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Yamini Maurya Commonwealth Games: मध्य प्रदेश के सागर की रहने वाली यामिनी मौर्य ने अपने मजबूत हौसले से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उन्होंने दिखाया कि अगर आपके इरादे फौलादी हैं, तो गरीबी, चोट और समाज के ताने आपका रास्ता नहीं रोक सकते. जूडो के खेल में उन्होंने अच्छे प्रदर्शन की बदौलत सफलता की नई इबारत लिखी है. अब एमपी सरकार ने उन्हें 25 लाख रुपए और सरकारी नौकरी देगी.
यामिनी मौर्य को एमपी सरकार देगी 25 लाख रुपए और सरकारी नौकरी
Yamini Maurya Story: कभी-कभी जीत ही सबकुछ नहीं होती है और कोई खिलाड़ी हार कर भी विजेता से कम नहीं होता है. ऐसा ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जूडो के खेल में देखने को मिला. भारत की यामिनी मौर्य को भले ही सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा हो, लेकिन फाइनल में उन्होंने ऐसा खेल दिखाया, जिसकी मिसाल कम ही मिलती है. वह बहुत ही करीबी अंतर से गोल्ड जीतने से चूक गईं. उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हार झेलनी पड़ी. यामिनी ने इंग्लैंड की प्लेयर कड़ी टक्कर दी.
भले ही फाइनल में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा हो, लेकिन अपने जज्बे और हौसले से वह सभी को प्रभावित करने में सफल रहीं. यामिनी मौर्य मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहने वाली हैं. दूसरी तरफ वेटलिफ्टिंग में मध्य प्रदेश के रहने वाले अजय बाबू ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया.
यामिनी मौर्य को मिलेंगे 25 लाख रुपए और सरकारी नौकरी
अब दोनों खिलाड़ियों को मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने बधाई दी है और उन्होंने कहा है कि उनकी उपलब्धि से देश का गौरव बढ़ा है. यामिनी ने जूडो में शानदार कौशल और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता, जबकि अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में प्रभावशाली प्रदर्शन कर दूसरा स्थान हासिल किया.
बाद में विश्वास सारंग ने वीडियो कॉल के माध्यम से यामिनी से बात भी की और उनका हौसला बढ़ाया. मध् प्रदेश की खेल नीति के अनुसार यामिनी और अजय बाबू को 25-25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी. दोनों खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी.
संघर्षों से भरा रहा है यामिनी का सफर
यामिनी मौर्य का सफर बहुत ही चुनौतीपूर्ण और संघर्षों से भरा रहा है. सीमित संसाधन और कई कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने अपने सपने को साकार किया है और देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीता है. यामिनी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय सरकारी स्कूल से की. शुरुआत में उन्हें जूडो खेलने के लिए ताने दिए जाते थे, लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की और सिर्फ अपने खेल पर फोकस बनाए रखा. इसी वजह से वह सफलता के मुकाम तक पहुंची हैं.
चोट के बाद यामिनी ने की थी दमदार वापसी
साल 2017 में एक मुकाबले के दौरान उनका घुटना टूट गया था. इसके बाद ऑपरेशन करवाया गया और डॉक्टर्स ने उन्हें रेस्ट करने की हिदायत दी. वह एक साल तक जूडो के खेल से दूर रहीं. इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से दमदार वापसी की और विरोधियों को पस्त किया. वह साल 2022 से लगातार भारतीय दल का हिस्सा रही हैं और दो बार सीनियर नेशनल चैंपियन भी रह चुकी हैं. अब कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतकर उन्होंने अपनी सफलता भरे ताज में एक और नगीना जड़ लिया है.
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गोविन्द सिंह जनवरी 2026 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर Senior Sub Editor कार्यरत हैं, जहां वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्टेट टीम का हिस्सा हैं. किस्सागोई के अंदाज में खबरें पेश कर…
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