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एशियन गेम्स भारतीय महिला हॉकी टीम गोल्ड: वर्ल्ड रैंकिंग में आठवें नंबर पर मौजूद भारतीय महिला हॉकी टीम ने वर्ल्ड रैंकिंग में चौथे नंबर की टीम और मौजूदा एशियाई चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर चौंका दिया. 44 साल बाद भारतीय महिलाओं के लिए यह एक ऐतिहासिक गोल्ड मेडल आया, इससे पहले भारत को 1982 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक मिला था. इस जीत से टीम को लॉस एंजलिस ओलंपिक खेलों के लिए सीधा क्वालिफिकेशन भी मिल गया है. ये बात इस वजह से भी खास है क्योंकि टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रहने के बावजूद टीम पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं.
भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में जीता गोल्ड
काकामिगाहारा: भारतीय महिला हॉकी टीम ने फाइनल में 1-0 के अंतर से चीन को हराते हुए 44 साल बाद गोल्ड मेडल अपने नाम किया. ये सबकुछ पहले क्वार्टर फाइनल में लालरेमसियामी (10 मिनट) के शानदार गोल और दूसरे क्वार्टर फाइनल में अनुभवी गोलकीपर सविता पुनिया के चमत्कारिक पेनल्टी स्ट्रोक सेव के चलते ही संभव हो पाया. पूरे मैच में डिफेंडिंग चैंपियन चीन कभी भारतीय रक्षापंक्ति को भेद ही नहीं सका. इस तरह भारत अब मेडल टैली में 16 गोल्ड, 25 सिल्वर और 35 ब्रॉन्ज के साथ कुल 76 पदक लेकर पांचवें नंबर पर पहुंच चुका है.
44 साल बाद एशियाड में पहली बार गोल्ड
भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स का आखिरी स्वर्ण पदक 1982 में खेले गए दिल्ली एशियाई खेलों में हासिल किया था. जब पहली बार महिला हॉकी को इन खेलों में शामिल किया गया था. अबकी बार कप्तान सलीमा टेटे की अगुवाई और कोच मरीन की देखरेख में देश की शेरनियों ने बहादुरी की नई इबारत लिखी.
टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाली खिलाड़ी
- दीपिका (भारत): 21 गोल
- नवनीत कौर (भारत): 10 गोल
- जियाकी झोंग (चीन): 9 गोल
ओलंपिक कोटा मिलने से दोहरी खुशी
पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए भारतीय महिला टीम क्वालीफाई नहीं कर पाई थी. ऐसे में ये जीत बेहद अहम है. अब भारत ने लॉस एंजलिस ओलंपिक 2028 का टिकट कटवा लिया है. पेरिस ओलंपिक रजत पदक विजेता चीन के खिलाफ भारत ने दसवें मिनट में ही लालरेम्सियामी के गोल के दम पर बढत बना ली जो अंत तक कायम रही. अपना 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही लालरेमसियामी ने गोल के दाहिने ओर मिली गेंद को सीधे गोल के भीतर डाला.
36 साल की सविता पुनिया रहीं फाइनल की हीरोइन
दूसरे क्वार्टर में सविता ने अपनी बायीं ओर डाइव लगाकर पेनल्टी स्ट्रोक बचाया. 300 मैच खेल चुकीं 36 साल की पूर्व कप्तान सविता पुनिया अगर वह सफल डाइव नहीं लगा पाती तो शायद मैच का नतीजा कुछ और होता. खैर अब चीन को रजत पदक मिला जबकि जापान ने शूटआउट में कोरिया को हराकर कांस्य पदक जीता.
भारत-चीन का फाइनल भारतीय समयानुसार दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होना था, लेकिन सवा चार बजे तक मैच शुरू नहीं हुआ क्योंकि टीम बस रास्ते में ट्रैफिक में फंस गई थी. एक अधिकारी ने बताया कि रास्ते में एक हादसे की वजह से यह जाम लगा है. इस जाम की वजह से खिलाड़ी स्टेडियम में देर से पहुंचे.
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…
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