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Rumesh Tharanga fast bowler turned javelin thrower: रमेश पथिरागे थरंगा ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 89.75 मीटर के मॉन्स्टर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीतकर 20 साल का सूखा खत्म किया. नीरज चोपड़ा को सिल्वर से संतोष करना पड़ा. तेज गेंदबाजी छोड़कर जैवलिन के वर्ल्ड लीडर बनने वाले रमेश की यह कहानी बेहद प्रेरणादायक है.
श्रीलंका के रमेश थरंगा पहले एक तेज गेंदबाज थे.
नई दिल्ली. 134 किलोमीट प्रति घंटे की रफ्तार से क्रिकेट की गेंद फेंकने वाला एक तेज गेंदबाज जब हाथ में भाला थामता है, तो इतिहास का रुख ही बदल देता है. श्रीलंका के युवा एथलीट रमेश पथिरागे थरंगा की कहानी कुछ ऐसी ही है. कभी क्रिकेट पिच पर अपनी घातक गेंदबाजी से बल्लेबाजों को छकाने का ख्वाब देखने वाले रमेश आज भाला फेंक के विश्व पटल पर छा चुके हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स में जब रमेश मैदान पर उतरे, तो उनके सामने दोहरे ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व विश्व चैंपियन भारत के नीरज चोपड़ा, मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, मौजूदा विश्व चैंपियन केशॉर्न वालकॉट और पूर्व विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स जैसे दिग्गजों की सबसे मजबूत चुनौती थी. लेकिन हवादार और कठिन परिस्थितियों के बावजूद 23 वर्षीय रमेश के इरादे नहीं डिगे.
प्रतियोगिता के दौरान तेज हवाओं के बीच रमेश केवल एक ही लीगल थ्रो दर्ज कर सके, लेकिन उनका वह एक थ्रो ही इतिहास रचने के लिए काफी था. उन्होंने 89.75 मीटर का मॉन्स्टर थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. इस मुकाबले में भारत के नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता, जबकि भारत के ही एक और उभरते हुए खिलाड़ी यशवीर सिंह ने 85.41 मीटर के अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया.
श्रीलंका के लिए 20 साल का सूखा खत्म
रमेश थरंगा पथिरागे का यह गोल्ड मेडल श्रीलंका के खेल इतिहास के लिए बेहद खास है. श्रीलंका ने पूरे 20 साल के लंबे इंतजार के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में कोई गोल्ड मेडल जीता है. इससे पहले साल 2006 में देश को यह खुशी मिली थी. कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में यह श्रीलंका का ओवरऑल यह सिर्फ 5वां गोल्ड मेडल है. सबसे खास बात यह है कि 1950 के बाद (76 सालों में) यह पहला मौका है जब श्रीलंका ने एथलेटिक्स की किसी स्पर्धा में राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है.
तेज गेंदबाज से वर्ल्ड लीडर बनने का सफर
अपने किशोरावस्था के दिनों में रमेश एक तेज गेंदबाज थे. वह 130 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकते थे और U-18 कैटेगरी में उन्होंने 134 किमी/घंटा की स्पीड दर्ज की थी. उस समय वह ईशान मलिंगा (जो अब श्रीलंका राष्ट्रीय टीम और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हैं) के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे. लेकिन उनकी जिंदगी में मोड़ तब आया जब उनके कोच टोनी प्रसन्ना की नजर उन पर पड़ी. रमेश ने कहा, ‘कोच टोनी ही मुझे जैवलिन में लेकर आए. वे हमेशा मुझसे कहते हैं कि अगर मैं बेसिक्स (मूल बातों) को समझ लूं और उन्हें सही तरीके से करूं, तो सफलता अपने आप मिलेगी. वे मेरे लिए सिर्फ एक कोच से बढ़कर हैं, वे मुझे खेल के साथ-साथ जिंदगी के सबक भी सिखाते हैं.’
निरंतरता ही असली ताकत
श्रीलंका के पूर्व थ्रोअर सुमेधा रणसिंघे ने कभी 85 मीटर का आंकड़ा पार किया था लेकिन बाद में उनका प्रदर्शन गिर गया. वहीं रमेश की पहचान उनकी गजब की निरंतरता रही है. 2025 के पूरे सीजन में उन्होंने 13 से अधिक बार 82 मीटर के मार्क को आसानी से पार किया. 2025 में अपने पहले विश्व चैंपियनशिप में सातवें स्थान पर रहने वाले रमेश ने इस साल अपनी सीमाओं को और आगे बढ़ाया. हाल ही में रोम डायमंड लीग में उन्होंने 92.62 मीटर का नया मीट रिकॉर्ड, नेशनल रिकॉर्ड और वर्ल्ड लीड दर्ज किया. 2026 सीजन में 90 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले वे दुनिया के पहले जैवलिन थ्रोअर बने.
नीरज चोपड़ा ने भी की तारीफ
रुमेश की इस असाधारण प्रतिभा के खुद नीरज चोपड़ा भी कायल हैं. क्वालिफिकेशन राउंड के बाद नीरज ने रमेश की तारीफ करते हुए कहा था, ‘वह एक अच्छा लड़का है और मेरा दोस्त है. इस साल उसने बहुत शानदार थ्रो किए हैं. यह बहुत अच्छी बात है कि वह श्रीलंका के लिए कुछ बड़ा और बेहतरीन कर रहा है.’
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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