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Who Is Pranvi Urs: मैसूर की 23 वर्षीय गोल्फर प्रणवी उर्स ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया है. जापान के नागोया में हुए महिला व्यक्तिगत स्ट्रोकप्ले इवेंट में उन्होंने 15-अंडर-पार 265 का शानदार स्कोर बनाकर देश को गोल्फ का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक दिलाया है. सात साल की उम्र से गोल्फ खेलने और पुरुषों के बीच प्रो टूर्नामेंट जीतने वाली प्रणवी की यह जीत भारतीय गोल्फ के लिए एक मील का पत्थर है.
प्रणवी ने गोल्ड में गोल्ड जीतकर रचा इतिहास.
नई दिल्ली. प्रणवी उर्स के लिए बाधाओं को पार करना और नए कीर्तिमान स्थापित करना कोई नई बात नहीं है. वह पहले ही दिखा चुकी हैं कि दबाव के क्षणों में उनकी मानसिक मजबूती कितनी खास है. पिछले साल मुंबई में आयोजित आईजीपीएल इनविटेशनल टूर्नामेंट में उन्होंने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया था, जिसने पूरे गोल्फ जगत का ध्यान उनकी ओर खींच लिया था. यह एक मिक्स्ड फील्ड टूर्नामेंट था, जिसमें भारत के शीर्ष पुरुष गोल्फर भी हिस्सा ले रहे थे. अपने आईजीपीएल डेब्यू में ही प्रणवी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बोगी-फ्री 8-अंडर 60 का अविश्वसनीय स्कोर बनाया और चैंपियन बनीं थीं.
प्रणवी उर्स (Pranavi Urs) ने पहले ही साबित कर दिया था कि वह पुरुषों के खिलाफ जीत सकती हैं. उन्होंने यह भी दिखा दिया था कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिग्गजों को टक्कर दे सकती हैं. एशियन गेम्स 2026 में शनिवार के फाइनल राउंड में, मैसूर की इस 23 वर्षीय होनहार गोल्फर ने अपने सभी अनुभवों को समेटकर भारत के लिए पहला एशियन गेम्स महिला गोल्फ स्वर्ण जीतकर देश के खेल इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया.
मानसिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का कमाल
प्रणवी खुद इस बात को स्वीकार करती हैं कि खुद से बेहतर खिलाड़ियों और भारत के शीर्ष पुरुष गोल्फरों के खिलाफ खेलने से जो आत्मविश्वास मिलता है, वह अनमोल है. इसके अलावा, लेडीज यूरोपियन टूर के उनके अनुभव ने भी उनके खेल को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई है. एलईटी पर खेलते हुए उन्हें दुनिया भर के विभिन्न कोर्स, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का मौका मिला. अब यही व्यापक अनुभव जापान में एशियन गेम्स के दबाव भरे माहौल में उनके काम आ रहा है.
हांगझोऊ के मलाल को पीछे छोड़ रच दिया नया इतिहास
एशियन गेम्स का यह मंच उनके लिए एक अलग तरह का अवसर लेकर आया था. हांगझोऊ एशियन गेम्स में अदिति अशोक का रजत पदक अब तक एशियन गेम्स के गोल्फ इवेंट में भारत की किसी महिला द्वारा जीता गया इकलौता पदक था. लेकिन जापान के नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने वो कारनामा कर दिखाया जिसे इससे पहले किसी भी भारतीय महिला गोल्फर ने नहीं किया था. अदिति भी वहां फाइनल राउंड में बढ़त के साथ उतरी थीं, लेकिन अंततः उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा था. तब भारतीय टीम भी पोडियम पर पहुंचने से चूक गई थी. अब प्रणवी ने इतिहास को बदल दिया है और स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया.
बचपन के सपनों और जूनियर सर्किट से एशियन मंच तक का सफर
मैसूर में महज 7-8 साल की छोटी उम्र से गोल्फ स्टिक थामने वाली प्रणवी का यह सफर परिवार से मिली प्रेरणा से शुरू हुआ था. उन्होंने भारतीय जूनियर सर्किट में अपना दबदबा बनाते हुए दो बार ‘ऑल इंडिया जूनियर चैंपियन’ का खिताब जीता. अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 2017 में, जब वह केवल 14 वर्ष की थीं, उन्होंने हीरो विमेंस इंडियन ओपन में ‘बेस्ट एमेच्योर’ का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया. इसके बाद क्वीन सिरिकिट कप, फाल्डो सीरीज एशिया ग्रैंड फाइनल और विमेंस एमेच्योर एशिया पैसिफिक जैसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी. साल 2020 में 17 साल की उम्र में उन्होंने पेशेवर गोल्फ में कदम रखा और प्रो बनते ही हीरो विमेंस प्रो गोल्फ टूर के दूसरे और तीसरे चरण में लगातार जीत दर्ज करके गोल्फ जगत में तहलका मचा दिया.
आईजीपीएल की ट्रेनिंग और लेडीज यूरोपियन टूर ने दी मुकम्मल पहचान
प्रणवी के खेल को असल उड़ान और बड़ी पहचान तब मिली जब वह इंडियन गोल्फ प्रीमियर लीग (IGPL) के साथ जुड़कर ट्रेनिंग ले रही थीं और वहां खेल रही थीं. आईजीपीएल ही वह मंच था जहां उनकी असली क्षमता दुनिया के सामने आई. इसी अनुभव के दम पर 2025 के आईजीपीएल मुंबई इनविटेशनल में उन्होंने पुरुष पेशेवरों को पछाड़ते हुए 14-अंडर पार के स्कोर के साथ खिताब जीता और यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इसके बाद 2024 से 2026 के बीच लेडीज यूरोपियन टूर (LET) पर हेल्सिंगबोर्ग ओपन और अंडालूसिया कोस्टा डेल सोल ओपन डी एस्पाना में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई. अपने इसी शानदार सफर को एशियन गेम्स 2026 के मंच तक लाते हुए, उन्होंने जापान के नागोया में 15-अंडर-पार 265 का ऐतिहासिक स्कोर बनाया और व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने के साथ-साथ भारतीय दल को टीम स्पर्धा का रजत पदक भी दिला दिया.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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