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Guava Farming Tips : ताइवान पिंक अमरूद की खेती किसानों की किस्मत बदल रही है. इस अमरूद का गूदा गुलाबी रंग का होता है और स्वाद भी अच्छा होता है. लोकल 18 से गोंडा के किसान राजेश वर्मा बताते हैं कि वे ढाई बीघा में ताइवान पिंक अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. शुरुआत में करीब 56 हजार रुपये की लागत आई. राजेश के मुताबिक पहली बार फल की तुड़ाई में ही उनकी शुरुआती लागत निकल गई थी. अमरूद के बाग की देखभाल पर अब हर साल 20 हजार रुपये खर्च होते हैं. बाजार में अमरूद का भाव अच्छा रहने पर सालाना तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है.
गोंडा. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में किसान पारंपरिक खेती के साथ फलदार पौधों की बागवानी भी कर रहे हैं. ताइवान पिंक अमरूद की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का विकल्प बन रही है. इस अमरूद का गूदा गुलाबी रंग का होता है और स्वाद भी अच्छा होता है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग बनी रहती है. लोकल 18 से गोंडा के किसान राजेश कुमार वर्मा बताते हैं कि वे करीब दो से ढाई बीघा में ताइवान पिंक अमरूद की बागवानी कर रहे हैं. इसकी शुरुआत में उन्हें करीब 56 हजार रुपये की लागत आई थी. पहली बार फल की तुड़ाई (करीब 16 महीने) में ही उनकी शुरुआती लागत निकल गई थी. अब उन्हें इस बाग से अच्छी कमाई हो रही है.
नहीं जाना पड़ता बेचने
राजेश कुमार वर्मा के मुताबिक, अमरूद के बाग की देखभाल पर अब हर साल करीब 20 हजार रुपये खर्च होते हैं. बाजार में अमरूद का भाव अच्छा रहने पर सालाना तीन से चार लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है. हालांकि, कम भाव मिलने पर कमाई घट भी सकती है. यह पूरी तरह बाजार के दाम पर निर्भर करता है. अमरूद बेचने के लिए बाजार तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती. व्यापारी खुद उनके खेत पर आते हैं और अमरूद खरीदकर ले जाते हैं. इससे उन्हें फसल बेचने में आसानी होती है और भुगतान भी नकद मिल जाता है.
फल मक्खी से कैसे बचाएं
किसान राजेश कुमार वर्मा बताते हैं कि अमरूद की फसल को फल मक्खी से बचाना बहुत जरूरी है. इसके लिए किसानों को फल आने के बाद उस पर फ्रूट कवर या बैग का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे फल को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है. अच्छी गुणवत्ता वाले फल का बाजार में बेहतर भाव मिलते हैं. राजेश वर्मा का कहना है कि किसानों को पारंपरिक खेती के साथ फलदार पौधों की बागवानी पर भी ध्यान देना चाहिए. सही तरीके से देखभाल और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर खेती करने से अच्छी आमदनी के द्वार खुल जाते हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
