बहराइच: 80 और 90 के दशक का दौर अपनी सादगी, सामाजिक सरोकारों और अलग अंदाज के लिए जाना जाता है. हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 1980-90 ट्रेंड के तहत लोग अपनी पुरानी और एआई-जनरेटेड तस्वीरें साझा कर रहे हैं. इसी दौर की असली झलक और उस जमाने के जीवन शैली को समझने के लिए Local 18 ने उस दौर के वरिष्ठ कलाकार और सोशल मीडिया क्रिएटर सुनील गांधी से खास बातचीत की.
सुनील गांधी जी ने बताया कि 1990 के दशक में दूरदर्शन लखनऊ ही मनोरंजन और जन-जागरूकता का सबसे बड़ा माध्यम हुआ करता था. उन्होंने 1996 में हरीश तनेजा के निर्देशन में बने धारावाहिक पथरीले रास्ते में काम किया था. इस सीरीज के तहत अनुभवहीन और कसूरहीन जैसे अलग-अलग विषयों पर आधारित धारावाहिक बनाए गए थे.
बहराइच में हुई थी इन जगहों पर शूटिंग
इस सीरियल की शूटिंग बहराइच के डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत पर, डीएम बंगले, राजा प्रेम सिंह के फार्म और ऐतिहासिक घंटाघर जैसे प्रमुख स्थानों पर हुई थी. सुनील गांधी को इस धारावाहिक में देहाती भूमिका कुर्ता-पजामा और अंगौछा निभाने के लिए दूरदर्शन की ओर से 18,000 रुपये का भुगतान मिला था, जो उस दौर में एक बड़ी राशि मानी जाती थी.
पहली टीवी और ऐतिहासिक दिन
उस दौर में घर में टेलीविजन आना पूरे मोहल्ले के लिए उत्सव जैसा होता था. सुनील गांधी के घर में 31 अक्टूबर 1984 को पहली बार वेस्टन कंपनी का ब्लैक एंड व्हाइट शटर वाला टीवी आया था, जिसकी कीमत उस समय लगभग 1,500 रुपये थी. उसी दिन देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की दुखद हत्या हुई थी. सुनील जी ने बताया कि उन्होंने उनकी अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि का सीधा प्रसारण देखने के लिए ही यह टीवी खरीदा था. उस दौर को याद करते हुए उन्होंने कहा कि टीवी छत पर लगे एंटीना से चलता था. अक्सर हवा चलने पर या बंदरों के हिला देने पर पिक्चर लहराने लगती थी और किसी न किसी को छत पर जाकर एंटीना सीधा करना पड़ता था.
बिनाका गीतमाला और संगीत का दौर
उस जमाने में रेडियो और टीवी पर अमीन सयानी जी का कार्यक्रम बिनाका गीतमाला काफी लोकप्रिय था. सुनील जी बताते हैं कि वे आज भी उन पुरानी यादों को संजोकर रखे हुए हैं. उन्हें मोहम्मद रफ़ी और किशोर कुमार के गाने बेहद पसंद हैं और उनके पास आज भी उन गानों की हस्तलिखित डायरी सुरक्षित है.
जिम्मेदारियों के कारण एक्टिंग से दूरी
जब सुनील गांधी से पूछा गया कि इतनी बड़ी-बड़ी हस्तियों से मिलने और सफल अभिनय के बाद भी उन्होंने एक्टिंग क्यों छोड़ दी, तो उन्होंने पारिवारिक जीवन और वैवाहिक जिम्मेदारियों का जिक्र किया. सुनील जी के अनुसार, शादी और पारिवारिक जीवन की शुरुआत के साथ जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ जाता है. वे और उनके भाई मिलकर पारिवारिक व्यापार संभालते थे. व्यापारिक जरूरतों और भाई की पसंद-नापसंद को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अभिनय के पेशेवर सफर से धीरे-धीरे दूरी बना ली.
दिग्गजों से मुलाकात के यादगार लम्हें
एक्टिंग छोड़ने के बावजूद उन्हें अपने करियर के दौरान राजेश खन्ना, सुनील दत्त, गोविंदा, राज बब्बर, महमूद स्टूडियो मुंबई और गायक मोहम्मद अजीज जैसी महान हस्तियों से मिलने और काम करने का सौभाग्य मिला. भले ही पारिवारिक और वैवाहिक जीवन की व्यावहारिक जरूरतों के कारण सुनील गांधी जी ने मुख्यधारा की एक्टिंग से विदाई ले ली, लेकिन उनके भीतर का कलाकार आज भी जीवंत है. वे आज भी यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर अपनी रील और संवादों के जरिए हजारों प्रशंसकों का मनोरंजन कर रहे हैं और 80-90 के दशक की सादगी को जीवित रखे हुए हैं.

