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Ghazipur News: गाजीपुर के मिश्र बाजार स्थित मां काली मंदिर में एक अनोखी मुद्रा वाली प्रतिमा और सात पुरानी पिंडियां स्थापित हैं. पुजारी गोपाल गोस्वामी के मुताबिक, करीब 35 साल पहले प्रतिमा हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली. आइए आपको इस चमत्कारी मंदिर और यहां के इतिहास के बारे में जानते हैं.
गाजीपुर: मां काली की प्रतिमा, नीचे लेटे भगवान शिव और आसपास गूंजती घंटियों के बीच स्थित मिश्र बाजार का काली मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है. यहां मां काली की प्रतिमा ऐसी मुद्रा में दिखाई देती है, जिसमें वे भगवान शिव के ऊपर खड़ी नजर आती हैं. मंदिर में सात पुरानी पिंडियां भी स्थापित हैं, जिन्हें स्थानीय मान्यता के अनुसार माता की बहनें कहा जाता है. नवरात्र में यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है.
इस मंदिर से जुड़ी एक कहानी करीब 35 साल पुरानी बताई जाती है. मंदिर के पुजारी गोपाल गोस्वामी के मुताबिक, एक समय मां काली की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने के लिए हटाने की कोशिश की गई थी. उनका दावा है कि प्रतिमा को रस्सी से खींचने का प्रयास हुआ, लेकिन रस्सी टूट गई. इसके बाद चेन और क्रेन की मदद से भी प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली. पुजारी के अनुसार, प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिली.
प्रतिमा हटाने की कोशिश क्यों हुई थी?
गोपाल गोस्वामी बताते हैं कि उस समय मंदिर में प्रतिमा को हटाकर दूसरी प्रतिमा स्थापित करने की योजना थी. इसको लेकर स्थानीय लोगों के बीच भी अलग-अलग राय थी. कुछ लोग प्रतिमा हटाने के पक्ष में थे, जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे थे. पुजारी के मुताबिक, इस मामले में तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों तक की भूमिका रही थी. हालांकि, इस घटना से जुड़े प्रशासनिक रिकॉर्ड या स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शियों की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
पुजारी यह भी बताते हैं कि बाद में मंदिर में पूजा-अर्चना की गई. स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक महिला को सपने में मां काली के दर्शन हुए, जिसके बाद प्रतिमा की दिशा बदलने की बात कही जाती है. यह प्रसंग मंदिर से जुड़ी धार्मिक जनश्रुति के रूप में बताया जाता है.
प्रतिमा हटाने के पक्ष में रहने वालों के साथ क्या हुआ?
पुजारी गोपाल गोस्वामी बताते हैं कि स्थानीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों ने मां काली की प्रतिमा हटाने के बारे में गलत सोचा था, उनके साथ बाद में कुछ अनहोनी घटनाएं हुईं. उनके मुताबिक, किसी को चेचक हो गया, किसी की गाय मर गई, तो किसी का हाथ टूट गया. इन घटनाओं को कुछ लोग माता से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, इन घटनाओं और प्रतिमा हटाने की कोशिश के बीच किसी संबंध की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
सात पुरानी पिंडियों का क्या है इतिहास?
मंदिर में मां काली की प्रतिमा के साथ सात पिंडियां भी स्थापित हैं. गोपाल गोस्वामी के अनुसार, इन पिंडियों को करीब सौ साल पुराना माना जाता है. उनका कहना है कि इन्हें अधिवक्ता गिरीश चंद्र वर्मा के पूर्वजों ने स्थापित कराया था. स्थानीय मान्यता में इन पिंडियों को मां काली की बहनों से जोड़कर देखा जाता है.
हालांकि, पिंडियों की स्थापना का सटीक वर्ष और उनसे जुड़े परिवार के ऐतिहासिक दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. मंदिर की उम्र भी स्थानीय तौर पर लगभग सौ साल बताई जाती है, जबकि वर्तमान काली प्रतिमा को पुजारी करीब 50 से 60 साल पुराना बताते हैं.
नवरात्र में सुबह से होती है पूजा
नवरात्र के दौरान मंदिर में सुबह पांच बजे पूजा के लिए पट खुलने और सात बजे आरती होने की जानकारी पुजारी ने दी. उनके मुताबिक, सुबह नौ बजे तक पूजा का निर्धारित समय रहता है. त्योहार के दौरान श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मिश्र बाजार का यह मंदिर स्थानीय आस्था और पुरानी धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है. प्रतिमा को हटाने की कोशिश और सात पिंडियों की कहानी यहां की पहचान का हिस्सा है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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