सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में चाय की दुकान में आत्महत्या कर ली. मीडिया में इस घटना के फ्लैश होते ही भारत की धरती पर हुए सबसे डरावने और झकझोर देने वाली घटनाओं में शुमार निठारी कांड की यादें सबके जेहन में तैर गई. निठारी कांड का जिक्र आज भी खौफ के उसी पुराने मंजर में वापस ले जाता है. भले ही इस घटना को हुए कई साल बीत चुके हैं लेकिन उस घटना से जुड़ी हुई कोई भी खबर या कोई भी शख्स आज भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है. नोएडा के निठारी गांव के ठीक बगल में सेक्टर 31 की कोठी नंबर D-5 में 20 साल पहले हुई घटना रूह कंपा देने वाली थी. कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली इस कांड के मेन किरदार थे. दोनों अदालत से बरी भी हो चुके हैं. आज सुरेंद्र कोली ने खुदकुशी कर ली. आखिर वो कांड क्या था और सुरेंद्र कोली कैसे साक्षात नरपिशाच का रूप ले चुका था?
सुरेंद्र कोली के कुकर्मों की यह दास्तान भारत की आपराधिक प्रणाली के सबसे काले अध्यायों में दर्ज है. निठारी कांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं थी, बल्कि यह हमारे समाज की संवेदनशीलता, प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा थी. इसने देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि कैसे समाज के हाशिए पर जी रहे गरीब परिवारों के बच्चे इन बड़े महानगरों की चकाचौंध के बीच सुरक्षित नहीं हैं. कैसे बड़ी कोठियों और ऊंची इमारतों के बीच इंसान का काला और खौफनाक सच छिपा होता है.
क्या है ये निठारी कांड?
यह मामला साल 2005 से 2006 के बीच का है. नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक कोठी के बाहर और आसपास के इलाकों से अचानक गरीब घरों के छोटे बच्चे और युवा महिलाएं एक-एक करके रहस्यमय तरीके से गायब होने लगे. अधिकांश लोग निठारी गांव के निवासी थे. दिसंबर 2006 में जब एक 14 साल की लड़की गायब हुई, तो उसके परिजन ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई.
इस गुमशुदगी के मामले की जांच के दौरान पुलिस के शक की सुई कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली पर गई. नालों से मिले नर-कंकाल मिलने शुरू हुए तो सबका दिमाग ही घूम गया. पुलिस ने जब 29 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे बने नाले की खुदाई कराई, तो वहां से बच्चों और महिलाओं के नर-कंकाल, हड्डियां और पॉलीथिन में बंद सड़े-गले अवशेष बरामद हुए.
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद एक-एक करके तहें खोलनी शुरू हुई तो पता चला कि पिछले दो सालों में दर्जनों की संख्या में मासूम बच्चों और लड़कियों का अपहरण किया जा चुका था. लेकिन कहानी इतनी ही नहीं थी, आगे का खुलासा तो और भी अधिक चौंकाने वाला साबित हुआ.
सुरेंद्र कोली आखिर क्या करता था?
इस पूरे नरसंहार का मुख्य कर्ता-धर्ता और अपराधी सुरेंद्र कोली था, जो मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी में रसोइया और घरेलू नौकर के रूप में काम करता था. कोली के गुनाहों की फेहरिस्त इतनी दर्दनाक थी कि उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दी थीं. सुरेंद्र कोली आसपास के इलाकों से गुजरने वाले छोटे बच्चों और महिलाओं को चॉकलेट, टॉफी या पैसों का लालच देकर या फिर डरा-धमकाकर पंढेर की कोठी के अंदर लाता था.
एक बार उसका शिकार कोठी के अंदर आ जाता तो फिर वह मासूम बच्चियों और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम देता था और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर देता था. इतना ही नहीं, उसके नरभक्षी होने के बात भी सामने आई थी. जांच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कोली ने पुलिस और अदालत के सामने यह स्वीकार किया था कि वह हत्या के बाद शवों के टुकड़े-टुकड़े करता था. वह उनके अंगों को पकाता था और उन्हें खाता भी था. इसके अलावा वह पीड़ितों के कपड़े और अन्य सामानों को बाहर फेंक देता था.
मोनिंदर सिंह पंढेर की क्या थी स्थिति?
कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर भी इस पूरी वारदात का अहम किरदार रहा. उसकी भूमिका को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी गई. शुरुआत में पुलिस ने उसे भी मुख्य साजिशकर्ताओं में माना. हालांकि, साल 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया, जबकि सुरेंद्र कोली की क्रूरता और उसके खिलाफ मिले वैज्ञानिक और डीएनए सबूतों के आधार पर उस पर शिकंजा कसा रहा.
कानून और अदालती फैसलों का सफर
निठारी कांड के कुल मामलों में अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई थीं. निचली अदालतों ने कई मामलों में सुरेंद्र कोली को मौत की सजा यानी फांसी भी सुनाई थी. हालांकि वो सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गया था. देश की अदालतों में इस केस को रेयरेस्ट ऑफ रेयर की कैटिगरी में रखा गया, जहां मानवाधिकार, बच्चों की सुरक्षा और पुलिस जांच के सिस्टम पर भी गंभीर सवाल उठे थे.

