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Mata Balsundari Mandir Rampur: घने जंगलों के बीच उबड़-खाबड़ रास्ते, न बिजली की सुविधा और न पक्की सड़क फिर भी हर शनिवार माता के जयकारों से पूरा वन क्षेत्र गूंज उठता है. उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पीपली वन में स्थित करीब 500 से 600 साल पुराना माता बालसुंदरी का सिद्ध पीठ जन-आस्था का ऐसा केंद्र है, जहां संतान सुख की चाहत से लेकर असाध्य रोगों से मुक्ति पाने तक, हर हफ्ते हजारों श्रद्धालु अपनी झोली फैलाए खिंचे चले आते हैं.
Mata Balsundari Mandir Rampur: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले की तहसील स्वार के मिलक खानम क्षेत्र में पीपली वन के घने जंगलों के बीच माता बालसुंदरी का प्राचीन मंदिर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए न तो अच्छी सड़क है और न ही बिजली की सुविधा, लेकिन इसके बावजूद हर शनिवार हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं. मंदिर के महंत अरुण भारती के मुताबिक यह एक प्राचीन पौराणिक सिद्ध पीठ है, जो करीब 500 से 600 साल पुराना मुग़ल साम्राज्य के दौर का बताया जाता है. यहां माता के बाल स्वरूप में प्रकट होने की मान्यता है.
संतान प्राप्ति और चमत्कारी कुएं से चर्म रोग निवारण की मान्यता
मंदिर के महंत अरुण भारती बताते हैं कि माता बालसुंदरी के दरबार से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, वे यहां आकर माता से संतान प्राप्ति की मन्नत मांगते हैं. महंत के मुताबिक कई श्रद्धालु संतान प्राप्ति की अपनी मनोकामना पूरी होने की बात बताते हैं. इसके अलावा चर्म रोग से परेशान लोग भी यहां आते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर के चमत्कारी कुएं के पानी से स्नान करने और पानी ले जाने से चर्म रोग में लाभ मिलता है.
हर शनिवार जुटते हैं 25 से 30 हजार श्रद्धालु
महंत अरुण भारती के मुताबिक हर शनिवार को यहां करीब 25 से 30 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और दूसरे राज्यों से भी लोग माता के दरबार में आते हैं. जंगल के बीच मंदिर होने और रास्ते में सुविधाओं की कमी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं होती. कोई संतान की कामना लेकर आता है तो कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता से प्रार्थना करता है.
साइकिल से कार और कारोबार तक का सफर
रामपुर सदर तहसील से माता के दर्शन करने पहुंचे दीपक रस्तोगी बताते हैं कि वह पिछले 10 साल से यहां आ रहे हैं. वह कहते हैं कि जब उनके पास चलने के लिए साइकिल तक नहीं थी, तब से वह माता के दरबार में आ रहे हैं. आज उनके पास घर, कार और कारोबार है. दीपक अपनी तरक्की का श्रेय माता के आशीर्वाद को देते हैं. उनके मुताबिक माता के प्रति उनकी आस्था सालों से बनी हुई है और वह नियमित रूप से दर्शन करने आते हैं.
मुश्किल समय में पूरी हुई बेटी की शादी की मन्नत
श्रद्धालु राममूर्ति की कहानी भी माता के दरबार से जुड़ी आस्था को दिखाती है. वह बताती हैं कि एक समय ऐसा था, जब उनके पास रहने के लिए पक्का ठिकाना तक नहीं था. ऊपर से बेटी की शादी की जिम्मेदारी भी थी. ऐसे मुश्किल समय में उन्होंने माता से बेटी की शादी अच्छी तरह होने की मनोकामना मांगी. राममूर्ति के मुताबिक उनकी बेटी की शादी बहुत धूमधाम से हुई. इसके बाद से ही वह माता की सेवा में जुट गईं.
विभाजन के समय से जल रही है सेवा की लौ, 365 दिन अखंड ज्योति
करीब 70 वर्षीय किसान झंडा राम बताते हैं कि जब देश का बंटवारा हुआ और उनका परिवार पाकिस्तान से रामपुर आया, तभी से वह माता के मंदिर की सेवा से जुड़े हैं. उनके पिता भी मंदिर की सेवा किया करते थे. झंडा राम बताते हैं कि मंदिर में अखंड ज्योति साल के 365 दिन जलती रहती है. उनके मुताबिक नवरात्र ही नहीं बल्कि पूरे साल माता के दरबार में ज्योति जलाने की परंपरा निभाई जाती है. झंडा राम बताते हैं कि जब उनके पास खेती करने के लिए ट्रैक्टर नहीं था, तब उन्होंने माता बालसुंदरी से ट्रैक्टर मिलने की मनोकामना मांगी थी. उनके मुताबिक माता की कृपा से आज उनके पास ट्रैक्टर है और खेती का काम भी अच्छे से चल रहा है.
बीमारी से राहत और आस्था का अटूट बंधन
मंदिर की सेवा करने वाली शकुंतला बताती हैं कि वह शादी से पहले से ही माता को मानती हैं और उनके लिए कपड़े भी सिलती हैं. वह कहती हैं कि एक समय उनकी तबीयत इतनी खराब रहती थी कि उन्होंने कई जगह इलाज कराया लेकिन कहीं आराम नहीं मिला. आखिरकार वह माता के दरबार में आईं. शकुंतला के मुताबिक यहां आने के बाद उनकी तबीयत ठीक हो गई. पीपली वन के घने जंगल में स्थित माता बालसुंदरी मंदिर की पहचान सिर्फ इसकी प्राचीनता से नहीं, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की कहानियों और मान्यताओं से भी है.
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