नई दिल्ली. जयपुर के एक शांत कमरे में बिस्तर पर लेटे 22 साल के यशवीर सिंह की सांसें अभी भी भारी थीं. अपने पिता और कोच राय सिंह के साथ मैदान पर कड़ा और थका देने वाला ट्रेनिंग सेशन पूरा करने के बाद उनका शरीर आराम मांग रहा था. चारों तरफ एक सुकून भरी खामोशी थी, जो अचानक उनके फोन की बजती घंटी से टूट गई. यशवीर ने स्क्रीन देखी तो उस पर एक ऐसा नाम चमक रहा था जिसने भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम इबारत लिखी है. ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा.
यशवीर सिंह (Yashvir Singh) को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि देश का सबसे बड़ा एथलीट इस वक्त उन्हें फोन क्यों कर रहा है. बिना किसी खास उम्मीद के उन्होंने फोन उठाया और कानों से लगाया. उन्हें मालूम नहीं था कि यह चंद मिनटों की बातचीत उनके खेल जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित होने वाली है. फोन की दूसरी तरफ से आई आवाज ने उनके लिए देश के सबसे बड़े मंचों में से एक ‘एशियाई खेल 2026’ का दरवाजा खोल दिया था.
चोट और वो अप्रत्याशित फोन कॉल
दरअसल, ऐची-नागोया एशियाई खेलों से ठीक पहले नीरज चोपड़ा एंकल लिगामेंट (टखने) की चोट का शिकार हो गए थे. एक चैंपियन एथलीट का दिल कितना भी मजबूत क्यों न हो, चोट के आगे कभी-कभी ठहरना पड़ता है. नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) को एशियाई खेलों से हटना पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद पीछे हटते हुए भारत की पदक की उम्मीदों की मशाल यशवीर के हाथों में सौंपने का फैसला किया. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक फोन पर नीरज ने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा, ‘भाई, मुझे चोट लग गई है. तुम फेडरेशन से आगे बात करो ताकि मेरी जगह तुम्हारे नाम पर विचार किया जा सके.’
टीम में मिला बुलावा
यशवीर के लिए यह किसी सपने जैसा था. उन्होंने बाद में इस पल को याद करते हुए बताया कि जब नीरज भाई का फोन आया, तब वे घर पर आराम कर रहे थे. नीरज के उस एक संदेश के बाद भारतीय एथलेटिक्स महासंघ में प्रक्रिया शुरू हुई और एशियाई खेलों की टीम में यशवीर सिंह का नाम शामिल कर लिया गया.
मेहनत और हालिया उपलब्धियां
भले ही यह बुलावा अनपेक्षित तरीके से आया हो, लेकिन यशवीर को यह मौका किस्मत से मुफ्त में नहीं मिला था. इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत, पसीना और हालिया शानदार प्रदर्शन था. ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में यशवीर ने देश का नाम रोशन करते हुए कांस्य पदक जीता था. उस मुकाबले में उन्होंने 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया था. दिलचस्प बात यह है कि उसी इवेंट में नीरज चोपड़ा दूसरे स्थान पर रहे थे.
‘आज तो आर या पार’
ग्लासगो की उस शाम का मुकाबला भी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. अंतिम थ्रो से पहले यशवीर पदक की दौड़ में पीछे चल रहे थे. दबाव बहुत ज्यादा था और उनके पास सिर्फ एक मौका बचा था. थ्रो करने से पहले उन्होंने नीरज चोपड़ा से बात की. नीरज ने उनके अंदर जो आग जलाई, उसने यशवीर को पूरी तरह बदल दिया. अपने मन ही मन में यशवीर ने कहा, ‘आज तो आर या पार.’
कांस्य पदक की ऐतिहासिक जीत
इसके बाद उन्होंने पूरी ताकत और सही तकनीक के साथ भाला हवा में लहराया. जब भाला जाकर 85.41 मीटर की दूरी पर गिरा, तो न सिर्फ उनका व्यक्तिगत रिकॉर्ड टूटा, बल्कि ग्लासगो का मैदान भारत के कांस्य पदक के जश्न से गूंज उठा.
नीरज चोपड़ा का गुरुमंत्र
टीम में चयन की आधिकारिक मुहर लगने के बाद यशवीर ने एक बार फिर नीरज चोपड़ा से बात की. ओलंपिक पदक विजेता ने एक सीनियर खिलाड़ी और बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए उन्हें प्रेरित किया. नीरज ने यशवीर से कहा, ‘तुमने राष्ट्रमंडल खेलों में बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया था. अब एशियाई खेलों में भी उसी लय को बरकरार रखने की कोशिश करो. वहां जाकर अपना सौ प्रतिशत दो और देश के लिए पदक जीतने का प्रयास करो.’
यशवीर ने एशियन गेम्स में सिल्वर और रोहित ने ब्रॉन्ज मेडल जीता
नीरज चोपड़ा की गैरमौजदूगी में भारत ने एशियन गेम्स 2026 में दो पदक जीते. यशवीर सिंह और रोहित यादव ने क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया. हरियाणा के 24 वर्षीय यशवीर ने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 85.72 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए हमवतन रोहित यादव को पीछे छोड़कर रजत पदक अपने नाम किया. उत्तर प्रदेश के 25 वर्षीय रोहित ने 84.35 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर कांस्य पदक जीता.

