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Harita Bhadra Bronze In Thrilling 0.01-Second Photo Finish: जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों में भारतीय धाविका हरिता भद्रा ने महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है. बेहद रोमांचक रहे इस मुकाबले में हरिता ने जापानी धाविका अबिगेरुफुका इडो को महज 0.01 सेकंड के मामूली अंतर से पछाड़कर ‘फोटो-फिनिश’ में जीत दर्ज की. हरिता ने यह रेस 23.20 सेकंड में पूरी की. यह उनके करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय पोडियम फिनिश है. इस अहम जीत के साथ मौजूदा खेलों में भारत के एथलेटिक्स पदकों की कुल संख्या नौ हो गई है.
हरिता भद्रा ने एथलेटिक्स में दिलाया नौवां मेडल.
नई दिल्ली. एशियाई खेलों में रविवार का दिन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव लेकर आया. जापान के आइची-नागोया में चल रहे इन प्रतिष्ठित खेलों में भारत की उभरती हुई स्टार धाविका हरिता भद्रा ने महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और एक शानदार कांस्य पदक पर कब्जा जमा लिया. यह मुकाबला इतना करीबी और रोमांचक था कि विजेता का फैसला करने के लिए तकनीक का सहारा लेना पड़ा. इसे ट्रैक एंड फील्ड की भाषा में ‘फोटो-फिनिश’ कहा जाता है, जिसने स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों की सांसें रोक दी थीं.
रेस खत्म होने के बाद जब स्क्रीन पर नतीजे फ्लैश हुए, तो भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई. हरिता भद्रा (Harita Bhadra) ने 23.20 सेकंड का समय निकालते हुए तीसरा स्थान हासिल किया. उन्होंने जापान की स्थानीय दावेदार अबिगेरुफुका इडो को महज 0.01 सेकंड के दिल थाम लेने वाले अंतर से पछाड़ा था. इडो ने 23.21 सेकंड का समय लिया, लेकिन हरिता का वह आखिरी डाइव उन्हें पोडियम तक ले जाने के लिए काफी था. इस रेस का स्वर्ण पदक इंडोनेशिया की दिग्गज धाविका शांति परेरा के नाम रहा, जिन्होंने 22.78 सेकंड का समय निकाला. वहीं, चीन की 100 मीटर चैंपियन युजी चेन ने 22.93 सेकंड के साथ रजत पदक पर अपना अधिकार जमाया.
रेस के अंतिम 50 मीटर में जबरदस्त मानसिक और शारीरिक दबाव था. हरिता के पास किसी भी तरह की चूक या गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची थी, क्योंकि घरेलू दर्शकों के समर्थन से दौड़ रहीं इडो उन्हें फिनिश लाइन तक कड़ी टक्कर दे रही थीं. यह कांस्य पदक मौजूदा एशियाई खेलों में भारत का नौवां एथलेटिक्स पदक है. इस शानदार जीत के साथ ही ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भारत की कुल पदक संख्या चार रजत और पांच कांस्य तक पहुंच गई है. हालांकि, आइची-नागोया के ट्रैक पर भारतीय एथलेटिक्स दल को अभी भी अपने पहले स्वर्ण पदक की बेसब्री से तलाश है, लेकिन हरिता जैसे युवा एथलीटों के निरंतर दमदार प्रदर्शन ने पदक तालिका में भारत की स्थिति को लगातार मजबूती प्रदान की है.
करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मुकाम
हरिता भद्रा के व्यक्तिगत करियर को देखा जाए तो यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है. यह उनके करियर का पहला अंतरराष्ट्रीय पोडियम फिनिश है, जिसने उनके 2026 के सीजन को एक ‘ब्रेकआउट’ वर्ष में तब्दील कर दिया है. महाराष्ट्र राज्य से ताल्लुक रखने वाली हरिता की सफलता की कहानी केवल पसीने और मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक उच्च शिक्षित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाली एथलीट हैं. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम की जानी-मानी लॉफबोरो यूनिवर्सिटी से स्पोर्ट्स साइंस, कोचिंग और फिजिकल एजुकेशन में अपनी बीएससी की डिग्री पूरी की है.
विदेशों में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपने खेल को ही अपना करियर बनाने का दृढ़ संकल्प लिया. वर्तमान समय में वह नवी मुंबई में स्थित जियो इंस्टीट्यूट में अत्याधुनिक सुविधाओं के बीच अपनी ट्रेनिंग कर रही हैं, जहां वैज्ञानिक तरीकों ने उनके प्राकृतिक हुनर को तराशने में अहम भूमिका निभाई है.
रफ्तार और रिकॉर्ड का शानदार साल
इस साल ट्रैक पर हरिता का उदय सचमुच असाधारण और प्रेरणादायक रहा है. अंतरराष्ट्रीय मंच पर छाने से पहले उन्होंने घरेलू स्तर पर अपने प्रदर्शन की अमिट छाप छोड़ी. उन्होंने 23.14 सेकंड के बेहतरीन समय के साथ नेशनल इंटर-स्टेट 200 मीटर का खिताब अपने नाम किया था, जो कि एशियाई खेलों के कठिन क्वालीफाइंग मार्क से भी काफी बेहतर था. इसके बाद उन्होंने 7.32 सेकंड में नेशनल इंडोर 60 मीटर का खिताब भी बड़ी आसानी से जीता. लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा पल सितंबर में हुई इंडियन एथलेटिक्स फाइनल सीरीज के दौरान आया. इस प्रतियोगिता में उन्होंने 100 मीटर की तेज तर्रार दौड़ को महज 11.22 सेकंड में पूरा करके तहलका मचा दिया.
इस हैरतअंगेज रिकॉर्ड के साथ ही वह इस दूरी को तय करने वाली भारत के खेल इतिहास की दूसरी सबसे तेज महिला बन गईं. उनकी यह रफ्तार, तकनीक और निरंतरता ही थी जिसने अंततः उन्हें एशियाई खेलों के इस भव्य मंच पर पदक का हकदार बनाया.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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