विश्वजीत बनर्जी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में हिंदुओं के धार्मिक स्थल का बड़ा चुनावी मुद्दा बनना तय है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश पर पूरे उत्तर प्रदेश में 950 से ज्यादा मंदिरों और हिंदू तीर्थ स्थलों का कायाकल्प कर दिया गया है. इस फैसले से ना केवल पूरे प्रदेश में धार्मिक टूरिज्म बड़ा है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक हालत सुधारने में भी बड़ा अहम रोल निभा रहा है.
403 विधानसभा सीट तक सीएम योगी के विकास की बयार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2021 में प्रदेश के मंदिरों और तीर्थ स्थलों के कायाकल्प का अभियान शुरू किया था. इसमें यह ध्यान रखा गया है कि सभी 303 विधानसभा सीटों के तहत आने वाले धार्मिक स्थल कवर हो जाएं. इस प्रयास के जरिए हरेक विधानसभा में कम से कम एक और अधिकतम पांच तीर्थ स्थलों का नये सिरे से रंग रोगन, मरम्मत और निर्माण किया गया है.
तीर्थ स्थल से तय होगी बीजेपी की जीत की हैट्रिक
बीजेपी को उम्मीद है कि सीएम योगी ने जिस तरह से हिंदू धार्मिक स्थलों को लेकर काम किया है, उससे 2027 में पार्टी की लगातार तीसरी जीत होनी तय है. हर मंदिर का कायाकल्प यहां आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए बीजेपी के प्रति नजदीकी को बढ़ाएगा. मंदिरों के सौंदर्यीकरण और रीडेवलपमेंट अभियान राज्य सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 और 2025 के बीच 650 से ज्यादा प्रोजेक्ट पहले ही पूरे हो चुके हैं. बाकी 300 एडवांस स्टेज में हैं. इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
गांव के एक मंदिर पर एक करोड़ तक हुआ खर्च
इस योजना के तहत सभी 403 सीटों के विधायकों के पास एक तीन स्थानीय और पुराने मंदिरों के कायाकल्प की सिफारिश करने को कहा गया था. इसमें छोटे गांव-कस्बे के मंदिरों से लेकर बड़े कॉरिडोर तक शामिल हैं. सीएम योगी की इस योजना के तहत गांव के छोटे मंदिरों पर 40 लाख से 1.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. इसमें मंदिर की बाउंड्री वॉल, बड़े एंट्री गेट, इंटरलॉकिंग फुटपाथ, 50 से 100 लोगों के एक साथ प्रार्थना करने के लिए शेड, सबमर्सिबल पंप या RO वॉटर कूलर के इंतजाम, साफ सुथरे टॉयलेट और 5 से 10 सोलर स्ट्रीट लाइट शामिल हैं.
वहीं जिला और तहसील स्तर के पुराने मंदिरों को 2 से 20 करोड़ रुपये में अपग्रेड किया जा रहा है. इनमें मल्टीपर्पस तीर्थयात्री हॉल, धर्मशालाएं, ऐतिहासिक कुंडों और तालाबों का रेस्टोरेशन, हेरिटेज फ्रंट लाइटिंग, लैंडस्केपिंग, पार्किंग और मेला ग्राउंड को लेवल करने का काम किया जा जा रहा है.
पर्यटन कारोबार 23 से बढ़कर 156 करोड़ तक पहुंचा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि पिछले नौ साल में करीब 1,500 मंदिरों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए फंड दिया गया है. उन्होंने इसे ‘कब्रिस्तान इकॉनमी’ से ‘मंदिर इकॉनमी’ की ओर बढ़ने का बदलाव बताया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में उत्तर प्रदेश आने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या करीब 23 करोड़ थी. मुख्यमंत्री का दावा है कि 2025 के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 156 करोड़ हो जाएगा.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय बहादुर पाठक भी मंदिरों के महत्व को स्वीकार करते हैं. उन्होंने कहा-
मंदिर सिर्फ पूजा करने की जगह नहीं हैं. ग्रामीण और छोटे शहरों वाले उत्तर प्रदेश में ये सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र भी हैं. मंदिरों को मजबूत करने से पार्टी का लोगों से जुड़ाव बढ़ता है. पार्टी की जिला इकाइयों को मंदिरों से जुड़े त्योहारों की पहचान करने को कहा गया है. इन त्योहारों को चुनाव से पहले बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है.
