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Sarvesh Kushare commonwealth games: सर्वेश कुशारे शानदार फॉर्म के साथ फाइनल में उतरे थे. उन्होंने एक महीने पहले ही राष्ट्रीय इंटरस्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 2.31 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था. ग्लास्गो में भी उन्होंने उसी लय को बरकरार रखा और शुरुआती सभी ऊंचाइयों को आसानी से पार करते हुए पदक की दावेदारी मजबूत कर दी.
सर्वेश कुशारे ने लॉन्ग जंप में जीता सिल्वर.
नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार हाई जंपर सर्वेश कुशारे ने इतिहास रच दिया. 31 वर्षीय एथलीट ने पुरुष हाई जंप स्पर्धा में 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया और इस इवेंट में सिल्वर जीतने वाले पहले भारतीय बन गए. स्वर्ण पदक से वह बेहद मामूली अंतर से चूक गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया.
स्वर्ण से चूके, लेकिन बना दिया इतिहास
फाइनल में सर्वेश कुशारे और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने 2.25 मीटर की ऊंचाई पार की. इसके बाद दोनों 2.28 मीटर पार नहीं कर सके. ऐसे में विजेता का फैसला काउंटबैक नियम से हुआ. बेकफोर्ड ने 2.25 मीटर पहली कोशिश में पार किया था, जबकि सर्वेश को इस ऊंचाई के लिए तीन प्रयास करने पड़े. इसी वजह से जमैका के एथलीट को स्वर्ण और सर्वेश को रजत पदक मिला. इंग्लैंड के जैक किमानी ने 2.20 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता.
तेजस्विन के ब्रॉन्ज से आगे निकले सर्वेश
इससे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में हाई जंप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तेजस्विन शंकर के नाम था, जिन्होंने 2022 बर्मिंघम गेम्स में कांस्य पदक जीता था. ग्लास्गो में सर्वेश ने रजत जीतकर उस उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया और इस स्पर्धा में भारत के सबसे सफल खिलाड़ी बन गए.
आदर्श राम ने दिखाया दम, तेजस्विन ने नाम लिया वापस
भारत के आदर्श राम ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 2.15 मीटर की छलांग लगाई और प्रतियोगिता में पांचवें स्थान पर रहे. वहीं, तेजस्विन शंकर ने 2.05 मीटर पर पहला प्रयास असफल रहने के बाद मुकाबले से नाम वापस ले लिया. यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया, क्योंकि वह गुरुवार से शुरू होने वाली डेकाथलॉन स्पर्धा में भी हिस्सा लेने वाले हैं.
किसान के बेटे का सुनहरा सफर
महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवगांव के रहने वाले सर्वेश कुशारे का सफर संघर्षों से भरा रहा है. उनके पिता प्याज की खेती करते थे और बचपन में उन्होंने खेतों में ही सर्वेश के अभ्यास के लिए मकई के छिलकों, कपास और कृषि अपशिष्ट से अस्थायी लैंडिंग पिट तैयार किया था. सीमित संसाधनों के बावजूद सर्वेश ने मेहनत नहीं छोड़ी और आज उसी संघर्ष का नतीजा कॉमनवेल्थ गेम्स के ऐतिहासिक रजत पदक के रूप में सामने आया.
डायमंड लीग में भी रचा था इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भी सर्वेश शानदार फॉर्म में थे. इसी महीने उन्होंने मोनाको डायमंड लीग में 2.26 मीटर की छलांग लगाकर तीसरा स्थान हासिल किया था और डायमंड लीग में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जंपर बने थे. वह नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर और विकास गौड़ा के बाद डायमंड लीग में शीर्ष-3 में जगह बनाने वाले चौथे भारतीय एथलीट बने.
लगातार बेहतर होता गया प्रदर्शन
सर्वेश ने 2014 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता खेली. 2018 में उन्होंने पहला राष्ट्रीय स्वर्ण जीता और फिर हर साल अपनी ऊंचाई में सुधार करते रहे. 2022 में उन्होंने 2.27 मीटर की छलांग लगाई और 2026 में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में 2.31 मीटर का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. इसके अलावा, वह विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पुरुष हाई जंप फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय भी बने.
भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
ग्लास्गो में मिला यह रजत पदक सिर्फ सर्वेश कुशारे की व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है. जिस खिलाड़ी ने खेतों में बने अस्थायी गड्ढों पर अभ्यास शुरू किया था, उसने आज कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर इतिहास रचकर देश का नाम रोशन कर दिया.
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शिवम उपाध्याय उभरते हुए खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट विशेषज्ञता का मुख्य क्षेत्र है, लेकिन इसके अलावा हॉकी और बैडमिं…
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