चंदौली: जिले के मुगलसराय की बड़ी सट्टी में फल और सब्जी कारोबारियों ने अपनी 3 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है. कारोबारियों का कहना है कि स्थायी फल-सब्जी मंडी, फुटकर व्यापारियों के लिए वेंडिंग जोन और कच्चे माल से लदी गाड़ियों को नो-एंट्री से छूट देने की मांग लंबे समय से की जा रही है. अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद समाधान नहीं होने पर व्यापारी अब आंदोलन पर उतर आए हैं.
20 साल से सिर्फ मिल रहा आश्वासन
दरअसल, मुगलसराय की बड़ी सट्टी में शुक्रवार को बड़ी संख्या में फल और सब्जी कारोबारी धरने पर बैठ गए. इस दौरान आसपास की कई सट्टी और मंडियों से जुड़े व्यापारियों ने भी अपना कारोबार बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया. कारोबारियों का कहना है कि स्थायी मंडी और वेंडिंग जोन की मांग करीब दो दशक से की जा रही है, लेकिन हर बार आश्वासन के बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया.
अब आश्वासन से नहीं चलेगा काम
फल और सब्जी व्यवसायी वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष चौधरी नारायण प्रसाद सोनकर ने Local18 से बातचीत में कहा कि उनकी 3 प्रमुख मांगें हैं. पहली मांग स्थायी फल-सब्जी मंडी का निर्माण, दूसरी फुटकर व्यवसायियों के लिए वेंडिंग जोन की व्यवस्था और तीसरी फल-सब्जी जैसे कच्चे माल को लेकर आने वाली गाड़ियों को नो-एंट्री से मुक्त करना है. उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी रोज कमाने और रोज खाने वाले हैं, ऐसे में लंबे समय तक कारोबार बंद रखना उनके लिए भी आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस समय-सीमा बताकर समाधान का भरोसा देता है, तो व्यापारी धरना समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा.
मंडी समिति पर भी उठाए सवाल
व्यापारी अशोक सोनकर ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि सभी व्यापारी सर्वसम्मति से आंदोलन में शामिल हुए हैं. उन्होंने मंडी समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्षों से मंडी समिति को मंडी शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. उन्होंने कहा कि व्यापारियों को मंडी में पानी जैसी जरूरी सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं, ऐसे में व्यापारी चाहते हैं कि स्थायी मंडी का निर्माण कराया जाए और फुटकर कारोबारियों के लिए भी व्यवस्थित वेंडिंग जोन उपलब्ध कराया जाए.
व्यापार बंद होने से लोगों पर भी पड़ेगा असर
व्यापारी विशाल सोनकर ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि यह फैसला किसी शौक के कारण नहीं, बल्कि मजबूरी में लिया गया है. फल और सब्जी का कारोबार बंद होने से व्यापारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी हो सकती है. उन्होंने कहा कि व्यापारी जनता को रोजमर्रा की जरूरत की चीजें उपलब्ध कराने का काम करते हैं, लेकिन वे भी सम्मान और व्यवस्थित तरीके से अपना कारोबार करना चाहते हैं. बता दें कि कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी 3 सूत्रीय मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. व्यापारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर माकूल जवाब और स्पष्ट समय-सीमा नहीं मिलती, तब तक धरना जारी रहेगा.

