संवाददाता@कृपा शंकर पांडेय…..
— रिवर रैचिंग कार्यक्रम में मछली संरक्षण पर जोर, आकार को लेकर उठे सवाल

सोन नदी में मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और मछलियों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से शुक्रवार को चोपन घाट पर रिवर रैचिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य सेक्टर योजना के तहत मत्स्य विभाग सोनभद्र की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 50 हजार मछलियों के फिंगरलिंग नदी में छोड़े गए। विभाग के अनुसार ढुलाई सहित इनकी कुल लागत करीब डेढ़ लाख रुपये है।
कार्यक्रम में नगर पंचायत चोपन अध्यक्ष उस्मान अली मौजूद रहे। निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने बताया कि नदी में छोड़े गए फिंगरलिंग इंडियन मेजर कार्प (आईएमसी) प्रजाति के हैं, जिनमें कतला, रोहू और नयन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सोन नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने के साथ जलीय संसाधनों का संरक्षण करना है। फिंगरलिंग प्रयागराज स्थित चौबेरी हैचरी से लाए गए हैं।

सहायक मत्स्य निदेशक शुभम कश्यप ने बताया कि विभागीय मानक के अनुसार 80 से 100 मिलीमीटर आकार के एक फिंगरलिंग की कीमत करीब 1.40 रुपये है। इस हिसाब से 50 हजार फिंगरलिंग की कीमत करीब 70 हजार रुपये होती है। हालांकि, ढुलाई सहित कार्यक्रम की कुल लागत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई गई।

कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने नदी में छोड़ी गई मछलियों के आकार को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि छोटे फिंगरलिंग बड़ी मछलियों का शिकार हो सकते हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना प्रभावित होगी। इस पर सहायक मत्स्य निदेशक ने कहा कि यदि कुछ फिंगरलिंग निर्धारित आकार से छोटे पाए गए हैं तो इस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने अगली बार फिंगरलिंग के निर्धारित आकार का विशेष ध्यान रखने की बात कही।

कार्यक्रम में वरिष्ठ मत्स्य निरीक्षक विकास कुमार दीपानकर, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के जिला पिछड़ा प्रकोष्ठ अध्यक्ष जितेंद्र निषाद, नगर अध्यक्ष संतोष साहनी, डॉ. विजय साहनी, दयाशंकर निषाद, सदाफल निषाद सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
