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Niharika KVS Under-17 Football Bronze Medal: कोटा के केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 की छात्रा निहारिका और उनकी टीम ने KVS राष्ट्रीय अंडर-17 गर्ल्स फुटबॉल प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. रोजाना 6 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग और पढ़ाई के बीच बेहतरीन संतुलन बनाकर निहारिका ने यह मुकाम हासिल किया. माता-पिता और कोच के प्रोत्साहन से मिली इस सफलता के बाद अब टीम का अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना है.
Kota: अगर हौसले बुलंद हों और इरादों में सच्चाई हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती. इस बात को सच साबित कर दिखाया है कोटा के केंद्रीय विद्यालय नंबर 1 की प्रतिभाशाली छात्रा निहारिका और उनकी फुटबॉल टीम ने. निहारिका ने अपनी टीम के साथ मिलकर केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की राष्ट्रीय अंडर-17 गर्ल्स फुटबॉल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) अपने नाम किया है. इस राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि के बाद जब लोकल 18 की टीम ने निहारिका से खास बातचीत की तो उन्होंने अपने इस सफर और मैदान की चुनौतियों को साझा किया.
निहारिका बताती हैं कि इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं था. टूर्नामेंट की शुरुआत से करीब दो-तीन महीने पहले से ही उनकी टीम ने मैदान में पसीना बहाना शुरू कर दिया था. रोजाना सुबह 4 घंटे का लंबा ट्रेनिंग सेशन होता था और शाम को 2 घंटे की विशेष प्रैक्टिस कराई जाती थी. दिन के 6 घंटे सिर्फ और सिर्फ फुटबॉल के नाम हुआ करते थे. खेल के दौरान चोटें लगना आम बात थी लेकिन टीम का जज्बा इतना मजबूत था कि खिलाड़ी तेजी से रिकवर होकर दोबारा मैदान में उतर जाती थीं.
पढ़ाई और खेल के बीच बनाया बेहतरीन संतुलन
एक एथलीट के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है अपनी पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना. निहारिका ने इस चुनौती को बहुत ही समझदारी से पार किया. सुबह का प्रैक्टिस सेशन खत्म करने के बाद वे थोड़ा आराम करती थीं और फिर दिन के समय स्कूल व कोचिंग जाकर पढ़ाई पर ध्यान देती थीं. शाम को फिर से प्रैक्टिस होती थी और रात को घर लौटकर दोबारा पढ़ाई में जुट जाती थीं. इस तरह उन्होंने खेल के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को भी पूरा समय दिया.
माता-पिता और कोच का मिला अटूट सहारा
अक्सर देखा जाता है कि बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने को लेकर समाज में कई तरह की झिझक होती है लेकिन निहारिका के मामले में ऐसा बिल्कुल नहीं था. उनके परिवार में पहले किसी का स्पोर्ट्स बैकग्राउंड नहीं रहा है फिर भी उनके माता-पिता ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया. इसके साथ ही निहारिका ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने स्कूल के खेल शिक्षकों और पीटीआई सर को दिया जिन्होंने दो साल पहले उनमें फुटबॉल का हुनर पहचाना था.
12 खिलाड़ियों का जबर्दस्त टीम वर्क और गोल्ड का संकल्प
निहारिका की 12 सदस्यीय टीम में कई खिलाड़ी ऐसी भी थीं जिन्हें शुरुआत में ज्यादा अनुभव नहीं था. लेकिन लगातार अभ्यास से सभी में जबर्दस्त तालमेल बैठ गया. निहारिका ने स्वीकार किया कि उनकी टीम का मुख्य लक्ष्य गोल्ड मेडल हासिल करना था लेकिन कुछ छोटी गलतियों के कारण वे गोल्ड से चूक गईं. हालांकि इस हार से निराश होने के बजाय पूरी टीम ने सबक लिया है और संकल्प किया है कि वे अगले सत्र में अपनी गलतियों को सुधारकर गोल्ड मेडल जीतकर ही लौटेंगी.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें






