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मृणाल सेन की 1959 में एक फिल्म रिलीज हुई, जिसे बैन का सामना करना पड़ा था. मगर तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हस्तक्षेप के बाद इसे रिलीज की अनुमति मिली. फिल्म 1930 के दौर के सामाज की कड़वी सच्चाई की बयां करती है, जिसे संपन्न तबका कभी स्वीकार नहीं कर पाया. इस बंगाली फिल्म का नाम है – ‘नील आकाशेर नीचे’. फिल्म मशहूर साहित्यकार की लघु कथा ‘चीनी फेरीवाला’ पर आधारित है.
फिल्म की कहानी से खास लोगों को आपत्ति थी. (फोटो साभार: IMDb)
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की कई फिल्मों को अलग-अलग दौर में चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कुछ फिल्मों पर खास समुदायों ने आपत्ति जताई, तो किसी के कॉन्टेंट से प्रशासन को दिक्कत हुई. नतीजतन, उन्हें बैन का सामना करना पड़ा. अगर हम आजाद भारत की सबसे पहले बैन होने वाली फिल्म की बात करें, तो मृणाल सेन की फिल्म ‘नील आकाशेर नीचे’ का ध्यान आता है, जो 1959 में रिलीज हुई थी.
ब्रिटिश राज के समय 1930 के दशक के भारत पर बनी ‘नील आकाशेर नीचे’ एक ब्लैक-एंड-व्हाइट बंगाली फिल्म है. इसे रिलीज नहीं होने दिया गया क्योंकि इसमें ऐसे भारत को दिखाया गया था, जहां अमीर और सामाजिक रूप से संपन्न लोग एक ही छत के नीचे रहने के बावजूद कमजोर तबके के लोगों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं रखते थे. ‘नील आकाशेर नीचे’ के जरिये मृणाल सेन ने आजादी की लड़ाई की कहानी बताई है, जिसमें भारतीयों के बीच सामाजिक-आर्थिक असमानता भी जाहिर हुई है.
प्रधानमंत्री से की शिकायत
फिल्म की कहानी एक शादीशुदा महिला और एक सड़क पर सामान बेचने वाले शख्स के बीच के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है. फिल्म की कहानी से तमाम लोगों को आपत्ति हुई. इसे बहुत ज्यादा राजनीतिक पहलुओं की वजह से बैन कर दिया गया था. यह फिल्म हिंदी साहित्यकार महादेवी वर्मा की लघु कथा ‘चीनी फेरीवाला’ पर आधारित है. जब हेमंत मुखोपाध्याय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से शिकायत की, तो उन्होंने न केवल तुरंत बैन हटाने का आदेश दिया, बल्कि उनके साथ फिल्म भी देखी.
फिल्म में दिखाई गई गरीब चीनी नागरिक की कहानी
फिल्म में वांग लू नाम के एक गरीब चीनी फेरीवाले की कहानी दिखाई गई है, जो 1930 के दशक के उथल-पुथल भरे समय में कलकत्ता की सड़कों पर अपना सामान – चीनी सिल्क-बेचता है. वह दौर भारत और चीन, दोनों के लिए बहुत मुश्किल समय था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन न केवल घोर गरीबी से जूझ रहा था, बल्कि जापान के क्रूर हमलों का भी सामना कर रहा था. उस समय, कई चीनी मजदूर काम की तलाश में अपना देश छोड़कर चले गए थे और उनमें से कई कलकत्ता आए थे.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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