नई दिल्ली. भारत के लिए रविवार का दिन एशियन गेम्स में उपलब्धियों और निराशा का मिला-जुला मिश्रण साबित हुआ. भारतीय एथलीटों ने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए देश की झोली में कुल सात पदक डाले. इस सफल दिन का मुख्य आकर्षण एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड रहा, जहां से भारत को पांच पदक हासिल हुए, जबकि स्क्वाश खिलाड़ियों ने दो ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम किए.
रविवार को भारतीय दल का सबसे दमदार प्रदर्शन एथलेटिक्स ट्रैक पर देखने को मिला. स्टार एथलीट पारुल चौधरी ने महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ स्पर्धा में इतिहास रच दिया. पारुल ने 9:08.67 सेकंड का समय निकालकर न केवल अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सुधारा, बल्कि एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. यह एशियाई खेलों की स्टीपलचेज़ स्पर्धा में पारुल का लगातार दूसरा पदक है, इससे पहले उन्होंने 2022 हांगझाऊ खेलों में रजत पदक जीता था. इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक बहरीन की विनफ्रेड यावी (9:04.36) और रजत पदक कजाकिस्तान की नोराह जेरुतो तानुई (9:06.82) के नाम रहा. इसी मुकाबले में भारत की अंकिता ने भी 9:19.24 सेकंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ चौथा स्थान हासिल किया.
लंबी कूद में सोजन का रजत पदक
महिलाओं की लंबी कूद में एनसी सोजन स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचकर चूक गईं. पांचवें दौर में एनसी ने 6.53 मीटर की छलांग लगाकर शीर्ष स्थान हासिल कर लिया था, लेकिन अंतिम प्रयास में चीन की हुआंग यिंगयिंग ने 6.55 मीटर की कूद लगाकर महज दो सेंटीमीटर के अंतर से स्वर्ण पदक छीन लिया और एनसी को रजत पदक से संतोष करना पड़ा. इसी स्पर्धा में भारत की शैली सिंह अंतिम दौर के ड्रामा का शिकार हुईं; उनकी 6.42 मीटर की छलांग तीसरे स्थान पर थी, लेकिन चीन की मेंगयी तान ने अपने आखिरी प्रयास में 6.46 मीटर कूदकर शैली से कांस्य पदक छीन लिया.
ऊंची कूद में सर्वेश का कमाल
पुरुषों की ऊंची कूद में सर्वेश कुशारे ने कड़े मुकाबले के बाद भारत के लिए रजत पदक जीता. सर्वेश ने अपने दूसरे प्रयास में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार की, लेकिन चीनी ताइपे के चाओ ह्सुआन-फु ने अपने पहले ही प्रयास में यह ऊंचाई हासिल कर ली थी, जिससे उन्हें स्वर्ण मिला.
डेकाथलन और स्प्रिंट में दो कांस्य
एथलेटिक्स में भारत का चौथा पदक पुरुषों के डेकाथलन में आया, जहां तेजास्विन शंकर ने दो दिनों की कठिन स्पर्धा के बाद कांस्य पदक जीता. तेजास्विन ने अंतिम 1500 मीटर रेस को 4:33.09 में जीतकर कुल 7,934 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया. इसमें जापान के युमा मारुयामा ने 8,123 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता. वहीं, ट्रैक पर महिलाओं की 200 मीटर दौड़ में हरिता भद्रा ने 23.20 सेकंड का समय निकालकर जापान की इडो अबिगेइरुफुका को 0.01 सेकंड के मामूली अंतर से पछाड़ते हुए कांस्य पदक हासिल किया.
स्क्वॉश में अनाहत और अभय का ऐतिहासिक रजत
स्क्वाश के मैदान में भारत का एकल स्वर्ण पदक का इंतजार तो बरकरार रहा, लेकिन अनाहत सिंह और अभय सिंह ने ऐतिहासिक रजत पदक जीतकर नया इतिहास रचा. 18 वर्षीय अनाहत सिंह एशियाई खेलों की स्क्वाश एकल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. फाइनल में उन्हें विश्व की पांचवें नंबर की खिलाड़ी मलेशिया की सिवसंगारी सुब्रमण्यम के हाथों 11-4, 11-4, 11-7 से हार का सामना करना पड़ा. पुरुषों के फाइनल में विश्व नंबर 17 मलेशिया के एनजी ईन यो ने अभय सिंह को 11-9, 11-5, 11-5 से हराकर स्वर्ण पदक जीता. मलेशिया ने स्क्वाश एकल के दोनों स्वर्ण अपने नाम किए.
बॉक्सिंग रिंग से तीन पदक पक्के
मुक्केबाजी रिंग से भारत के लिए बहुत अच्छी खबर आई, जहां तीन मुक्केबाजों ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्के किए. महिलाओं के 65 किग्रा वर्ग में परवीन हुड्डा ने उज्बेकिस्तान की नवबाखोर खमीदोवा को 5-0 से हराकर अंतिम-4 में जगह बनाई. पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग में अंकुश पंगहाल ने तजाकिस्तान के नेकरुज सलीमोव को 5-0 से मात देकर अपना पहला एशियाई खेल पदक पक्का किया. पुरुषों के 90+ किग्रा वर्ग में नरेंद्र बेरवाल ने थाईलैंड के अदथापोंग सेंगतेप को दो मिनट से भी कम समय में रेफरी स्टॉप्ड कॉन्टेस्ट (RSC) के जरिए हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया. हालांकि, सचिन सिवाच को 60 किग्रा वर्ग में जापान के शुनसुके कितमोतो से 0-5 से हार का सामना करना पड़ा.
बैडमिंटन में भारत को मिली निराशा
दिन की सबसे बड़ी निराशा बैडमिंटन कोर्ट से आई, जहां भारतीय चुनौती पूरी तरह समाप्त हो गई. दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु, तीसरी बार मैदान में उतरते हुए, टोक्यो ओलंपिक चैंपियन चेन यु फेई से 21-11, 18-21, 10-21 से हार गईं. इसके अलावा उन्नति हुड्डा को अकाने यामागुची ने हराया, जबकि तनीषा क्रास्टो और ध्रुव कपिला की जोड़ी तथा तृषा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी भी अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले हारकर बाहर हो गई.

