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Kuch Kuch Hota Hai 28 Years: करण जौहर के निर्देशन में बनी ‘कुछ कुछ होता है’ ने दोस्ती, एकतरफा प्यार, बिछड़ने और दूसरी बार प्यार पाने जैसे एहसासों को एक साथ पिरोया था. शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी की अदाकारी के साथ फिल्म के गाने भी इसकी पहचान बन गए. 28 साल बाद भी इस फिल्म की यादें इसलिए ताजा हैं, क्योंकि इसके किरदार सिर्फ पर्दे पर प्यार नहीं करते, बल्कि गलतियां भी करते हैं, बिछड़ते हैं और जिंदगी से सीखते हैं. शायद यही वजह है कि ‘कुछ कुछ होता है’ के ये सात पल आज भी पुराने नहीं लगते.
नई दिल्ली. कुछ फिल्में वक्त के साथ पुरानी हो जाती हैं, लेकिन उनसे जुड़ी यादें कभी धुंधली नहीं पड़तीं. कभी कॉलेज की शरारतें याद आती हैं तो कभी किसी अपने से बिछड़ने का दर्द दिल को छू जाता है. बॉलीवुड की एक ऐसी ही फिल्म है, जिसने दोस्ती और प्यार के मायने समझाने के साथ कई अधूरी मोहब्बतों को भी आवाज दी. इसमें शाहरुख खान का अंदाज था, काजोल की चुलबुली अदाएं थीं और रानी मुखर्जी की मौजूदगी ने कहानी को एक अलग ही रंग दिया. आज ही के दिन यानी 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई इस फिल्म को आज 28 साल पूरे हो गए हैं. साल 1998 में आज ही के दिन रिलीज हुई इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा के रोमांस और दोस्ती की परिभाषा हमेशा के लिए बदल दी थी. शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी की तिकड़ी वाली यह फिल्म आज भी लगभग तीन दशक बाद उतनी ही तरोताजा और जादुई लगती है. आज बात करेंगे फिल्म के उनक 7 आइकॉनिक सीन्स के बारे में जो आज भी उतने ही ताजे लगते हैं, जितने 28 साल पहले…
जब राहुल ने समझाया था प्यार और दोस्ती का रिश्ता: फिल्म का सबसे यादगार पलों में से एक वह है जब राहुल (शाहरुख खान) प्यार और दोस्ती के अपने अनोखे नजरिए को बयां करता है. फिल्म में शाहरुख का डायलॉग ‘प्यार दोस्ती है’ न सिर्फ उस दौर के युवाओं के दिलों में उतर गया था. राहुल और अंजलि की दोस्ती कॉलेज की मस्ती, नोकझोंक और एक-दूसरे को चिढ़ाने से आगे बढ़ती है. अंजलि मन ही मन राहुल को चाहने लगती है, लेकिन राहुल उसे अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझता है. यही फर्क उनकी कहानी को खास बनाता है. राहुल की सोच ने उस दौर के युवाओं को खूब प्रभावित किया. आज भी दोस्ती से शुरू होने वाले रिश्तों की बात आती है तो इस फिल्म का जिक्र जरूर होता है.
कॉलेज में राहुल-अंजलि की नोकझोंक: ऑक्सफोर्ड नीले बैंड, टॉमबॉय लुक वाली अंजली और कॉलेज के रॉकस्टार राहुल के बीच का मजाक और हल्की-फुल्की तकरार ने दोनों की कैमिस्ट्री को अमर बना दिया. वहीं, शाहरुख खान का शरारती अंदाज इस दोस्ती को और दिलचस्प बनाता है. इन सीन्स की खासियत यही थी कि इनमें दोस्ती बनावटी नहीं लगी.
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रेलवे स्टेशन पर बिछड़ने का दर्द: जब अंजली को अहसास होता है कि उसके दिल में राहुल के लिए भावनाएं बदल रही हैं तो वह कॉलेज छोड़ने का फैसला करती है. उनकी जुदाई का वह सीन फिल्म के सबसे भावुक क्षणों में गिना जाता है. राहुल को यह समझ नहीं आता कि उसकी सबसे अच्छी दोस्त अचानक क्यों जा रही है और ट्रेन छूटने के दौरान राहुल का पीछे दौड़ना दर्शकों की आंखों में आंसू ले आता है.
राहुल-अंजलि का रेन डांस: बारिश की बूंदों के बीच फिल्माया गया राहुल और अंजली का वह रोमांटिक सीक्वेंस बॉलीवुड के सबसे क्लासिक गानों और सीन्स में से एक है. संगीत, बारिश का माहौल और दोनों के बीच का अनकहा खिंचाव इस सीन को बेहद खास बनाता है. भले ही उस वक्त अंजली अपने जज्बातों को जुबान न दे पाई हो, लेकिन उनकी नजदीकियों ने दर्शकों के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी थीं.
छोटी अंजलि ने जब उठाया जिम्मा: फिल्म की कहानी में बड़ा बदलाव तब आता है, जब राहुल की बेटी छोटी अंजलि अपनी मां टीना के छोड़े हुए खत पढ़ती है. टीना चाहती है कि उसकी बेटी किसी तरह राहुल को उसकी कॉलेज की दोस्त अंजलि से फिर मिलाए. इसके बाद छोटी अंजलि अपने पिता की जिंदगी में खुशियां लौटाने की कोशिश शुरू कर देती है. सना सईद ने छोटी अंजलि के किरदार में मासूमियत और शरारत का अच्छा मेल दिखाया. उसकी कोशिशें कहानी को आगे बढ़ाती हैं और दर्शकों को यह उम्मीद देती हैं कि शायद राहुल और अंजलि की अधूरी कहानी को इस बार पूरा होने का मौका मिल जाए.
समर कैंप में सालों बाद आमना-सामना: कॉलेज के दिनों के सालों बाद जब राहुल और अंजली एक समर कैंप में दोबारा मिलते हैं तो पुरानी यादें और अनकहे जज्बात फिर से ताजा हो जाते हैं. अंजली ने भले ही अपने आपको बदल लिया हो और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हो. लेकिन राहुल को देखते ही उसके पुराने अहसास फिर से याद आ जाते हैं. उनकी वह अजीब सी खामोशी और पुरानी नोंकझोक दर्शकों को फिर से पहले हाफ के जादू में खींच ले जाती है. दर्शकों को भी यहीं से उम्मीद बंधती है कि शायद दोनों को एक-दूसरे को समझने का दूसरा मौका मिल सके.
शादी के मंडप में पूरी हुई अधूरी प्रेम कहानी: फिल्म का आखिरी शादी वाला सीक्वेंस सारी उलझनों को सुलझा देता है. जो राहुल, अंजलि और अमन के रिश्ते को निर्णायक मोड़ पर ले आता है. अमन समझ जाता है कि अंजलि के दिल में राहुल के लिए अब भी प्यार है. ऐसे में वह उसे अपने साथ बांधकर रखने के बजाय उसकी खुशी को अहमियत देता है. राहुल और अंजलि आखिरकार अपने दिल की बात स्वीकार करते हैं और उनकी प्रेम कहानी की हैप्पी एंडिंग होती है.
