गाजीपुरः छत पर लोग, बाउंड्री पर लोग और मैदान के चारों तरफ हजारों दर्शक, सुनने में लगेगा कि ये शायद क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल चल रहा है. लेकिन गाजीपुर के रेवतीपुर में न क्रिकेट, न क्रिकेटर यहां दशकों पुरानी फुटबॉल की परंपरा का रोमांच चला आ रहा है. गाजीपुर के रेवतीपुर ब्लॉक के गांवों में इन दिनों किसी बड़े क्रिकेट विश्व कप फाइनल जैसा माहौल नजर आ रहा है. जब आप रेवतीपुर गांव के स्टेडियम के बाहर और भीतर का नजारा देखेंगे, तो आपको ऐसा लगेगा मानो कोई महामुकाबला चल रहा हो. लेकिन अंदर पहुंचने पर आपको क्रिकेट का बल्ला या खिलाड़ी नहीं, बल्कि फुटबॉल की गूंज और खिलाड़ियों के ताबड़तोड़ किक सुनाई देंगे. दशहरा के पावन अवसर पर रेवतीपुर में आयोजित होने वाला यह फुटबॉल टूर्नामेंट किसी त्योहार से कम नहीं है.
64 वर्षों से चली आ रही है अनूठी परंपरा
नवकवि युवक संघ खटीपुर के तत्वावधान में दशहरा के शुभ अवसर पर हर साल इस भव्य फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है. स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से शुरू हुई इस परंपरा की नींव स्व. द्विजेन्द्र नाथ राय (बुच्चीराय), मंगला प्रसाद राय और रामअवध पाण्डेय जैसे गणमान्य लोगों ने रखी थी. आज यह आयोजन अपनी ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए गाजीपुर ही नहीं, बल्कि दूर-दूर तक अपनी एक खास पहचान बना चुका है.
देशभर से जुटती हैं दिग्गज टीमें
टूर्नामेंट के आयोजक और कमेंट्री पैनल से जुड़े मृत्युंजय राय ‘अमर’ बताते हैं कि हर साल इस प्रतियोगिता में लगभग 15 से 20 टीमें हिस्सा लेती हैं. इसमें बिहार (पटना) और मध्य प्रदेश समेत भारत के कई राज्यों और महानगरों (जैसे दिल्ली) के साथ-साथ प्रतिष्ठित हॉस्टल्स की टीमें भी पूरी तैयारी के साथ शिरकत करती हैं.टीमों को आमंत्रित करने का सिलसिला एक महीने पहले ही शुरू हो जाता है.यहां होने वाले सभी मैच पूरी तरह से इंटरनेशनल मानदंडों के अनुसार आयोजित किए जाते हैं, जिसके चलते देश के बेहतरीन खिलाड़ी यहां अपना हुनर दिखाने पहुंचते हैं.
छुट्टियां बचाकर मैच देखने पहुंचते हैं लोग
इस टूर्नामेंट को लेकर स्थानीय लोगों में दीवानगी का आलम यह है कि वे महीनों पहले से अपनी छुट्टियां बचाकर रखते हैं, ताकि क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और महामुकाबले यानी फाइनल मुकाबले के रोमांच को मिस न करें.मृत्युंजय राय बताते हैं कि मैच के दौरान स्टेडियम का नजारा देखने लायक होता है.वर्तमान में ही मैदान के चारों ओर लगभग 5 से 6 हजार दर्शक मौजूद रहते हैं. फाइनल वाले दिन तो स्थिति यह हो जाती है कि मैदान की जमीन पर सिर्फ खिलाड़ी और फुटबॉल ही नजर आती है.इसके अलावा बाउंड्री, छतों और आसपास की हर जगह सिर्फ और सिर्फ इंसानों का हुजूम दिखाई देता है यानी ग्राउंड के अलावा जमीन का एक इंच हिस्सा भी खाली नहीं रहता.
स्थानीय प्रतिभाओं का जलवा
जब बात रेवतीपुर की अपनी टीमों और खिलाड़ियों की आती है, तो यहां फुटबॉल का स्तर काफी ऊंचा है. गांव में दो-तीन मजबूत टीमें हैं, जिनके बेहतरीन खिलाड़ियों को छांटकर एक ‘बेस्ट इलेवन’ (Best Eleven) तैयार की जाती है, जो इस महाकुंभ में चुनौती पेश करती है. नेशनल लेवल के खिलाड़ियों के मार्गदर्शन और कोचिंग ने यहां के युवाओं में फुटबॉल के प्रति क्रेज को और ज्यादा बढ़ा दिया है.
ड्रोन से निगरानी नहीं, लाइव स्ट्रीमिंग से भी जुड़ते हैं फुटबॉल प्रेमी
रेवतीपुर के इस फुटबॉल टूर्नामेंट की खासियत सिर्फ मैदान में उमड़ने वाली हजारों दर्शकों की भीड़ नहीं है, बल्कि इसे लोगों तक पहुंचाने का तरीका भी है. यहां मैच की लाइव स्ट्रीमिंग की जाती है और ड्रोन के जरिए मैदान के दृश्य भी कैद किए जाते हैं. दशहरे की छुट्टियों और मेलों के बीच रेवतीपुर का यह फुटबॉल मैदान खेल प्रेमियों के लिए किसी तीर्थस्थल से कम नहीं है, जहां हर साल खेल और उत्साह का नया इतिहास लिखा जाता है.
