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Meerut News: मेरठ अमित हत्याकांड के आरोपी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रविता के तीनों बच्चों का पालन-पोषण कौन करेगा? आइए जानते हैं कि अमित के परिवार में कौन-कौन है और बच्चों की जिम्मेदारी अभी किसके पास है.
अमित-रविता
मेरठ: मेरठ के चर्चित सांप हत्याकांड में पति की हत्या के मामले में पत्नी रविता और उसका साथ देने वाले प्रेमी अमरदीप को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. आरोप है कि रविता ने प्रेमी के साथ मिलकर पति अमित की गला दबाकर हत्या कर दी थी. इसके बाद शव के पास जहरीला सांप छोड़कर हत्या को महज एक हादसा दिखाने की कोशिश की गई. कोर्ट के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रविता के तीनों बच्चों का पालन-पोषण कौन करेगा?
रविता और अमित के तीन बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा और दो बेटियां शामिल हैं. पिता की हत्या और मां को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद बच्चों के भविष्य और उनकी परवरिश को लेकर चिंता बढ़ गई है. सवाल यह भी है कि अमित के परिवार में कौन-कौन है और तीनों बच्चों की जिम्मेदारी किसके कंधों पर होगी? क्या परिवार के अन्य सदस्य बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर पाएंगे?
चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे अमित
मेरठ के अकबरपुर सादात निवासी अमित कश्यप चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे. उनके बड़े भाई का नाम मोनू है, जबकि दो छोटे भाइयों के नाम अंकित और संदीप हैं. अमित की हत्या के करीब तीन महीने बाद उनके पिता विजयपाल सिंह की भी सदमे में मौत हो गई थी. परिवार में एक के बाद एक हुई इन मौतों ने सभी को तोड़कर रख दिया.
दादी के ऊपर बच्चों की जिम्मेदारी
अब तीनों बच्चों की जिम्मेदारी उनकी दादी मुनेश पर है. अमित की मां मुनेश ही बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. अमित का बड़ा बेटा अनिकेत छह साल का है, जबकि उनकी एक बेटी चार साल की है. दोनों प्राथमिक स्कूल में पढ़ते हैं. वहीं, सबसे छोटी बेटी गौरी अभी ढाई साल की है और अपनी दादी के साथ रहती है.
बच्चों को देखकर अमित की आती है याद
पिता की मौत के बाद से ही दादी मुनेश तीनों बच्चों की देखभाल कर रही हैं. दादी का कहना है कि बच्चों को देखकर उन्हें अपने बेटे अमित की याद आती है. उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि छोटी बेटी गौरी अभी इतनी छोटी है कि उसे पता भी नहीं है कि उसके माता-पिता के साथ क्या हुआ. वहीं, बेटे अनिकेत और बेटी अनु को पिता की कमी महसूस होती है.
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता
परिवार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती तीनों बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और उनके भविष्य को संवारने की है. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण दादी के लिए बच्चों की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं है. इसके बावजूद वह अपने पोता-पोतियों की परवरिश करने और उन्हें बेहतर भविष्य देने की कोशिश कर रही हैं.
अमित की मौत के बाद बच्चों ने पहले ही अपने पिता को खो दिया है. अब मां को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनके भविष्य को लेकर चिंता और बढ़ गई है. ऐसे में दादी मुनेश के सामने तीनों बच्चों को संभालने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और परवरिश की जिम्मेदारी निभाने की बड़ी चुनौती है.

