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Early Paddy Varieties For Eastern UP: धान की कटाई के बाद गेहूं की समय पर बुवाई किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगर धान की फसल देर से तैयार होती है तो गेहूं की बुवाई भी पिछड़ सकती है. ऐसे में किसान धान की ऐसी किस्मों का चुनाव कर सकते हैं, जिनकी अवधि अपेक्षाकृत कम या मध्यम हो और समय पर कटाई के बाद खेत गेहूं के लिए जल्दी तैयार किया जा सके. नरेंद्र धान-97, नरेंद्र-359, सांभा सब-1, एमटीयू-7029, एनडीआर-9436, एनडीआर-9930111 और पूजा सुगंध-4 जैसी किस्में अलग-अलग परिस्थितियों में विकल्प हो सकती हैं. हालांकि सही किस्म का चयन रोपाई की तारीख, पानी की उपलब्धता, खेत की स्थिति और स्थानीय कृषि सलाह के आधार पर करना जरूरी है.
नरेंद्र धान-97 पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल होने वाली किस्मों में शामिल है. यह अपेक्षाकृत कम अवधि वाली किस्म मानी जाती है, इसलिए यदि रोपाई समय से की जाए और खेत में पानी तथा खाद का प्रबंधन ठीक रहे तो धान अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हो सकता है. गेहूं के लिए खेत जल्दी खाली कराने के उद्देश्य से यह लंबी अवधि वाली किस्मों की तुलना में सुविधाजनक हो सकती है. हालांकि वास्तविक समय मौसम और रोपाई की तारीख पर निर्भर करेगा.
नरेंद्र-359 पूर्वी उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में जानी-पहचानी किस्म है. इसकी अवधि मध्यम मानी जाती है. समय पर रोपाई होने पर किसान धान की कटाई के बाद गेहूं की तैयारी कर सकता है, लेकिन देर से रोपाई करने पर गेहूं की बुवाई भी पीछे खिसक सकती है. इसलिए गेहूं को समय से बोना हो तो रोपाई की तारीख पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.
सांभा सब-1 ऐसी धान किस्मों में है जिसे जलभराव/बाढ़ जैसी परिस्थितियों के लिए उपयोगी माना गया है. ICAR की उत्तर प्रदेश सलाह में भी इसे प्रमुख किस्मों में रखा गया है. लेकिन अगर आपका मुख्य उद्देश्य ‘धान के बाद जल्दी गेहूं बोना है, तो केवल जलभराव सहनशीलता नहीं बल्कि इसकी वास्तविक पकने की अवधि और आपकी रोपाई की तारीख भी देखनी चाहिए.
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एमटीयू-7029 उत्तर प्रदेश में इस्तेमाल की जाने वाली लोकप्रिय धान किस्मों में है और ICAR ने इसे मध्यम अवधि वाली, अपेक्षाकृत न गिरने वाली किस्मों में शामिल किया है. इसलिए सामान्य परिस्थितियों में यह धान के बाद गेहूं लेने वाले फसल चक्र में उपयोगी हो सकती है. बहुत देर से रोपाई करने पर गेहूं की बुवाई देर से होगी, इसलिए समय पर रोपाई महत्वपूर्ण है.
एनडीआर-9436 को भी ICAR ने उत्तर प्रदेश में मध्यम अवधि और अपेक्षाकृत कम गिरने वाली धान किस्मों की सूची में रखा है. अगर खेत में पानी का अच्छा प्रबंधन हो और धान समय पर लगाया गया हो, तो कटाई के बाद गेहूं की तैयारी की जा सकती है। इसे चुनते समय अपने क्षेत्र के KVK की स्थानीय सिफारिश भी देखना उचित रहेगा.
एनडीआर-9930111 को ICAR ने उत्तर प्रदेश के लिए सुझाई गई धान की किस्मों में शामिल किया है और इसे जलभराव सहनशील किस्मों की सूची में भी रखा गया है. जहां खेत में पानी रुकने की समस्या हो, वहां यह उपयोगी हो सकती है. लेकिन गेहूं जल्दी बोना लक्ष्य हो तो खेत की निकासी और धान की कटाई का समय किस्म के नाम से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है.
पूजा सुगंध-4 सुगंधित धान की किस्म है और ICAR की उत्तर प्रदेश सलाह में इसे मध्यम अवधि की किस्मों में शामिल किया गया है. यदि किसान सुगंधित चावल का बाजार चाहता है और साथ में धान के बाद गेहूं भी लेना चाहता है, तो यह एक विकल्प हो सकती है. लेकिन गेहूं की समय पर बुवाई के लिए धान की रोपाई समय से करना और कटाई में अनावश्यक देरी न करना जरूरी है.
पूजा बासमती-1509 बासमती समूह की अपेक्षाकृत जल्दी पकने वाली किस्मों में जानी जाती है. ICAR के अनुसार बासमती की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें 1509 भी शामिल है. जल्दी पकने वाली धान किस्मों का फायदा यह होता है कि धान के बाद अगली फसल के लिए खेत अपेक्षाकृत जल्दी उपलब्ध हो सकता है. हालांकि पूर्वांचल में इसे लगाने से पहले अपने जिले की मिट्टी, सिंचाई और बाजार के अनुसार स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.