रोजगार और कारोबार का भी सहारा
उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह मंदिरों के विकास को रोजगार और कारोबार से जोड़कर देखते हैं. उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे. जयवीर सिंह ने कहा-
ऐसे राज्य में जहां सरकारी नौकरियां सीमित हैं और औद्योगिक निवेश आने में कई साल लग जाते हैं, वहां मंदिरों से जुड़ी अर्थव्यवस्था रोजगार का एक ऐसा मॉडल देती है, जो तेजी से आगे बढ़ सकता है.
इस रणनीति के पीछे एक सीधा हिसाब है. मंदिरों के विकास से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी. इससे होटल, दुकान, परिवहन और खानपान से जुड़े कारोबार को फायदा होगा. कारोबार बढ़ने से रोजगार के अवसर पैदा होंगे. बीजेपी इसी आर्थिक फायदे को अपनी विकास की राजनीति से जोड़ रही है.
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यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में मंदिरों पर फोकस
- मंदिरों के विकास की योजनाएं उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हैं. इनका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ सकता है.
- पूर्वांचल: इस क्षेत्र की 133 विधानसभा सीटों में वाराणसी, मिर्जापुर, चंदौली और जौनपुर जैसे जिले शामिल हैं. यहां कई बड़े मंदिर परियोजनाओं पर काम हुआ है.
- अवध: 82 सीटों वाले इस क्षेत्र में अयोध्या, लखनऊ, सीतापुर और बाराबंकी में धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर है.
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 79 सीटों वाले इस क्षेत्र में सहारनपुर, मेरठ और बागपत में मंदिरों से जुड़ी परियोजनाएं हैं.
- बुंदेलखंड: 53 सीटों वाले इस क्षेत्र में बांदा के कालिंजर और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थलों पर ध्यान दिया जा रहा है.
- ब्रज: 56 सीटों वाले इस क्षेत्र में मथुरा और आगरा प्रमुख हैं. मथुरा में मंदिरों से जुड़े मुद्दे और कृष्ण जन्मभूमि विवाद चुनाव के दौरान अहम हो सकते हैं.
इस तरह मंदिरों के विकास का मुद्दा केवल धार्मिक नहीं रह गया है. बीजेपी इसे पर्यटन, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ रही है. इसका राजनीतिक फायदा कितना मिलेगा, यह चुनाव के नतीजों से साफ होगा.
चुनाव से पहले बीजेपी को याद आते हैं मंदिर: सपा
समाजवादी पार्टी ने बीजेपी की इस रणनीति पर सवाल उठाए हैं. अयोध्या से सपा के उम्मीदवार तेज नारायण पांडे का आरोप है कि बीजेपी को चुनाव नजदीक आने पर ही मंदिरों की याद आती है. उनका कहना है कि सरकार को स्कूलों, अस्पतालों और गांवों की बुनियादी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए. विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी धार्मिक मुद्दों को आगे रखकर अपनी चुनावी जमीन मजबूत करना चाहती है.
सर्वे में बीजेपी को बढ़त का अनुमान
चुनावी सर्वे भी बीजेपी के पक्ष में तस्वीर दिखा रहे हैं. अप्रैल 2026 में दैनिक भास्कर के एक सर्वे में 403 सदस्यीय विधानसभा की 256 सीटों पर बीजेपी को पहली पसंद बताया गया था. समाजवादी पार्टी 135 सीटों पर आगे बताई गई थी.
सितंबर 2026 में न्यूज़ लीडर और मैट्रिज के एक सर्वे में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 267 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया.
इन सर्वे के आधार पर बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है. हालांकि, सर्वे चुनाव के अंतिम नतीजों की गारंटी नहीं होते. वोटरों की स्थानीय समस्याएं, विधायकों के प्रति नाराजगी और दूसरे मुद्दे भी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं. बीजेपी को उम्मीद है कि हिंदुत्व, मंदिरों का विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने की उसकी नीति मतदाताओं के बीच असर बनाए रखेगी.
एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से मंदिरों को जोड़ा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिरों के विकास को उत्तर प्रदेश की एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से भी जोड़ रहे हैं. सरकार का तर्क है कि धार्मिक पर्यटन बढ़ने से राज्य में पैसा आएगा. श्रद्धालु यात्रा, ठहरने, खाने-पीने और खरीदारी पर खर्च करेंगे. इससे स्थानीय कारोबार बढ़ेगा और लोगों को रोजगार मिलेगा. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मंदिरों के विकास का यह मॉडल 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राजनीतिक फायदा दिला पाएगा? फिलहाल पार्टी मंदिरों के विकास को अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है. वह इसे विकास और धार्मिक पहचान, दोनों से जोड़कर वोटरों तक पहुंचाना चाहती है.
बड़े मंदिर कॉरिडोर पर करोड़ों का निवेश
उत्तर प्रदेश में मंदिरों के विकास के लिए सबसे ज्यादा खर्च बड़े कॉरिडोर और प्रमुख तीर्थस्थलों पर किया जा रहा है. इन परियोजनाओं की लागत करीब 50 करोड़ रुपये से लेकर 1,000 करोड़ रुपये से भी अधिक तक बताई गई है.
- वाराणसी का काशी विश्वनाथ धाम: इस परियोजना पर करीब 800 से 900 करोड़ रुपये खर्च किए गए. इसका पहला चरण 2021 में शुरू हुआ और 2023 तक परियोजना पूरी हो गई.
- मिर्जापुर का विंध्यवासिनी कॉरिडोर: इस परियोजना पर 350 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. इसमें 50 फुट चौड़ा परिक्रमा मार्ग बनाया गया है. गुलाबी पत्थरों से सजाए गए इस मार्ग के साथ कालीखोह और अष्टभुजा मंदिरों को जोड़ने की व्यवस्था भी की गई है.
- अयोध्या का रामायण सर्किट: इसके तहत सूर्यकुंड, भरतकुंड और गुप्तार घाट से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है.
- ब्रज क्षेत्र: मथुरा के आसपास धार्मिक स्थलों के विकास पर 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. इसमें 21 किलोमीटर लंबा गोवर्धन परिक्रमा मार्ग, राधाकुंड और मानसी गंगा का सुधार, गलियों में बिजली के तारों को जमीन के नीचे डालना और ऐतिहासिक धरोहरों का विकास शामिल है.
- नैमिषारण्य धाम: सीतापुर के इस प्रमुख धार्मिक स्थल और चक्रतीर्थ के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है.
छोटे मंदिरों तक पहुंची विकास की योजनाएं
मंदिरों के विकास की योजनाएं केवल बड़े धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं. कई जिलों में छोटे मंदिरों और स्थानीय धार्मिक स्थलों के लिए भी धन दिया गया है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश
- बलिया: चित्रगुप्त मंदिर की पुरानी वास्तुकला को फिर से तैयार करने के लिए 1.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
- आजमगढ़: भैरव बाबा स्थल पर प्रवेश द्वार बनाने के लिए 55 लाख रुपये की राशि दी गई है.
- चंदौली: महालक्ष्मी महाद्वारी देवी मंदिर के विकास के लिए 1.44 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
अवध और मध्य उत्तर प्रदेश
- लखनऊ: श्री महावीर जी मंदिर के विकास पर 1.91 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.
- लखनऊ: मोहन रोड स्थित बुद्धेश्वर महादेव मंदिर के लिए 3.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
- मोहनलालगंज: हुलास खेड़ा मंदिर परिसर और आसपास के प्राचीन पुरातात्विक क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 11.99 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
बुंदेलखंड
- बांदा: कालिंजर नीलकंठ महादेव मंदिर के लिए 7.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं. इसका उद्देश्य किले के भीतर स्थित प्राचीन पत्थर के मंदिर को उसकी मूल शैली में सुधारना है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश
- सहारनपुर: मां शाकुंभरी देवी मंदिर में बाढ़ से सुरक्षा, परिक्रमा मार्ग और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करने के लिए 18.50 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
- मेरठ: 1857 के विद्रोह से जुड़े औघड़नाथ मंदिर के विकास के लिए 4.20 करोड़ रुपये की राशि दी गई है.
- बागपत: परशुरामेश्वर महादेव मंदिर के विकास के लिए 5.80 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
इन परियोजनाओं से साफ है कि सरकार बड़े तीर्थस्थलों के साथ स्थानीय मंदिरों के विकास पर भी जोर दे रही है. बीजेपी को उम्मीद है कि इससे धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और उसकी राजनीतिक पकड़ मजबूत होगी.

