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Asian Games 2026: तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वालीं वित्या रामराज ने जापान में जारी एशियन गेम्स 2026 में एक नहीं बल्कि दो-दो मेडल अपने नाम किए. वित्या की सफलता कड़े संघर्षों के रास्ते से होकर गुजरती है क्योंकि उनके पिता ट्रक ड्राइवर थे. परिवार में हमेशा सुख-सुविधाओं का अभाव होता, लेकिन वित्या और उनकी जुड़वी बहन नित्या दोनों ने अपने मेहनत के दम पर मां-बाप का नाम रौशन कर दिया.
वित्या रामराज (दाएं) ने और पीटी उषा (बाएं) का चार दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया
आईची-नागोया: तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वालीं वित्या के लिए एशियन गेम्स 2026 में दो-दो मेडल जीतना इतना आसान नहीं थी. ट्रक ड्राइवर पिता की बेटी वित्या ने बचपन में संघर्ष के दिन देखे. मगर गरीबी उन्हें डिगा नहीं पाई. वित्या की जुड़वा बहन नित्या भी मशहूर एथलीट हैं और मां हाउस वाइफ हैं. इस उभरती धाविका ने महान भारतीय रेसर पीटी उषा का चार दशक पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया.
गरीबी के दिन गुजरे अब रेलवे में ऑफिसर हैं वित्या
वित्या रामराज ने इतनी शिद्दत से ट्रैक एंड फील्ड पर पसीना बहाया कि उनका और उनके परिवार का संघर्ष अब फल दे रहा है. वित्या को स्पोर्ट्स कोटे से इंडियन रेलवे में नौकरी मिल गईं. आपको जानकर खुशी होगी कि वित्या रामराज साल 2017 तक 100 मीटर और 200 मीटर स्प्रिंट इवेंट्स में दौड़ती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने 400 मीटर हर्डल्स पर फोकस करना शुरू किया और आज नतीजा देश के सामने है.
पीटी उषा का 42 साल पुराना रिकॉर्ड स्वाहा
वित्या रामराज ने 54.75 सेकेंड के अपने सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ पीटी उषा के 1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में बनाए 55.42 सेकेंड के नेशनल रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा. उषा वर्तमान में भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष हैं और एशियाई खेलों के लिए यहां मौजूद हैं.
Congratulations Vithya!!
Records are meant to be broken & there is no greater reward for an athlete than to see the next generation go beyond the boundaries we once set. Vithya Ramraj breaking my 43-year-old national record in the 400m hurdles is an incredibly special moment. pic.twitter.com/zkmgDjvMfY

