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एशियन गेम्स 2026 में भारत को सॉफ्ट टेनिस प्रतियोगिता में पहली बार पदक मिला. पदल जीतने वाले खिलाड़ी जय मीणा है. जय ने कांस्य पदक अपने नाम किया. पदक जीतने के बाद जय ने अपनी शुरुआती जीवन के बारे बताते हुए कहा कि वह बचपन में इतने शाररती थे कि उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था. स्कूल से निकालने के बाद फिर जय मीणा की किस्मत पलटी.
सॉफ्ट टेनिस प्लेयर जय मीणा
नई दिल्ली: स्कूल के दिनों में प्रिंसिपल की मेज के नीचे पटाखा जलाने वाले शरारती बच्चे से लेकर एशियन गेम्स में सॉफ्ट टेनिस का पदक जीतने तक, जय मीणा का सफर किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं है. जय सॉफ्ट टेनिस में पदक जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बने हैं. 26 साल के जय को महज 10 साल की उम्र में देवास के एबेनेजर हायर सेकेंडरी स्कूल से उनकी बचपन की शरारतों के कारण निकाल दिया गया था. बुधवार को उन्होंने आइची-नागोया एशियाई खेलों में ऐतिहासिक कांस्य पदक अपने नाम किया. सेमीफाइनल में उन्हें जापान के स्थानीय दावेदार और बाद में चैंपियन बने ताकुया कुरोसाका से 2-4 से हार का सामना करना पड़ा.
सॉफ्ट टेनिस में दोनों सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है. जापान से शुरू हुआ यह रैकेट खेल पारंपरिक टेनिस जैसे कोर्ट पर खेला जाता है लेकिन इसमें करीब 31 ग्राम की काफी हल्की रबर गेंद और हल्के रैकेट इस्तेमाल होते हैं. नागोया से पीटीआई से बातचीत में जय ने कहा, ‘‘पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि सब कुछ मेरी किस्मत में लिखा था… अगर मुझे उस स्कूल से नहीं निकाला गया होता तो मैं पायनियर पब्लिक स्कूल में नहीं आ पाता, भारत के लिए नहीं खेल पाता और भारत के लिए पदक नहीं जीत पाता. शायद सब कुछ तय था.’’
प्रिंसिपल की मेज के नीचे जय ने जला दिया था पटाखा
जय के माता-पिता वकील रमेश्वर मीणा और संजना बचपन में उनकी शरारतों को लेकर लगातार चिंतित रहते थे. लेकिन मामला तब गंभीर हो गया जब स्कूल से उनके माता-पिता को फोन आया कि जय ने प्रधानाचार्य की मेज के नीचे पटाखा जला दिया है. जय ने याद करते हुए कहा, ‘‘मेरा परिवार बहुत नाराज था और उसके बाद कोई भी स्कूल मुझे दाखिला देने के लिए तैयार नहीं था.’’
ऐसे समय में पायनियर पब्लिक स्कूल और उसके खेल प्रशिक्षक सुदेश सांगते ने उनकी मदद की. सांगते अब राष्ट्रीय सॉफ्ट टेनिस कोच हैं. जय ने कहा, ‘‘उन्होंने मेरे पिता से कहा, ‘अगर आप बच्चे को घर पर नहीं रखना चाहते तो उसे यहां खेलने के लिए भेज दीजिए.’ बस शर्त यह थी कि मुझे खेल अकादमी में दाखिला लेना होगा. वहीं से मेरी यात्रा शुरू हुई.’’ जय भारतीय भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा के बड़े प्रशंसक हैं.
मेरे लिए ओलंपिक मेडल की तरह है ये ब्रॉन्ज-जय मीणा
पूर्व राष्ट्रीय स्तर के खो-खो खिलाड़ी सांगते ने स्कूल में सॉफ्ट टेनिस की शुरुआत की थी. उन्होंने इस बेचैन बच्चे में वह प्रतिभा देखी जिसे शायद उसके शिक्षक भी नहीं पहचान पाए थे. सांगते ने कहा, ‘‘वह बहुत शरारती था, हमेशा बेचैन रहता था और लगभग हर खेल में अच्छा था. इससे उसे फायदा हुआ क्योंकि सॉफ्ट टेनिस में काफी मूवमेंट और दौड़ की जरूरत होती है. इस खेल में ताकत, गति और काफी कौशल चाहिए. आपको पूरे कोर्ट को कवर करना होता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसमें एथलेटिक क्षमता, ऊर्जा और सीखने की इच्छा थी. हम करीब 10 साल से कड़ी मेहनत कर रहे हैं और आज उसने हमें वह नतीजा दिया जिसका हम इंतजार कर रहे थे.’’
जय ने कहा कि उनके लिए यह पदक ओलंपिक जैसा है. उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह ओलंपिक पदक जैसा है क्योंकि सॉफ्ट टेनिस ओलंपिक का हिस्सा नहीं है. एशियाई खेल एशिया के ओलंपिक जैसे हैं और हमारे खेल के सभी बड़े देश यहां मौजूद थे. उनके बीच पदक जीतना बहुत बड़ी उपलब्धि है. इसलिए मेरे और मेरे देश के लिए यह ओलंपिक पदक जैसा है.’’ जय को उम्मीद है कि कांस्य पदक इस खेल के लिए बड़ा रास्ता खोल सकता है और इसे अहमदाबाद में होने वाले 2030 राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया जा सकता है.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. वर्तमान में वह नेटवर्क 18 समूह के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हैं और हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में अपनी…
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