आलू की बुवाई के समय खेत में खाली जगह का सही इस्तेमाल करके आप एक अतिरिक्त फसल भी उगा सकते हैं. इससे कम जमीन में दो फसलों से कमाई का मौका मिल सकता है. खास बात यह है कि इस फसल की तैयारी आलू की फसल से पहले हो जाती है, जिससे किसान समय रहते इसकी उपज बाजार में बेच सकते हैं. आइए जानते हैं कि आलू के बरहे में कौन-सी फसल बोना फायदेमंद हो सकता है और इसकी खेती कैसे करें.
गाजर और मूली की खेती से मिल सकता है फायदा
आलू के साथ गाजर और मूली की खेती करना किसानों के लिए एक विकल्प हो सकता है. सुल्तानपुर कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉ. सी.के. त्रिपाठी ने लोकल 18 से बताया कि ये दोनों जड़ वाली सब्जियां हैं और इनकी कुछ किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं. किसान स्थानीय मौसम और मिट्टी के अनुसार उपयुक्त किस्म का चुनाव कर सकते हैं.
मूली की फसल कई किस्मों में लगभग 25 से 50 दिनों में तैयार हो सकती है, जबकि गाजर को तैयार होने में आमतौर पर इससे अधिक समय लगता है. इसलिए फसल का चयन करते समय आलू की बुवाई और खुदाई के समय का ध्यान रखना चाहिए. साथ ही ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दोनों फसलों की बढ़वार प्रभावित न हो.
हरी धनिया और सौंफ भी हैं विकल्प
आलू के बरहे में हरी धनिया की बुवाई भी की जा सकती है. हरी धनिया कम समय में तैयार होने वाली फसल है और इसकी पत्तियों की बाजार में मांग बनी रहती है. किसान स्थानीय बाजार की जरूरत के हिसाब से इसकी बुवाई कर सकते हैं. इसके अलावा सौंफ भी एक विकल्प है, लेकिन इसकी फसल अवधि और बढ़वार को ध्यान में रखकर ही इसे लगाना चाहिए. सौंफ को आलू के साथ उगाने से पहले खेत में पर्याप्त जगह और दोनों फसलों की पोषण संबंधी जरूरतों का आकलन करना जरूरी है.
बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
आलू के बरहे में दूसरी फसल उगाने से पहले किसान यह जरूर देखें कि दोनों फसलों को पर्याप्त धूप, पानी और पोषक तत्व मिल सकें. जरूरत से ज्यादा घनी बुवाई करने पर पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है. सिंचाई करते समय भी ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि आलू की फसल में जलभराव नुकसान पहुंचा सकता है. खाद और उर्वरक का इस्तेमाल मिट्टी की जरूरत के अनुसार करें. सबसे जरूरी बात यह है कि इस पारंपरिक तरीके से अतिरिक्त कमाई की संभावना जरूर बन सकती है, लेकिन उत्पादन और मुनाफा मौसम, बाजार भाव और खेती के प्रबंधन पर निर्भर करेगा. किसान अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही फसल का चयन करें.
