• Contact US
  • Privacy Policy
Sonebhadra Live
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

रामपुर में दशकों से रावण के पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार, पिता के बाद बेटे ने संभाली विरासत, बरेली से लेकर उत्तराखंड तक डिमांड

Admin by Admin
October 14, 2026
in उत्तर प्रदेश
0
रामपुर में दशकों से रावण के पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार, पिता के बाद बेटे ने संभाली विरासत, बरेली से लेकर उत्तराखंड तक डिमांड


Last Updated:October 14, 2026, 18:45 IST

Rampur News: रामपुर में एक मुस्लिम परिवार पिछले कई दशकों से दशहरे के लिए रावण के पुतले बना रहा है. परिवार के सुलेमान पिछले 23 साल से इस काम को संभाल रहे हैं, जबकि उनके पिता करीब 60 साल तक रावण के पुतले बनाते रहे. पिता के निधन के बाद अब वह उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. सुलेमान के बनाए पुतले रामपुर के अलावा बरेली, मुरादाबाद, हापुड़ और उत्तराखंड तक भेजे जाते हैं. महंगाई के चलते इस बार उन्हें पहले के मुकाबले कम पुतले बनाने पड़े हैं. एक पुतले को तैयार करने में 20 से 25 दिन लगते हैं और इस काम से आठ लोगों को रोजगार भी मिलता है. जानिए कैसे सुलेमान पीढ़ियों पुरानी इस परंपरा को निभा रहे हैं.

Amazon Prime DayTop Deals Inside

रामपुर: दशहरे पर रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है. इसके लिए कई दिन पहले से ही पुतले बनाने का काम शुरू हो जाता है. रामपुर में एक परिवार ऐसा भी है, जो पिछले कई दशकों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है. खास बात यह है कि मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद इस परिवार में पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है. यहां रहने वाले सुलेमान पिछले 23 साल से रावण के पुतले बना रहे हैं. उनसे पहले उनके पिता करीब 60 साल तक यह काम करते रहे. अब पिता के निधन के बाद सुलेमान उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.

सुलेमान बताते हैं कि उन्होंने अपने पिता से ही रावण के पुतले बनाने का काम सीखा था. करीब आठ महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद अब वह इस काम को संभाल रहे हैं और हर साल दशहरे पर रावण के पुतले तैयार करते हैं. सुलेमान के बनाए रावण के पुतले सिर्फ रामपुर तक ही सीमित नहीं हैं. उनके बनाए पुतले हापुड़, बरेली, मुरादाबाद, कुंदरकी और उत्तराखंड के रुद्रपुर तक भेजे जाते हैं. इसके अलावा रामपुर की तहसील टांडा, बिलासपुर, स्वार और मिलक राठौड़ा समेत कई जगहों पर भी उनके बनाए पुतले जलाए जाते हैं.

महंगाई के चलते कम हुए पुतलों के ऑर्डर
सुलेमान बताते हैं कि पहले वह हर साल करीब 35 रावण के पुतले बनाते थे, लेकिन इस बार महंगाई के चलते सिर्फ 11 पुतले ही तैयार कर रहे हैं. पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान की कीमत बढ़ने से लागत भी बढ़ गई है. ऐसे में पहले के मुकाबले कम पुतले बनाने पड़ रहे हैं. सुलेमान के मुताबिक, पहले उनके यहां 65 फुट तक ऊंचे रावण के पुतले बनाए जाते थे. इस बार ज्यादातर पुतलों की ऊंचाई 35 से 40 फुट रखी जा रही है. हालांकि, रामपुर के लिए 50 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया जा रहा है. इतने बड़े पुतले को बनाने में काफी मेहनत और समय लगता है.

एक पुतला बनाने में लगते हैं 20 से 25 दिन
रावण का पुतला बनाने के लिए बांस, कागज और दूसरे सामान की जरूरत होती है. सुलेमान बताते हैं कि एक पुतला तैयार करने में करीब 20 से 25 दिन लग जाते हैं. एक पुतले में लगभग एक क्विंटल कागज और 10 बांस इस्तेमाल होते हैं. पुतले की ऊंचाई और बनावट के हिसाब से उसे तैयार करने की लागत भी अलग-अलग होती है.

एक पुतले के मिलते हैं 12 से 25 हजार रुपये
सुलेमान बताते हैं कि एक पुतला बनाने के उन्हें करीब 12 हजार से 25 हजार रुपये तक मिलते हैं. दशहरे से करीब तीन महीने पहले ही वह पुतले बनाने का काम शुरू कर देते हैं, ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे हो सकें. हालांकि, रावण के पुतले बनाने का काम साल भर नहीं चलता. ऐसे में बाकी दिनों में सुलेमान शादियों में लाइट लगाने का काम करते हैं. इससे परिवार का खर्च चलता रहता है. सुलेमान ने रावण के पुतले बनाने के काम में आठ लोगों को रोजगार भी दे रखा है. पुतले का ढांचा तैयार करने से लेकर उसे अंतिम रूप देने तक सभी लोग मिलकर काम करते हैं. दशहरे के आसपास इस काम से उनके साथ जुड़े लोगों को भी रोजगार मिलता है.

पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे सुलेमान
सुलेमान कहते हैं कि उनके लिए हिंदू-मुस्लिम का कोई भेद नहीं है. वह अपने पुरखों से चले आ रहे काम को आगे बढ़ा रहे हैं और उन्हें यह काम करके खुशी मिलती है. उनके लिए रावण के पुतले बनाना सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पिता से मिली विरासत को संभालने का एक तरीका भी है.

About the Author

authorimg

Seema Nath

Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

और पढ़ें

Location :

Rampur,Uttar Pradesh

First Published :

October 14, 2026, 18:45 IST



Source link

Views: 8
Download Sonebhadra Live App
Previous Post

चोपन. नारी अबला नहीं, सबला है, समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला: विद्या शंकर पांडेय

Next Post

विंढमगंज. घिवही में अवैध बालू परिवहन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गई

Next Post

विंढमगंज. घिवही में अवैध बालू परिवहन करते ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी गई

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Contact US
  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

error: Content is protected !!
No Result
View All Result
  • Contact US
  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement