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Varanasi Dussehra 2026: दशहरा का त्योहार जल्द ही आने वाला है और उसको लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. वाराणसी में दशहरे के काम से ही एक मुस्लिम परिवार का घर चलता है. उनके नाना जी ने इस परम्परा की शुरुआत की थी और अब शमशाद खान इसे निभा रहे हैं.
वाराणसी: जिले में दशहरा के महापर्व पर गंगा जमुनी तहजीब की अनोखी मिशाल देखने को मिलती है. यहां बुराई पर अच्छाई के महापर्व दशहरा पर रावण का पुतला मुस्लिम परिवार तैयार करता है. बीते 3 पीढ़ियों से शमशाद खान का परिवार इस काम को करता चला आ रहा है. उनके नाना जी ने इस परम्परा की शुरुआत की थी और अब शमशाद खान इसे निभा रहे हैं.
दशहरा के करीब 3 महीने पहले से शमशाद खान और उनके बेटों के साथ उनका पूरा परिवार इस काम में जुट जाता है. कोई बांस की टहनियों को काटकर उसे आकार देता है तो कोई रावण के पुतले को बनाने के लिए दूसरे कामों में जुटा होता है. हर दिन 24 घंटे में से 16 घंटे शमशाद और उनका परिवार इस काम को करते हैं.
नाना के नक्शे कदम पर चल रहे शमशाद
लोकल-18 से बातचीत में शमशाद खान ने बताया कि उनके नाना बाबू खान भी करीब 5 दशक पहले यहां दशहरे के रावण को बनाते थे. उनके दिखाए नक्शे कदम पर अब शमशाद चल रहे हैं. बताते चलें कि बीते 25 सालों से वो और उनका परिवार वाराणसी में होने वाले रावण दहन का पुतला तैयार करते चले आ रहे हैं.
25 साल से कर रहे काम
वाराणसी में अलग-अलग जगहों पर होने वाले दशहरा मेले के लिए बीते 2 दशक से वो भी इस काम को करते आ रहे हैं. इस साल भी वो करीब आधा दर्जन से अधिक रावण के बड़े पुतले को तैयार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि काशी में हर पर्व को चाहे वो होली हो या दिवाली, हिन्दू मुस्लिम भाई मिलकर ही मनाते हैं. दशहरे के महापर्व पर भी गंगा जमुनी तहजीब की यही मिशाल सालों से देखने को मिल रही है.
3 महीने पहले से जुट जाता है परिवार
शमशाद नें बताया की उन्हें इस काम में सुकून मिलता है. यही वजह है की वो और उनका पूरा परिवार इस काम में दशहरा से करीब 3 महीने पहले से जुट जाता है.उन्होंने बताया की रावण के एक पुतले को बनाने में करीब 5000 रूपये प्रति फीट तक का खर्च आता है. बरेका में जलने वाला पूर्वांचल का सबसे बड़े 75 फीट के रावण को भी शमशाद का परिवार ही बनाता चला आ रहा है. बता दें कि इस बार बरेका में जलने वाले 75 फीट के रावण को कागज के बजाए सिल्क के कपड़ों से बनाया गया है.

