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Shooter Maheshwari Chauhan Success Story: जालोर के सियाणा गांव की बेटी महेश्वरी चौहान ने अपनी मेहनत और पारिवारिक सहयोग के दम पर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में खास पहचान बनाई है. 2026 एशियन गेम्स में भारत के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर उन्होंने अपने गांव और राजस्थान का नाम रोशन किया. महेश्वरी की निशानेबाजी की शुरुआत परिवार के खेल माहौल में हुई. उनके दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह नेशनल स्तर के निशानेबाज रहे हैं. पिता ने बेटी की ट्रेनिंग के लिए अपने खेत में करीब 18 से 20 बीघा जमीन पर शूटिंग रेंज तैयार करवाई. महेश्वरी ने यहीं लगातार अभ्यास करते हुए अपनी तकनीक को निखारा. इससे पहले वह पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं और दोहा में ISSF शॉटगन ओलंपिक क्वालीफिकेशन चैंपियनशिप में स्कीट शूटिंग का सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं.
जालोर के सियाणा गांव की रहने वाली इंटरनेशनल शूटर महेश्वरी चौहान ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता है. भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए महेश्वरी ने शूटिंग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. उनकी इस उपलब्धि से जालोर समेत पूरे राजस्थान में खुशी का माहौल है. महेश्वरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई है. एशियन गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने देश, प्रदेश और अपने गांव सियाणा का नाम रोशन किया है.
महेश्वरी चौहान इससे पहले पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए भी क्वालीफाई कर चुकी हैं. दोहा में आयोजित ISSF शॉटगन ओलंपिक क्वालीफिकेशन चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की स्कीट शूटिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता था. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पेरिस ओलंपिक का टिकट हासिल किया. अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर महेश्वरी ने भारतीय शूटिंग में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल उनकी उपलब्धियों में एक और अहम अध्याय जुड़ गया है.
महेश्वरी चौहान को बचपन से ही शूटिंग का शौक था. उनके परिवार में निशानेबाजी का माहौल पहले से रहा है. उनके दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह भी नेशनल स्तर तक निशानेबाजी में खेल चुके हैं. परिवार की इसी खेल पृष्ठभूमि का असर महेश्वरी पर भी पड़ा. उन्होंने कम उम्र में ही निशानेबाजी को अपना लक्ष्य बना लिया और नियमित अभ्यास शुरू कर दिया. मेहनत और लगातार तैयारी के दम पर महेश्वरी ने शूटिंग में अपनी अलग पहचान बनाई. आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और उनकी उपलब्धियां युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हैं.
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महेश्वरी चौहान के शूटिंग के सपने को पूरा करने में उनके पिता प्रदीप सिंह ने भी पूरा साथ दिया. बेटी को बेहतर अभ्यास की सुविधा देने के लिए उन्होंने अपने खेत में करीब 18 से 20 बीघा जमीन पर शूटिंग रेंज तैयार करवाई. इसी रेंज में महेश्वरी ने घंटों अभ्यास किया और अपनी तकनीक को लगातार निखारा. परिवार के सहयोग और महेश्वरी की कड़ी मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. आज उनकी सफलता परिवार के इसी समर्पण का नतीजा है.
महेश्वरी चौहान के लगातार अभ्यास, परिवार के सहयोग और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है. उन्होंने हर स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की और भारत का नाम रोशन किया. अब 2026 एशियन गेम्स में भारत के लिए जीता गया ब्रॉन्ज मेडल उनके खेल सफर की एक और बड़ी उपलब्धि बन गया है. इस पदक के साथ महेश्वरी ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है.
