Last Updated:
Shahjahanpur ki local news : बीते दिनों भारी बारिश ने शाहजहांपुर में धान और गन्ने की फसलें तबाह कर दी हैं. खेतों में पानी भरने से धान सड़ चुका है. आरोप है कि मुख्यमंत्री के कड़े आदेशों के बावजूद लेखपाल मौके पर जाने के बजाय प्रधान के घर बैठकर खानापूर्ति कर रहे हैं. किसान जेबराम लोकल 18 से कहते हैं कि उनका तीन बीघा धान नष्ट हो चुका है. उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि जो भी संभव हो उन्हें सहायता राशि दी जाए ताकि उनके नुकसान की कुछ भरपाई हो सके. किसान बलविंदर सिंह कहते हैं कि दो-तीन दिनों तक खेतों में लगातार पानी भरा रहने से धान पूरी तरह सड़ चुका है.
शाहजहांपुर. बीते दिनों यूपी के शाहजहांपुर में हुई भारी बारिश ने किसानों की कमर तोड़कर रख दी है. धान और गन्ने की फसलों को 50 से 60 प्रतिशत तक भारी नुकसान पहुंचा है. मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद धरातल पर लेखपालों की लापरवाही साफ दिख रही है. अधिकारी और लेखपाल मौके पर जाने के बजाय सिर्फ कागजी लीपापोती कर रहे हैं. फसलें पानी में डूबकर तरह सड़ रही हैं लेकिन सर्वे के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है. परेशान और हताश किसानों ने सरकार से पारदर्शी तरीके से खेतों में जाकर सर्वे कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है ताकि उनके नुकसान की थोड़ी भरपाई हो सके.
कोई नहीं आया
किसान जेबराम ने अपना दर्द बताते हुए लोकल 18 से कहा कि उन्होंने अपने खेत में धान की फसल लगाई थी, लेकिन बारिश की वजह से खेत में एक भी पौधा सीधा नहीं खड़ा है. कटी हुई और खड़ी फसलें पानी में पूरी तरह डूबकर खराब हो गई हैं. उनकी तीन बीघा जमीन पर हुआ पूरा का पूरा धान नष्ट हो चुका है. अभी तक कोई भी लेखपाल उनके खेत पर नुकसान का जायजा लेने नहीं आया है. उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि जो भी संभव हो उन्हें सहायता राशि दी जाए ताकि उनके नुकसान की कुछ भरपाई हो सके.
किसान बलविंदर सिंह ने बताया कि बारिश और जलभराव के कारण उनके पूरे क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत फसलों का नुकसान हो चुका है. दो-तीन दिनों तक खेतों में लगातार पानी भरा रहने से धान पूरी तरह सड़ चुका है और अब उसमें कोई गुणवत्ता नहीं बची है. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी अभी तक कोई लेखपाल या सरकारी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है. उन्हें इस बात का बहुत दुख है कि संकट की इस घड़ी में उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. उन्होंने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द आकर फसलों का निरीक्षण करे ताकि किसानों को सरकारी मदद की कुछ उम्मीद बंध सके.
दाने सड़ रहे
किसान पवन गुप्ता ने बताया कि बारिश से क्षेत्र की फसलों को 35 से 40 प्रतिशत तक का भारी नुकसान हुआ है. हरा धान खेतों में गिर जाने और पानी भरने से दाने पूरी तरह सड़ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद लेखपाल सर्वे के नाम पर केवल लीपापोती कर रहे हैं. वे खेतों पर जाने के बजाय चुनिंदा जगहों पर बैठकर ही आंकड़े तैयार कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि अधिकारी ईमानदारी से एक-एक किसान के खेत पर जाकर असल नुकसान देखें और सही आकलन करके पीड़ितों को उचित मुआवजा प्रदान करें.
About the Author

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
और पढ़ें

