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Saina Nehwal reaction on Vaibhav Sooryavanshi: ओलंपिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल ने ‘न्यूज18 राइजिंग भारत इंडिया समिट’ में भारतीय खेल व्यवस्था पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि क्रिकेट की सफलता के पीछे उसका मजबूत ढांचा, विजिबिलिटी और शुरुआती समर्थन है. युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए साइना ने बताया कि अन्य खेलों में एथलीटों को सुविधाएं सफलता मिलने के बाद मिलती हैं. उन्होंने साई और खेल संघों से मार्केटिंग बढ़ाने और प्रतिभाओं को शुरुआती दौर में ही तराशने की अपील की.
साइना नेहवाल ने भारत में खेल व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल.
नई दिल्ली. ओलंपिक पदक जीतने वाली देश की पहली महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनने से लेकर विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने तक, साइना नेहवाल ने न सिर्फ इतिहास रचा, बल्कि भारत को बैडमिंटन की वैश्विक महाशक्ति बनाने में मुख्य भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी सफलताओं से देश में युवाओं की पूरी पीढ़ी को रैकेट थामने के लिए प्रेरित किया. लेकिन अनगिनत मेडल और उपलब्धि हासिल करने के बावजूद, साइना यह कभी नहीं भूलीं कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने कितना संघर्ष किया है. उन्हें अच्छी तरह याद है कि क्रिकेट के दीवाने इस देश में किसी अन्य खेल में एक नए सितारे को किन चुनौतियों और बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
‘न्यूज18 राइजिंग भारत इंडिया समिट (साउथ एडिशन)’ में बात करते हुए साइना नेहवाल (Saina Nehwal) ने इस बात पर खुलकर अपने विचार रखे कि आखिर क्रिकेट से इतर भारत में लगातार विश्वस्तरीय एथलीट क्यों नहीं निकल पाते. साइना के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण सही ढांचा, विजिबिलिटी और निवेश की कमी है. साइना का मानना है कि भारतीय खेल प्रेमी क्रिकेट को इसलिए इतना प्यार देते हैं क्योंकि उसके पास एक बेहद मजबूत सिस्टम है. उन्होंने कहा, ‘क्रिकेट हमारे देश में इतना लोकप्रिय इसलिए है क्योंकि उनके पास बहुत ही बेहतरीन ढांचा है और उनकी लीग्स का आयोजन बेहद शानदार तरीके से होता है. इसके अलावा, क्रिकेट मैचों को लगातार टीवी पर दिखाया जाता है.’
साइना ने इस बात पर जोर दिया कि अन्य खेलों को सही एक्सपोजर न मिलने के कारण नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कई तरह के खेल टूर्नामेंट्स आयोजित तो होते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ वही लोग देखते हैं जो उस खेल के जुनूनी प्रशंसक होते हैं. यही वजह है कि उन्होंने खेल संघों और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को सलाह दी कि उन्हें अन्य खेलों की मार्केटिंग और पब्लिसिटी का दायरा बढ़ाना चाहिए, ताकि वे भी क्रिकेट के स्तर तक पहुंच सकें.
‘सफलता के बाद नहीं, शुरुआत में मिले समर्थन’
नेहवाल ने युवा एथलीटों को मिलने वाले समर्थन और सुविधाओं में अंतर को भी उजागर किया. उन्होंने हाल ही में सुर्खियों में आए युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे क्रिकेट का इकोसिस्टम एक उभरते हुए खिलाड़ी को करियर के शुरुआती दिनों में ही विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध करा देता है. साइना ने कहा, ‘वैभव सूर्यवंशी को ही देख लीजिए. उन्हें करियर की शुरुआत में ही किस स्तर का बैकअप और संसाधन मिल रहे हैं. मुझे लगता है कि अन्य खेलों में हम इसी चीज में पीछे रह जाते हैं. जब मैं आगे बढ़ रही थी, तब मेरे पास न कोई फिजियो था, न ट्रेनर और न ही कोई अन्य सपोर्ट स्टाफ. मुझे अपना पहला फिजियो तब मिला जब मैं 19 साल की हो चुकी थी. तब जाकर मुझे समझ आया कि शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक पूरी प्रॉपर टीम डायटीशियन, फिजिशियन से लेकर मेंटल ट्रेनर तक की कितनी जरूरत होती है.’
बदलाव की जरूरत
साइना ने बेहद साफ शब्दों में खेल व्यवस्था की सबसे बड़ी कमी की ओर इशारा किया. आज स्थिति यह है कि खिलाड़ियों को तमाम सुविधाएं, प्रायोजक और संस्थागत समर्थन तब मिलता है, जब वे अपने दम पर बड़ी सफलता हासिल कर लेते हैं. साइना का मानना है कि इस सोच को पूरी तरह बदलने की जरूरत है. अगर भारत को हर खेल में लगातार चैंपियंस तैयार करने हैं, तो प्रतिभाओं को सफलता मिलने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती दौर में ही तराशना और उन्हें हर जरूरी सुविधा देना अनिवार्य होगा.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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