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Laser level machine benefits : क्या आप भी अपने खेत समतल न होने से परेशान रहते हैं. अब ऐसा नहीं होगा. आप ट्रैक्टर से चलने वाली लेजर लेवलर मशीन की मदद से खेत को कम समय में समतल कर सकते हैं. इससे सिंचाई के दौरान पानी के सही इस्तेमाल और फसलों की बुआई में भी मदद मिलेगी. इस मशीन की मदद से खेत के अलग-अलग हिस्सों का स्तर एक जैसा करने में आसानी होती है. किसान को बार-बार अंदाज लगाकर जमीन समतल करने की जरूरत नहीं पड़ती. लेजर लेवलर मशीन की कीमत ढाई से तीन लाख रुपये के बीच है. इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जा रही है.
कानपुर. खेत की जमीन कहीं ऊंची तो कहीं नीची होने से परेशान किसानों के लिए आधुनिक तकनीक राहत लेकर आई है. अब ट्रैक्टर से चलने वाली लेजर लेवलर मशीन की मदद से खेत को कम समय में समतल किया जा सकता है. इससे न केवल जमीन को बराबर करने में लगने वाली मेहनत कम होगी, बल्कि सिंचाई के दौरान पानी के सही इस्तेमाल और फसलों की बुआई में भी मदद मिलेगी. कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में 15 अक्टूबर से शुरू हुए तीन दिवसीय किसान मेले में हापुड़ से आई इस मशीन को देखने और इसकी तकनीक समझने के लिए किसान पहुंच रहे हैं. किसानों को बताया जा रहा है कि आधुनिक खेती में जमीन का समतल होना किस तरह उत्पादन की प्रक्रिया को आसान बना सकता है.
कैसे करती है काम
किसान मेले में मशीन की जानकारी देने पहुंचे हापुड़ के हर्ष ने बताया कि ट्रैक्टर आधारित लेजर लेवलर की मदद से खेत की जमीन को समतल किया जा सकता है. इसके लिए मशीन के साथ ट्रांसमीटर और रिसीवर का इस्तेमाल होता है. खेत में एक निश्चित स्थान पर ट्रांसमीटर लगाया जाता है, जो लेजर सिग्नल भेजता है. मशीन पर लगा रिसीवर इन सिग्नल को पकड़कर जमीन के स्तर की जानकारी देता है. इसके आधार पर लेवलर मशीन मिट्टी को काटकर या दूसरी जगह पहुंचाकर खेत की सतह को बराबर करने में मदद करती है. इस तकनीक से किसान को बार-बार अंदाज लगाकर जमीन समतल करने की जरूरत नहीं पड़ती. मशीन की मदद से खेत के अलग-अलग हिस्सों का स्तर एक जैसा करने में आसानी होती है. हालांकि, खेत का आकार, जमीन की स्थिति और काम की मात्रा के हिसाब से इसे समतल करने में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है.
कितने साल चलेगी
हर्ष के मुताबिक, लेजर लेवलर मशीन की कीमत करीब ढाई से तीन लाख रुपये के बीच है. इस पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी भी मिलती है. पात्र किसानों को अनुदान मिलने पर मशीन खरीदने का खर्च काफी कम हो सकता है. हालांकि, वास्तविक सब्सिडी राशि मशीन की कीमत, स्वीकृत योजना और किसान की पात्रता पर निर्भर करेगी. मशीन की सामान्य उपयोग अवधि करीब पांच से दस साल तक हो सकती है. इसमें इस्तेमाल होने वाले ट्रांसमीटर और रिसीवर जैसे उपकरणों की समय-समय पर जांच और जरूरत के अनुसार बदलाव करना पड़ सकता है. किसानों के लिए मशीन खरीदने से पहले उसकी क्षमता, रखरखाव और अनुदान की शर्तों की जानकारी लेना जरूरी है.
क्या-क्या फायदे
खेत की जमीन समतल होने से सिंचाई के दौरान पानी का वितरण बेहतर हो सकता है. ऊंचे हिस्सों में पानी कम पहुंचने और निचले हिस्सों में पानी जमा होने की समस्या घटाने में मदद मिलती है. इससे फसल को जरूरत के मुताबिक पानी देना आसान हो सकता है. साथ ही खेत में बुआई और कृषि से जुड़े दूसरे काम भी अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकते हैं. किसानों को इस तकनीक का एक फायदा यह भी है कि खेत समतल होने से पानी और मिट्टी के प्रबंधन में आसानी होती है. खासकर बड़े खेतों में जहां जमीन का स्तर अलग-अलग होने से सिंचाई में दिक्कत आती है, वहां लेजर लेवलर उपयोगी साबित हो सकती है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

