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ब्रिटिश काल में बाघों और घने जंगलों के लिए मशहूर था शाहजहांपुर, इतिहासकार डॉ. विकास खुराना से जानें दिलचस्प फैक्ट

Admin by Admin
October 15, 2026
in उत्तर प्रदेश
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ब्रिटिश काल में बाघों और घने जंगलों के लिए मशहूर था शाहजहांपुर, इतिहासकार डॉ. विकास खुराना से जानें दिलचस्प फैक्ट


Last Updated:October 15, 2026, 16:11 IST

Shahjahanpur History During British Rule: उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर कभी घने जंगलों और बहती नदियों के लिए जाना जाता था, लेकिन अब इसकी पहचान धार्मिक पर्यटन से भी जुड़ रही है. यहां बिसरात घाट पर हनुमान जी की विशाल प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है, तो भगवान परशुराम से जुड़ी मान्यताएं भी लोगों को इस ओर खींच रही हैं. इतिहासकार डॉ. विकास खुराना के मुताबिक, ब्रिटिश शासन के दौरान यहां करीब 70 हजार हेक्टेयर में जंगल फैला था, जहां बाघ समेत कई जंगली जीव पाए जाते थे. समय के साथ शाहजहांपुर की पहचान में बदलाव आया है. जानिए इस जिले का इतिहास, भगवान परशुराम से जुड़े प्रमाण और यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों की खासियत.

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शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर कभी अपने घने जंगलों, बहती नदियों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता था. ब्रिटिश काल में भी यहां की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती थी. अब समय के साथ जिले की पहचान में बदलाव आया है. यहां बिसरात घाट पर बनी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा और भगवान परशुराम जी से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रही हैं. प्राकृतिक सुंदरता से लेकर धार्मिक आस्था तक का यह सफर शाहजहांपुर को एक अलग पहचान दे रहा है.

इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि ब्रिटिश काल में शाहजहांपुर मुख्य रूप से प्राकृतिक पर्यटन केंद्र था. उस समय यहां करीब 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में घने जंगल फैले हुए थे. इन जंगलों में बाघों समेत कई जंगली जीव रहते थे. अंग्रेज अधिकारी और उनके परिवार यहां की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने आते थे. उस दौर में जिले की पहचान यहां की कल-कल बहती नदियों और घने जंगलों से होती थी. दुधवा नेशनल पार्क की नींव भी इसी प्राकृतिक माहौल और संरक्षण की सोच के साथ पड़ी थी.

हनुमान जी की विशाल प्रतिमा से बढ़ा धार्मिक महत्व

समय के साथ शाहजहांपुर की पहचान में बदलाव आया है. अब यह जिला धार्मिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभर रहा है. बिसरात घाट पर बनी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है. इसे उत्तर भारत की सबसे बड़ी हनुमान प्रतिमा बताया जाता है. इसके साथ ही भगवान परशुराम जी की जन्मस्थली से जुड़ी मान्यताओं के कारण भी यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं. सरकार द्वारा इस स्थान को भगवान परशुराम जी की पवित्र जन्मस्थली के रूप में मान्यता दिए जाने से श्रद्धालुओं में उत्साह है. रोज सैकड़ों लोग यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

जोगी खेड़ा के नाम से जाना जाता था यह क्षेत्र

ऐतिहासिक और पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक, करीब 1000 ईस्वी के आसपास इस क्षेत्र को जोगी खेड़ा के नाम से जाना जाता था. वहीं, प्रयागराज के प्राचीन अभिलेखों में इसे परशुरामपुरी कहा गया है. इस स्थान से भगवान परशुराम जी के कई पौराणिक अवशेष जुड़े हुए हैं. इन्हें यहां के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक इतिहास से जोड़कर देखा जाता है.

तालाब की खुदाई में मिला था प्राचीन फरसा

इस स्थान की ऐतिहासिकता से जुड़ी एक घटना साल 1901 की है. उस समय एक स्थानीय तालाब की खुदाई के दौरान प्राचीन फरसा निकला था. इसे भगवान परशुराम जी के फरसे से जोड़कर देखा जाता है. इस घटना का जिक्र भी इस क्षेत्र के इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के संदर्भ में किया जाता है. इस तरह शाहजहांपुर का इतिहास प्राकृतिक संपदा से लेकर धार्मिक आस्था तक फैला हुआ है. यहां के घने जंगलों और नदियों से जुड़ी पुरानी पहचान के साथ-साथ धार्मिक स्थल भी जिले को एक अलग पहचान दिला रहे हैं.

About the Author

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Seema Nath

Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

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Location :

Shahjahanpur,Uttar Pradesh

First Published :

October 15, 2026, 16:11 IST



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