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Kanpur Latest News: कानपुर की रिंकी मिश्रा की कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो अपनी परेशानी लेकर सरकारी दफ्तरों तक पहुंचते हैं. करीब दो महीने पहले रिंकी अपनी फरियाद लेकर 18 किलोमीटर पैदल तहसील पहुंची थीं. पति की मौत के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी अकेले उठा रही रिंकी ने वहां अपनी परेशानी बताई तो सरकारी मदद का रास्ता खुला.
रिंकी के घर पहुंचे डीएम.
कानपुर: करीब दो महीने पहले अपनी परेशानी बताने के लिए 18 किलोमीटर पैदल चलकर तहसील पहुंची रिंकी मिश्रा के लिए अब हालात काफी बदल गए हैं. उस दिन रिंकी अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी तक पहुंची थीं. अब शनिवार को वही जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह खुद उनके घर पहुंचे और परिवार का हाल जाना. इस दौरान उन्होंने बन रहे घर का काम भी देखा और परिवार को मिल रही सरकारी मदद की जानकारी ली.
रिंकी मिश्रा कानपुर के बिरसिंहपुर गांव की रहने वाली हैं. उनके पति की करीब 10 साल पहले मौत हो चुकी है. इसके बाद घर और दो बेटियों की पूरी जिम्मेदारी रिंकी के कंधों पर आ गई. परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी. उनकी बड़ी बेटी दिव्यांग है, जबकि छोटी बेटी की पढ़ाई भी पैसों की कमी के चलते प्रभावित हो रही थी.
18 जुलाई को रिंकी करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील में आयोजित समाधान दिवस पहुंची थीं. वह अपनी परेशानी जिलाधिकारी को बताना चाहती थीं. वहां उन्होंने परिवार को सरकारी राशन नहीं मिलने समेत अपनी दूसरी परेशानियां बताईं.
डीएम ने सुनी बात, शुरू हुई मदद
रिंकी की परेशानी सुनने के बाद जिलाधिकारी ने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई. परिवार को अंत्योदय राशन कार्ड, गैस कनेक्शन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला। बड़ी बेटी का दिव्यांग प्रमाण पत्र और यूनिक आईडी कार्ड भी बन गया. रिंकी के लिए अब एक पक्का घर भी बन रहा है. घर की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और आगे का काम चल रहा है. इस काम में सरकारी मदद के साथ जनसहयोग भी लिया जा रहा है। शनिवार को डीएम ने खुद मौके पर पहुंचकर मकान का काम देखा.
रिंकी को मिला काम, बेटी की पढ़ाई भी शुरू
रिंकी के परिवार की मदद यहीं नहीं रुकी. उन्हें पास के प्राथमिक स्कूल में रसोइया का काम भी मिला है. इससे उनके पास अब अपनी आमदनी का एक जरिया है. वहीं उनकी छोटी बेटी अदिति का दाखिला पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में कराया गया है. कक्षा सात में पढ़ने वाली अदिति ने यूनिट टेस्ट में पहला स्थान हासिल किया है. डीएम से मुलाकात के दौरान उसने कहा कि वह बड़ी होकर डीएम बनना चाहती है और लोगों की मदद करना चाहती है.
जिस दिन रिंकी पैदल पहुंची थीं, आज अफसर खुद घर पहुंचे
दो महीने के अंदर रिंकी के परिवार की तस्वीर काफी बदल गई है. जिस रिंकी को अपनी बात बताने के लिए 18 किलोमीटर पैदल चलकर तहसील जाना पड़ा था, अब उसी के घर जिलाधिकारी खुद पहुंचे. डीएम ने परिवार से बातचीत कर उनकी जरूरतों के बारे में जानकारी ली और चल रहे काम को भी देखा. रिंकी के लिए अब पक्का घर बन रहा है, उन्हें रोजगार मिला है और उनकी बेटियों की पढ़ाई का रास्ता भी खुल गया है. सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से परिवार की रोज की परेशानियां भी पहले के मुकाबले कम हुई हैं.
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अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
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