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Varanasi News : अर्दली बाजार में मौजूद ऐतिहासिक गोपाल लाल विला को स्मारक और इंटरप्रिटेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा. मान्यता है कि स्वामी विवेकानंद अपनी काशी यात्राओं के दौरान यहां ठहरे थे. इस परियोजना से युवाओं को उनके जीवन, विचारों और राष्ट्र निर्माण के संदेश को करीब से जानने का मौका मिलेगा.
स्वामी विवेकानंद का बनेगा भव्य स्मारक.
वाराणसी : काशी आने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. अब यहां आने वाले पर्यटक स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके विचारों को करीब से जान सकेंगे. वाराणसी के अर्दली बाजार स्थित ऐतिहासिक गोपाल लाल विला को स्वामी विवेकानंद के भव्य स्मारक के रूप में विकसित किया जाएगा. केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने इसके लिए 20.69 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. यानी लंबे समय से बदहाली का सामना कर रहे इस ऐतिहासिक स्थल के दिन अब बदलने वाले हैं.
खंडहर से स्मारक बनेगा गोपाल लाल विला
गोपाल लाल विला को स्वामी विवेकानंद के काशी प्रवास से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. यहां उनके जीवन और विचारों से जुड़ी यादों को सहेजने के साथ एक इंटरप्रिटेशन सेंटर यानी व्याख्या केंद्र भी बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य लोगों को स्वामी विवेकानंद के जीवन, आध्यात्मिक विचारों और देश के लिए उनके योगदान से परिचित कराना है. केंद्र सरकार ने ‘स्वदेश दर्शन 2.0 योजना’ के तहत काशी-सारनाथ हेरिटेज स्ट्रीटस्केप परियोजना को मंजूरी दी है. इसके लिए काशी को कुल 37.14 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. इसमें सबसे बड़ा हिस्सा, 20.69 करोड़ रुपये, गोपाल लाल विला में बनने वाले स्वामी विवेकानंद स्मारक के लिए रखा गया है.
तीन बार काशी आए थे स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद का काशी से गहरा जुड़ाव रहा है. उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, उन्होंने 1887, 1890 और 1891 में परिव्राजक संन्यासी के रूप में वाराणसी की यात्रा की थी. इन यात्राओं के दौरान गोपाल लाल विला में उनके ठहरने का उल्लेख मिलता है. कहा जाता है कि शिकागो में विश्व धर्म संसद जाने की योजना से भी इस स्थान का संबंध रहा है. शिकागो से लौटने के बाद स्वामी विवेकानंद वर्ष 1902 में फिर काशी आए थे. इसी वर्ष 4 जुलाई को उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया.
स्वामी विवेकानंद की विरासत को मिलेगी नई पहचान
गोपाल लाल विला में स्मारक बनने से काशी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान को एक नया आयाम मिल सकता है. यहां आने वाले लोगों को सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत देखने का मौका नहीं मिलेगा, बल्कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों, युवाओं के प्रति उनके संदेश और राष्ट्र निर्माण के उनके संकल्पों को भी समझ सकेंगे. अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि इस परियोजना का काम कब शुरू होता है और ऐतिहासिक गोपाल लाल विला को उसका नया स्वरूप कब मिलता है.
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