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Murali sreeshankar wins silver medal CWG 2026: मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लॉन्ग जंप इवेंट में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया. 2024 की गंभीर चोट के कारण पेरिस ओलंपिक से बाहर रहने के बाद, यह उनकी अब तक की सबसे शानदार वापसी है. यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका लगातार दूसरा मेडल है, जिससे भारत की पदक तालिका 13 हो गई है.
मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में जीता सिल्वर मेडल.
नई दिल्ली. ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सातवां दिन भारत के लिए ऐतिहासिक और बेहद भावनात्मक पलों से भरा रहा. एक तरफ जहां मुक्केबाजी रिंग में भारतीय मुक्केबाजों ने एक के बाद एक कई पदक सुनिश्चित किए, वहीं एथलेटिक्स ट्रैक पर देश के स्टार एथलीट मुरली श्रीशंकर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली चैंपियन वही है जो मुश्किलों से हार न माने. मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद (लॉन्ग जंप) स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8.09 मीटर की छलांग लगाई और भारत की झोली में सिल्वर मेडल डाल दिया. इस पदक के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की आधिकारिक पदक तालिका 13 तक पहुंच गई है.
मुरली श्रीशंकर (Murali Sreeshankar) की यह जीत केवल एक पदक की कहानी नहीं है, बल्कि यह उनके अटूट हौसले, कड़े संघर्ष और जुझारूपन की मिसाल है. साल 2024 में एक गंभीर और करियर-खतरे में डालने वाली चोट के कारण वे पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए थे. उस कठिन दौर से उबरकर वापसी करना किसी भी एथलीट के लिए आसान नहीं होता, लेकिन श्रीशंकर ने हिम्मत नहीं हारी. रिहैब और कड़ी मेहनत के बाद वापसी करते हुए उन्होंने इस सीजन का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखा और अपने करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मेडल जीता.
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में श्रीशंकर का यह लगातार दूसरा पदक है. इससे पहले 2022 के पिछले संस्करण में भी उन्होंने भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता था. इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जमायका के स्टार एथलीट ताजे गेल (Tajay Gayle) ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर अपने नाम किया, जबकि मेजबान स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी (Stephen Mackenzie) ने 8.08 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता. श्रीशंकर महज 0.06 मीटर से गोल्ड मेडल से चूके, लेकिन उनकी यह रजत पदक वाली छलांग हर भारतीय के लिए स्वर्ण से कम नहीं है.
बॉक्सिंग रिंग में भारत का ऐतिहासिक धमाका
दिन की शुरुआत ही भारतीय प्रशंसकों के लिए जबर्दस्त खबरों के साथ हुई थी. लंबी कूद में श्रीशंकर के पदक जीतने से ठीक पहले, भारतीय मुक्केबाजी दल ने रिंग के अंदर एक नया इतिहास रच दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स के सातवें दिन भारतीय मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए 10 पदक पक्के कर लिए. यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में किसी भी एकल संस्करण में भारतीय मुक्केबाजी का अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ और सर्वकालिक रिकॉर्ड है. रिंग में अपनी मुक्केबाजी का लोहा मनवाते हुए छह प्रमुख मुक्केबाजों ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और पदक पक्के किए.
अंकुश यादव ने अपने आक्रामक खेल से प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ा. साक्षी चौधरी ने रिंग में अपनी चपलता का प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की. अरुंधति चौधरी ने तकनीकी रूप से मजबूत खेल दिखाते हुए बाउट अपने नाम की. सचिन सिवाच ने अपने सटीक पंचों से मुकाबला जीता. नरेंद्र बेरवाल ने हैवीवेट वर्ग में अपना दबदबा बनाए रखा. जैस्मिन लम्बोरिया ने शानदार रणनीति के साथ जीत दर्ज कर भारत के पदकों की संख्या में इजाफा किया. इन सभी मुक्केबाजों की जीत ने यह साफ कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी का स्तर वैश्विक मंच पर अब एक नई ऊंचाइयों को छू रहा है.
उम्मीदों का नया सवेरा
ग्लासगो 2026 में भारत का यह प्रदर्शन न केवल देश का मान बढ़ा रहा है, बल्कि आने वाले दिनों के लिए नई उम्मीदें भी जगा रहा है. एक तरफ जहां बॉक्सिंग रिंग से 10 पदक पक्के हो चुके हैं और उनके रंग (गोल्ड, सिल्वर या ब्रॉन्ज) तय होना बाकी है, वहीं दूसरी तरफ एथलेटिक्स में श्रीशंकर की इस रजत पदक वाली सफलता ने पूरी भारतीय टीम में नया जोश भर दिया है. मुसीबतों को पीछे छोड़ते हुए जब कोई खिलाड़ी पोडियम पर तिरंगा लहराता है, तो वह देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाता है. श्रीशंकर की चोट से उबरकर पोडियम तक की यह यात्रा और मुक्केबाजों का रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन ग्लासगो खेलों में भारत के स्वर्णिम सफर की गवाही दे रहा है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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